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मृतक के स्थान पर दूसरा व्यक्ति किया अदालत में खड़ा, 7 को कैद
Updated Mon, 18 Jun 2018 11:16 PM IST
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अदालत में पेश किया दूसरा व्यक्ति, सात को कैद
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने मृतक की जगह दूसरा आदमी अदालत में पेश करके मुस्तरका खाते की जमीन अपने नाम करवाने के मामले में एक पंच सहित 7 लोगों को 2-2 साल की कैद की सजा सुनाई है। आरोपियों को 400 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने रहनखेड़ी निवासी प्यार कौर उर्फ पूरा ने गांव के ही चार भाईयों बलवंत सिंह, जसवंत सिंह, श्रवण सिंह, भगवान सिंह व अवतार सिंह, कुलदीप सिंह और पंच जसविन्द्र कौर के खिलाफ 26 सितंबर 2012 को धोखाधड़ी व षडयंत्र रचने के आरोप में केस दर्ज किया था। प्यार कौर ने अपनी शिकायत में अदालत को बताया कि उसके अविवाहित भाई रामसिंह की मृत्यु 20 मई 1989 को हुई थी और उसके शिकायत कर्ता और उसकी बहन प्रेमकौर, भाई छिन्द्र सिंह, हरनेक सिंह, जीतसिंह व महेन्द्र सिंह उनकी मुस्तरका खाते की जमीन के कानूनी वारिस हैं। आरोपियों में 7 उसके चचेरे भाई हैं। आरोपी बलवंत सिंह व जसवंत सिंह ने दीवानी अदालत फतेहाबाद में अन्य आरोपियों से मिल कर दावा किया और मृतक रामसिंह को प्रतिवादी दिखाया तथा जवाबदावा भी दिया। कुलदीप सिंह ने अदालत में अपने आप को रामसिंह बताया और स्टेटमेंट व नो ओब्जेक्शन भी दिया। पंच सब को जानती थी और उसे यह भी पता था कि रामसिंह की मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उसने कुलदीप सिंह की रामसिंह के रुप में शिनाख्त की। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पंच सहित 7 आरोपियों को दोषी करार देते हुए 2-2 साल की कैद व 400 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने मृतक की जगह दूसरा आदमी अदालत में पेश करके मुस्तरका खाते की जमीन अपने नाम करवाने के मामले में एक पंच सहित 7 लोगों को 2-2 साल की कैद की सजा सुनाई है। आरोपियों को 400 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने रहनखेड़ी निवासी प्यार कौर उर्फ पूरा ने गांव के ही चार भाईयों बलवंत सिंह, जसवंत सिंह, श्रवण सिंह, भगवान सिंह व अवतार सिंह, कुलदीप सिंह और पंच जसविन्द्र कौर के खिलाफ 26 सितंबर 2012 को धोखाधड़ी व षडयंत्र रचने के आरोप में केस दर्ज किया था। प्यार कौर ने अपनी शिकायत में अदालत को बताया कि उसके अविवाहित भाई रामसिंह की मृत्यु 20 मई 1989 को हुई थी और उसके शिकायत कर्ता और उसकी बहन प्रेमकौर, भाई छिन्द्र सिंह, हरनेक सिंह, जीतसिंह व महेन्द्र सिंह उनकी मुस्तरका खाते की जमीन के कानूनी वारिस हैं। आरोपियों में 7 उसके चचेरे भाई हैं। आरोपी बलवंत सिंह व जसवंत सिंह ने दीवानी अदालत फतेहाबाद में अन्य आरोपियों से मिल कर दावा किया और मृतक रामसिंह को प्रतिवादी दिखाया तथा जवाबदावा भी दिया। कुलदीप सिंह ने अदालत में अपने आप को रामसिंह बताया और स्टेटमेंट व नो ओब्जेक्शन भी दिया। पंच सब को जानती थी और उसे यह भी पता था कि रामसिंह की मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उसने कुलदीप सिंह की रामसिंह के रुप में शिनाख्त की। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पंच सहित 7 आरोपियों को दोषी करार देते हुए 2-2 साल की कैद व 400 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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