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बोर्ड की लापरवाही से कम मिले अंक, सरकारी संस्थान की बजाए निजी में लेना पड़ा दाखिला
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:31 PM IST
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बोर्ड की लापरवाही से कम मिले अंक, सरकारी संस्थान नहीं हो पाया दाखिला
टोहाना।
हरियाणा शिक्षा बोर्ड की गलती के चलते भाटिया नगर के दो बच्चों को इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है। दोनों छात्रों के बारहवीं कक्षा में विभाग की गलती के कारण अंक कम होने की वजह से उच्च सरकारी संस्थान में दाखिला नहीं हो पाया। अगर इन छात्रों को अपनी मेहनत पर भरोसा न होता और ये गौर न करते तो ये लापरवाही शायद सामने भी न आती। अब बच्चों और उनके अभिभावकों ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए रि-चेकिंग में खर्च हुई राशि और अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलवाने में मदद की मांग की है। भाटिया नगर निवासी जागृत ने बताया कि बारहवीं का परीक्षा परिणाम 18 मई को घोषित किया गया था। जिसमें जागृत के 440 अंक दिए गए थे जिसमें उसके अंग्रेजी विषय में 52 अंक दिए थे। छात्र को भरोसा था कि उसका यह पेपर बहुत अच्छा हुआ था तथा उसके अंक तो 90 से अधिक आने चाहिए थे। उसके बाद उसने पांच सौ रुपये की फीस लगाकर अपनी आंसर शीट निकलवाई। जब उसने देखा तो पता चला कि विभाग द्वारा आधी शीट को चेक नहीं किया था। जब उसने देखा तो 34 नंबर कम मिले थे। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा री-चेकिंग के बाद 86 नंबर बन गए । जागृत ने बताया बीटेक में दाखिले हेतु उसने जेई ई की परीक्षा दी थी जिसे उसने पास कर लिया था, लेकिन बारहवीं में नंबर कम होने की वजह से उसका सरकारी कालेज में दाखिला नहीं हो पाया। अब उसे मजबूरन निजी कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ेगी। उसने बताया कि सरकारी कॉलेज में जो सेेमेस्टर फीस उसकी तीस हजार लगनी थी अब वह उसे 80 हजार तक देनी पड़ेगी। उसने सरकार से मांग की है कि भिवानी बोर्ड की गलती के कारण उसका दाखिला नहीं हो पाया। उसके सरकारी कालेज में दाखिले में उसकी मदद की जाए और उसका खर्च भी उसे वापस किया जाए। इसी तरह एक अन्य छात्र रितिक ने बताया कि उसकी परीक्षा में 471 अंक थे। उसके अंग्रेजी विषय में 82 अंक थे जबकि पेपर शीट निकलवाने के बाद 95 अंक हो गए। इस तरह उसके 471 अंक की बजाए 484 अंक हो गए। यदि शिक्षा बोर्ड ये लापरवाही न करता तो उसका डीयू कॉलेज में दाखिला सरकारी संस्थान में हो जाता। छात्रों ने बताया कि बोर्ड की लापरवाही की वजह से उन्हें आर्थिक बोझ थी उठाना पड़ा है। छात्रों ने सरकार से मांग की है कि उनके द्वारा मूल्यांकन के लिए भरी फीस वापस दिलवाई जाए और उनका दाखिला सरकारी संस्थान में करवाया जाए।
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टोहाना।
हरियाणा शिक्षा बोर्ड की गलती के चलते भाटिया नगर के दो बच्चों को इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है। दोनों छात्रों के बारहवीं कक्षा में विभाग की गलती के कारण अंक कम होने की वजह से उच्च सरकारी संस्थान में दाखिला नहीं हो पाया। अगर इन छात्रों को अपनी मेहनत पर भरोसा न होता और ये गौर न करते तो ये लापरवाही शायद सामने भी न आती। अब बच्चों और उनके अभिभावकों ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए रि-चेकिंग में खर्च हुई राशि और अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलवाने में मदद की मांग की है। भाटिया नगर निवासी जागृत ने बताया कि बारहवीं का परीक्षा परिणाम 18 मई को घोषित किया गया था। जिसमें जागृत के 440 अंक दिए गए थे जिसमें उसके अंग्रेजी विषय में 52 अंक दिए थे। छात्र को भरोसा था कि उसका यह पेपर बहुत अच्छा हुआ था तथा उसके अंक तो 90 से अधिक आने चाहिए थे। उसके बाद उसने पांच सौ रुपये की फीस लगाकर अपनी आंसर शीट निकलवाई। जब उसने देखा तो पता चला कि विभाग द्वारा आधी शीट को चेक नहीं किया था। जब उसने देखा तो 34 नंबर कम मिले थे। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा री-चेकिंग के बाद 86 नंबर बन गए । जागृत ने बताया बीटेक में दाखिले हेतु उसने जेई ई की परीक्षा दी थी जिसे उसने पास कर लिया था, लेकिन बारहवीं में नंबर कम होने की वजह से उसका सरकारी कालेज में दाखिला नहीं हो पाया। अब उसे मजबूरन निजी कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ेगी। उसने बताया कि सरकारी कॉलेज में जो सेेमेस्टर फीस उसकी तीस हजार लगनी थी अब वह उसे 80 हजार तक देनी पड़ेगी। उसने सरकार से मांग की है कि भिवानी बोर्ड की गलती के कारण उसका दाखिला नहीं हो पाया। उसके सरकारी कालेज में दाखिले में उसकी मदद की जाए और उसका खर्च भी उसे वापस किया जाए। इसी तरह एक अन्य छात्र रितिक ने बताया कि उसकी परीक्षा में 471 अंक थे। उसके अंग्रेजी विषय में 82 अंक थे जबकि पेपर शीट निकलवाने के बाद 95 अंक हो गए। इस तरह उसके 471 अंक की बजाए 484 अंक हो गए। यदि शिक्षा बोर्ड ये लापरवाही न करता तो उसका डीयू कॉलेज में दाखिला सरकारी संस्थान में हो जाता। छात्रों ने बताया कि बोर्ड की लापरवाही की वजह से उन्हें आर्थिक बोझ थी उठाना पड़ा है। छात्रों ने सरकार से मांग की है कि उनके द्वारा मूल्यांकन के लिए भरी फीस वापस दिलवाई जाए और उनका दाखिला सरकारी संस्थान में करवाया जाए।