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डेढ़ सौ ग्रामीण डाक सेवक हड़ताल पर, जिले भर में डाक सेवा रही ठप्प, पोस्ट आफिस में फांकती रही धूल
Updated Tue, 29 May 2018 12:05 AM IST
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डेढ़ सौ ग्रामीण डाक सेवक हड़ताल पर, जिले भर में डाक सेवा ठप
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। अपनी मांगों को लेकर जिलेभर के ग्रामीण डाकसेवक मुख्य डाकघर के बाहर चल रहे धरने पर पहुंचे। जहां पर सभी डाकसेवकों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए शहर में प्रदर्शन किया। 22 मई से चल रहे धरने पर सोमवार को काफी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्रामीण डाकसेवकों की हड़ताल के कारण, मुख्य डाकघर में जिलेभर की डाक धूल फांकती नजर आई। गांवों में डाक न पहुंचने से ग्रामीण भी पिछले एक सप्ताह से परेशान हैं।
कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद 70 ब्रांच डाकखानों के कार्यालयों पर ताले लटके हुए हैं और डाक वितरण कार्य एकदम ठप्प होकर रह गया है। उधर ग्रामीण डाक कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वो ना तो काम पर लौटेंगे और ना ही डाक सेवा को सुचारू करेंगे। बुधवार को भी ग्रामीण डाक सेवकों ने जिलाध्यक्ष सत्यनारायण गिल्लाखेड़ा के नेतृत्व में माडल टाऊन स्थित मुख्य डाकघर के बाहर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
अपनी मांगों को लेकर आल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक 22 मई से हड़ताल पर है। हड़ताल के सातवें दिन मुख्य डाकघर के बाहर डाक सेवकों को संबोधित करते हुए सत्यनारायण गिल्लाखेड़ा ने कहा कि सरकार उनको पर्याप्त वेतन नहीं दे रही। कमलेश चंद्रा रिपोर्ट को लागू करने से भी सरकार पीछे हट रही है। गिल्लाखेड़ा ने मांग रखी कि सरकार सातवां पे कमीशन लागू करे और तथा सभी ग्रामीण डाक सेवकों को पक्का करे। हड़ताल पर जाने से जिले में प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों में बंटने वाले डाक पत्र, जिनमें स्पीड पोस्ट, पार्सल, मनीआर्डर, रजिस्ट्री, विद्यार्थियों के रोल नंबर, नियुक्ति पत्र मुख्य डाकघरों में ही पड़े रहे। शहरों में डाक सेवा के विकल्प के रूप में कोरियर सेवा होती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कोरियर सेवा ना होने से ग्रामीण इलाकों में डाक सेवकों की हड़ताल खासा प्रभाव डालती दिख रही है। इस मौके पर रतिया से हरपाल, दिनेश, सुशील, पवन, जाखल से बलबीर, बिट्टू, सर्वजीत, धारसूल से सुरेन्द्र व कुलदीप, टोहाना से चांदराम, राममेहर, भूना से घनश्याम, महेन्द्र तथा शंकर आदि शामिल हुए।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। अपनी मांगों को लेकर जिलेभर के ग्रामीण डाकसेवक मुख्य डाकघर के बाहर चल रहे धरने पर पहुंचे। जहां पर सभी डाकसेवकों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए शहर में प्रदर्शन किया। 22 मई से चल रहे धरने पर सोमवार को काफी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्रामीण डाकसेवकों की हड़ताल के कारण, मुख्य डाकघर में जिलेभर की डाक धूल फांकती नजर आई। गांवों में डाक न पहुंचने से ग्रामीण भी पिछले एक सप्ताह से परेशान हैं।
कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद 70 ब्रांच डाकखानों के कार्यालयों पर ताले लटके हुए हैं और डाक वितरण कार्य एकदम ठप्प होकर रह गया है। उधर ग्रामीण डाक कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वो ना तो काम पर लौटेंगे और ना ही डाक सेवा को सुचारू करेंगे। बुधवार को भी ग्रामीण डाक सेवकों ने जिलाध्यक्ष सत्यनारायण गिल्लाखेड़ा के नेतृत्व में माडल टाऊन स्थित मुख्य डाकघर के बाहर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
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अपनी मांगों को लेकर आल इंडिया ग्रामीण डाक सेवक 22 मई से हड़ताल पर है। हड़ताल के सातवें दिन मुख्य डाकघर के बाहर डाक सेवकों को संबोधित करते हुए सत्यनारायण गिल्लाखेड़ा ने कहा कि सरकार उनको पर्याप्त वेतन नहीं दे रही। कमलेश चंद्रा रिपोर्ट को लागू करने से भी सरकार पीछे हट रही है। गिल्लाखेड़ा ने मांग रखी कि सरकार सातवां पे कमीशन लागू करे और तथा सभी ग्रामीण डाक सेवकों को पक्का करे। हड़ताल पर जाने से जिले में प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों में बंटने वाले डाक पत्र, जिनमें स्पीड पोस्ट, पार्सल, मनीआर्डर, रजिस्ट्री, विद्यार्थियों के रोल नंबर, नियुक्ति पत्र मुख्य डाकघरों में ही पड़े रहे। शहरों में डाक सेवा के विकल्प के रूप में कोरियर सेवा होती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कोरियर सेवा ना होने से ग्रामीण इलाकों में डाक सेवकों की हड़ताल खासा प्रभाव डालती दिख रही है। इस मौके पर रतिया से हरपाल, दिनेश, सुशील, पवन, जाखल से बलबीर, बिट्टू, सर्वजीत, धारसूल से सुरेन्द्र व कुलदीप, टोहाना से चांदराम, राममेहर, भूना से घनश्याम, महेन्द्र तथा शंकर आदि शामिल हुए।
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