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विद्यालयों में न क्लर्क हैं, न सफाई कर्मचारी : अध्यापक संघ
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:34 AM IST
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विद्यालयों में न क्लर्क हैं, न सफाई कर्मचारी : अध्यापक संघ
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान सुरजीत दुसाद, जिला सचिव कृष्ण नैन, कैशियर रघुनाथ मेहता, राज्य कमेटी सदस्य राजपाल मिताथल, जिला कमेटी सदस्य रामनिवास, खंड सचिव सुमेर आर्य ने संयुक्त ब्यान जारी कर कहा कि हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग हर साल कोई न कोई नया जाल अध्यापकों पर फेंकता है। कहा कि प्रदेश में कुल 14380 विद्यालय हैं। इनमें 11,100 प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में न तो क्लर्क हैं, न सफाई कर्मचारी, न चौकीदार, न माली, न कंप्यूटर टीचर, न पूरे अध्यापक और न कोई सुरक्षा, न समय पर किताबें आती हैं। सरकार और शिक्षा विभाग हर रोज कोई न कोई योजना अध्यापकों पर थोप देती है। इसके बाद भी प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालयों में किसी प्रकार का कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
बताया कि फतेहाबाद जिले में 386 प्राइमरी विद्यालय है। 147 के लगभग विद्यालयों में सफाई कर्मचारी नहीं है। प्रदेश के अन्य विद्यालयों में भी यही हाल है। पहले विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन भेजी गई। विद्यालयों में न डाटा सिम भेजी गई और न ढाणियों, गांव में सिम की रेंज रहती है। यह केवल कंपनियों को फायदा पहुंचाने की चाल थी। सारा खर्च अध्यापकों ने भरा। इसके बाद एमआईएस पोर्टल लगाया गया। इस पर भी अध्यापकों को बाजार घुमाया गया। इसके बाद आज अन्य योजनाएं भी बिना बजट के नहीं चलीं। इसका खर्चा अध्यापकों ने उठाया। अब आया वेतन रोकने का ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, जिसका सारा खर्च विद्यालयों के मुखियाओं पर डाला गया है। मुखियाओं ने इसे अध्यापकों पर डाल दिया है। अध्यापक नेताओं ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में अध्यापकों को हर कार्य में व्यस्त कर दिया जाता है, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल न बन सके। अब एचआरएमएस आ गया है। इसे भरने में एक अध्यापक के लगभग 500 रुपये खर्च होंगे। कहने को तो विभाग ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। लेकिन, हरियाणा के 11,100 प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालयों में न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर टीचर है। ऐसे में हजारों अध्यापकों का एचआरएमएस कैसे भरा जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल तबादला नीति में निकाल दिए। दावा किया कि सरकार बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर के अध्यापकों को बदनाम करके सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में बेचना चाहती है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम के कारण अध्यापकों का वेतन रोका या तंग किया गया तो अध्यापक संघ आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला प्रधान सुरजीत दुसाद, जिला सचिव कृष्ण नैन, कैशियर रघुनाथ मेहता, राज्य कमेटी सदस्य राजपाल मिताथल, जिला कमेटी सदस्य रामनिवास, खंड सचिव सुमेर आर्य ने संयुक्त ब्यान जारी कर कहा कि हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग हर साल कोई न कोई नया जाल अध्यापकों पर फेंकता है। कहा कि प्रदेश में कुल 14380 विद्यालय हैं। इनमें 11,100 प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में न तो क्लर्क हैं, न सफाई कर्मचारी, न चौकीदार, न माली, न कंप्यूटर टीचर, न पूरे अध्यापक और न कोई सुरक्षा, न समय पर किताबें आती हैं। सरकार और शिक्षा विभाग हर रोज कोई न कोई योजना अध्यापकों पर थोप देती है। इसके बाद भी प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालयों में किसी प्रकार का कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
बताया कि फतेहाबाद जिले में 386 प्राइमरी विद्यालय है। 147 के लगभग विद्यालयों में सफाई कर्मचारी नहीं है। प्रदेश के अन्य विद्यालयों में भी यही हाल है। पहले विद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन भेजी गई। विद्यालयों में न डाटा सिम भेजी गई और न ढाणियों, गांव में सिम की रेंज रहती है। यह केवल कंपनियों को फायदा पहुंचाने की चाल थी। सारा खर्च अध्यापकों ने भरा। इसके बाद एमआईएस पोर्टल लगाया गया। इस पर भी अध्यापकों को बाजार घुमाया गया। इसके बाद आज अन्य योजनाएं भी बिना बजट के नहीं चलीं। इसका खर्चा अध्यापकों ने उठाया। अब आया वेतन रोकने का ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, जिसका सारा खर्च विद्यालयों के मुखियाओं पर डाला गया है। मुखियाओं ने इसे अध्यापकों पर डाल दिया है। अध्यापक नेताओं ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में अध्यापकों को हर कार्य में व्यस्त कर दिया जाता है, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल न बन सके। अब एचआरएमएस आ गया है। इसे भरने में एक अध्यापक के लगभग 500 रुपये खर्च होंगे। कहने को तो विभाग ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। लेकिन, हरियाणा के 11,100 प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालयों में न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर टीचर है। ऐसे में हजारों अध्यापकों का एचआरएमएस कैसे भरा जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल तबादला नीति में निकाल दिए। दावा किया कि सरकार बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर के अध्यापकों को बदनाम करके सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में बेचना चाहती है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम के कारण अध्यापकों का वेतन रोका या तंग किया गया तो अध्यापक संघ आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
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