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नरमे के भाव में उछाल, 200 रुपये की तेजी के साथ 5500 रुपये पर पहुंचा नरमा
Updated Sat, 06 Jan 2018 11:54 PM IST
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200 रुपये उछाल के साथ 5500 रुपये पर पहुंचा नरमा
सुरेंद्र असीजा
फतेहाबाद।
फतेहाबाद में नरमे के भाव 55 सौ रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए हैं। नवंबर माह में जब नरमे की आवक हुई थी तो उस समय ये भाव महज 42 सौ रुपये प्रति क्विंटल ही थे। हालांकि नरमे का प्रति एकड़ उत्पादन इस बार काफी कम है लेकिन इसके बावजूद इस बार नरमे की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। अनाजमंडी के व्यापारियों की मानें तो इस सीजन नरमे के दामों में अभी और तेजी की संभावना लगातार बनी हुई है। पिछले चार दिनों में ही नरमे के भावों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की जा चुकी है।
फतेहाबाद में इस बार 76 हजार हेक्टेयर एकड़ भूमि पर नरमे की बिजाई हुई थी। हालांकि इससे पहले जिले में नरमे का रकबा हमेशा ही एक लाख हेक्टेयर एकड़ के पास पहुंचता रहा है लेकिन पिछले दो सालों में नरमे की फसल को सफेद मक्खी द्वारा चट कर जाने के कारण किसानों के हौंसले पस्त हुए और इनका रूझान नरमे की बजाये धान की ओर हो गया। यही वजह है कि इस बार धान का रकबा जिले में ज्यादा है। बड़ी बात ये है कि धान का उत्पादन पिछले दस सालों में सबसे अधिक इसी साल रहा है। नरमे को लेकर किसानों में निराशा भी है। वजह है आवक के समय नरमे के रेट 4000 से लेकर 42 सौ तक ही रहे। अधिकांश किसानों ने नरमा बेच दिया था। लेकिन बाद में गुजरात के किसानों के संघर्ष के चलते एक्सपोर्ट को अनुमति मिल गई जिससे नरमे के भावों में तेजी आती गई। पिछले सप्ताह नरमे के भाव 5 हजार प्रति क्विंटल थे जो 4 दिन पूर्व तक 53 सौ रुपये प्रति क्विंटल थे, जो अब 5500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए हैं। अच्छे दाम मिलने के बावजूद किसानों को कोई खास फायदा नहीं मिल रहा। इसके पीछे उत्पादन की कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है। किसानों की मानें तो पहले आठ क्विंटल प्रति एकड़ तक नरमे का उत्पादन हो जाता था जो इस बार गिरकर महज चार से पांच क्विंटल प्रति एकड़ ही रह गया है। हालांकि भाव अच्छे हैं जिस कारण नुक्सान की भरपाई हो रही है। कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण के अनुसार सफेद मक्खी के प्रकोप के चलते किसान नरमे की बिजाई से पीछे हट गए थे। जिसके कारण लगभग 20 से 25 हजार हेक्टेयर एकड़ भूमि पर नरमे की बिजाई कम हुई।
पिछले साल के मुकाबले 20 हजार क्विंटल कम हुई आवक
मार्केट कमेटी के सूत्रों की मानें तो इस बार फतेहाबाद मंडी में 92 हजार क्विंटल नरमे की ही आवक हुई है जबकि पिछले साल एक लाख 12 हजार क्विंटल नरमे की आवक फतेहाबाद अनाजमंडी में हुई थी। इस तरह पिछले साल के मुकाबले अकेली फतेहाबाद अनाजमंडी में ही तकरीबन 20 हजार क्विंटल नरमे की कम आवक हुई है। इसके पीछे नरमे का कम रकबा तो एक बड़ी वजह है ही, साथ ही कम उत्पादन भी किसानों को फायदे में आने से रोक गया। खुद मार्केट कमेटी सचिव संजीव सचदेवा भी इस बात को मानते हैं। सचदेवा की मानें तो इस बार किसानों का रूझान नरमे की बजाये धान की ओर ज्यादा था। लेकिन अच्छे भावों के चलते उम्मीद है कि अब की बार किसान वापस नरमे की और लौटेंगे। मंडी सूत्रों के अनुसार, इस बार नरमे के दाम 7 हजार प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच सकते हैं।
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हरियाणा में किसान नरमे की बिजाई से कतरा रहे थे। जिस कारण नरमे की बिजाई और उत्पादन दोनों में गिरावट आई है। लेकिन अन्य राज्यों में नरमे का उत्पादन अधिक होने के कारण भाव तेज हुए हैं। एक्सपोर्ट की अनुमति मिलने से आगे और तेजी आने की संभावना है।’
