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Fatehabad News: काजलहेड़ी के तालाब में 200 साल पुराने दुर्लभ प्रजाति के कछुए, तालियां बजाते ही आ जाते हैं बाहर

Thu, 22 May 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 22 May 2025 11:12 PM IST
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200 years old rare species of turtles in Kajalheri pond, come out as soon as you clap
गांव काजलहेड़ी के तालाब में दुर्लभ प्रजाति के कछुएस्त्रोत विनोद कड़वासरा
फतेहाबाद। गांव काजलहेड़ी की पहचान वहां के तालाब में पल रहे दुर्लभ प्रजाति के कछुओं से है। करीब 200 साल पुराने इन कछुओं की खास बात ये है कि ताली बजाते ही ये तालाब से बाहर आ जाते हैं।
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वन्य जीव प्रमियों और ग्रामीणों के प्रयास से वर्ष 2019 में इस तालाब को गुरु गोरखनाथ सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया ताकि सरकार संभाल कर सके और कछुओं को संरक्षण मिल सके। इन कछुओं को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। शिव मंदिर के पास स्थित तालाब करीब 300 साल पुराना बताया जा रहा है। यहां पर इंडियन सॉफ्ट सॉल प्रजाति और रेड रूफड प्रजाति के कछुए मुख्य तौर पर हैं। बताया जा रहा है कि इन कछुओं के होने का कारण तालाब के पास नाथों का धूणा होना है। बताया जाता है कि पहले नाथ संप्रदाय के लोग गंगा नदी में स्नान करने के लिए जाते थे तो वहां से कछुओं को लेकर आते और तालाब में छोड़ देते थे।
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तालाब के पानी की नहीं हो रही सफाई

करीब पांच एकड़ में बने तालाब में चार से पांच साल पहले तक करीब 200 कछुए थे। फिलहाल इनकी संख्या 100 से 125 तक रह गई है। इसका कारण वन्य जीव प्राणी विभाग की लापरवाही बताया जा रहा है। तालाब से समय पर गंदा पानी नहीं निकाला जा रहा है और न ही उसमें ताजा पानी भरा जा रहा है। इस वजह से कछुओं की संख्या में कमी आ रही है।
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कछुओं को बचाना है तो मछली पालन ठेका करना होगा बंद

वन्यजीव संरक्षक विनोद कड़वासरा का कहना है कि पहले प्रत्येक गांव के तलाबों में कछुए होते थे, लेकिन अब मुश्किल से जिले के 15 से 20 तालाबों में ही बचे है। वजह ये है कि पंचायतें तालाबों को मछली पालन के लिए दे रही है। जो भी ठेके पर लेता है वह इन कछुओं को निकालकर ले जाता है। अगर ठेके पर भी देना है तो मछलियों को निकालने का काम विभाग की निगरानी में होना चाहिए। गांव काजलहेड़ी में तालाब के चारों ओर परमाणु उर्जा संयंत्र गोरखपुर की तरफ से जाली लगवाई जानी थी लेकिन ये काम भी अधूरा है।


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गांव काजलहेड़ी में कछुओं के संरक्षण के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। पिछले दिनों सीड डाली गई थी। ये बात ठीक है कि पानी की कमी रहती है, फिलहाल निजी ट्यूबवेल से पानी डाला जा रहा है। जहां तक गंदगी की बात है कि मौजूदा तालाब के साथ दूसरा तालाब तैयार हो चुका है नहर में पानी आने के बाद उसे भरा जाएगा। इससे पशुओं के लिए दूसरे तालाब में जगह मिल पाएगी।

- रामकेश, इंस्पेक्टर, वन्य जीव प्राणी विभाग।
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