-सुशील मित्तल, प्रधान, काटन मिल एसोसिएशन, हरियाणा
06 एफटीबीपी 11-फतेहाबाद की अनाजमंडी में आया नरमा
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सुरेंद्र असीजा
फतेहाबाद।
फतेहाबाद में नरमे के भाव 55 सौ रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए हैं। नवंबर माह में जब नरमे की आवक हुई थी तो उस समय ये भाव महज 42 सौ रुपये प्रति क्विंटल ही थे। हालांकि नरमे का प्रति एकड़ उत्पादन इस बार काफी कम है लेकिन इसके बावजूद इस बार नरमे की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। अनाजमंडी के व्यापारियों की मानें तो इस सीजन नरमे के दामों में अभी और तेजी की संभावना लगातार बनी हुई है। पिछले चार दिनों में ही नरमे के भावों में 200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की जा चुकी है।
फतेहाबाद में इस बार 76 हजार हेक्टेयर एकड़ भूमि पर नरमे की बिजाई हुई थी। हालांकि इससे पहले जिले में नरमे का रकबा हमेशा ही एक लाख हेक्टेयर एकड़ के पास पहुंचता रहा है लेकिन पिछले दो सालों में नरमे की फसल को सफेद मक्खी द्वारा चट कर जाने के कारण किसानों के हौंसले पस्त हुए और इनका रूझान नरमे की बजाये धान की ओर हो गया। यही वजह है कि इस बार धान का रकबा जिले में ज्यादा है। बड़ी बात ये है कि धान का उत्पादन पिछले दस सालों में सबसे अधिक इसी साल रहा है। नरमे को लेकर किसानों में निराशा भी है। वजह है आवक के समय नरमे के रेट 4000 से लेकर 42 सौ तक ही रहे। अधिकांश किसानों ने नरमा बेच दिया था। लेकिन बाद में गुजरात के किसानों के संघर्ष के चलते एक्सपोर्ट को अनुमति मिल गई जिससे नरमे के भावों में तेजी आती गई। पिछले सप्ताह नरमे के भाव 5 हजार प्रति क्विंटल थे जो 4 दिन पूर्व तक 53 सौ रुपये प्रति क्विंटल थे, जो अब 5500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए हैं। अच्छे दाम मिलने के बावजूद किसानों को कोई खास फायदा नहीं मिल रहा। इसके पीछे उत्पादन की कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है। किसानों की मानें तो पहले आठ क्विंटल प्रति एकड़ तक नरमे का उत्पादन हो जाता था जो इस बार गिरकर महज चार से पांच क्विंटल प्रति एकड़ ही रह गया है। हालांकि भाव अच्छे हैं जिस कारण नुक्सान की भरपाई हो रही है। कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण के अनुसार सफेद मक्खी के प्रकोप के चलते किसान नरमे की बिजाई से पीछे हट गए थे। जिसके कारण लगभग 20 से 25 हजार हेक्टेयर एकड़ भूमि पर नरमे की बिजाई कम हुई।
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पिछले साल के मुकाबले 20 हजार क्विंटल कम हुई आवक
मार्केट कमेटी के सूत्रों की मानें तो इस बार फतेहाबाद मंडी में 92 हजार क्विंटल नरमे की ही आवक हुई है जबकि पिछले साल एक लाख 12 हजार क्विंटल नरमे की आवक फतेहाबाद अनाजमंडी में हुई थी। इस तरह पिछले साल के मुकाबले अकेली फतेहाबाद अनाजमंडी में ही तकरीबन 20 हजार क्विंटल नरमे की कम आवक हुई है। इसके पीछे नरमे का कम रकबा तो एक बड़ी वजह है ही, साथ ही कम उत्पादन भी किसानों को फायदे में आने से रोक गया। खुद मार्केट कमेटी सचिव संजीव सचदेवा भी इस बात को मानते हैं। सचदेवा की मानें तो इस बार किसानों का रूझान नरमे की बजाये धान की ओर ज्यादा था। लेकिन अच्छे भावों के चलते उम्मीद है कि अब की बार किसान वापस नरमे की और लौटेंगे। मंडी सूत्रों के अनुसार, इस बार नरमे के दाम 7 हजार प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच सकते हैं।
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हरियाणा में किसान नरमे की बिजाई से कतरा रहे थे। जिस कारण नरमे की बिजाई और उत्पादन दोनों में गिरावट आई है। लेकिन अन्य राज्यों में नरमे का उत्पादन अधिक होने के कारण भाव तेज हुए हैं। एक्सपोर्ट की अनुमति मिलने से आगे और तेजी आने की संभावना है।’
-सुशील मित्तल, प्रधान, काटन मिल एसोसिएशन, हरियाणा
06 एफटीबीपी 11-फतेहाबाद की अनाजमंडी में आया नरमा