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शुगर मिल बंद होने से हजारों परिवारों को नुकसान
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:16 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भूना।
शुगर मिल के सामने किसान संघर्ष समिति का धरना चौथे दिन प्रवेश कर गया है। धरने पर किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता किसान नेता चांदी राम कड़वासरा ने की। जबकि संचालन किसान मजदूर एकता मंच के अध्यक्ष कृष्ण स्वरूप गोरखुपरिया ने किया। कड़वासरा ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के प्रति वफादार नहीं है। चार दिन बीत जाने के बावजूद किसानों के धरने पर कोई भी सरकार का नुमाइंदा व प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा।
उन्होंने कहा कि किसानों को सुविधा देने के नाम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार ने ही सबसे ज्यादा किसानों का शोषण हुआ है। उन्होंने कहा कि अपनी फसल बेचने के लिए संघर्ष के रास्ते को अपनाने पर मजबूर है। उन्होंने कहा कि हर व्यापारी व कारीगर अपने सामान की कीमत स्वयं तय करते हैं। मगर किसान अपनी फसल का मूल्य दूसरों के भरोसे छोड़ रहा है। ऐसी नीतियां किसान को बर्बादी की ओर लेकर जा रही हैं। गोरखपुरिया ने कहा कि शुगर मिल बंद होने से हजारों परिवारों को नुकसान हुआ है। इसमें किसानों को गन्ना फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता था। वहीं मजदूरों को भी रोजगार मिला हुआ था। इसलिए सरकार को किसानों की समस्या का समाधान तुरंत प्रभाव से करना चाहिए। इस अवसर पर जनवादी नौजवान सभा के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप सिंह नत्थवान, कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार धारनिया, चेयरमैन रामनारायण बिश्रोई, रामस्वरूप जाखड़, अजय कुमार झाझड़ा, जगदीश चंद्र सिंथला, फकीर चंद, ईश्वर सिंह नहला, महेंद्र सिंह जांडली, बलबीर सिंह दहिया, भलेराम, आजाद सिंह, अजीत बाजिया, रामनिवास, रामफल ओला, पवन कुमार, राजकरण, रामनिवास आदि किसानों ने भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
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भूना।
शुगर मिल के सामने किसान संघर्ष समिति का धरना चौथे दिन प्रवेश कर गया है। धरने पर किसानों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता किसान नेता चांदी राम कड़वासरा ने की। जबकि संचालन किसान मजदूर एकता मंच के अध्यक्ष कृष्ण स्वरूप गोरखुपरिया ने किया। कड़वासरा ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के प्रति वफादार नहीं है। चार दिन बीत जाने के बावजूद किसानों के धरने पर कोई भी सरकार का नुमाइंदा व प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा।
उन्होंने कहा कि किसानों को सुविधा देने के नाम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार ने ही सबसे ज्यादा किसानों का शोषण हुआ है। उन्होंने कहा कि अपनी फसल बेचने के लिए संघर्ष के रास्ते को अपनाने पर मजबूर है। उन्होंने कहा कि हर व्यापारी व कारीगर अपने सामान की कीमत स्वयं तय करते हैं। मगर किसान अपनी फसल का मूल्य दूसरों के भरोसे छोड़ रहा है। ऐसी नीतियां किसान को बर्बादी की ओर लेकर जा रही हैं। गोरखपुरिया ने कहा कि शुगर मिल बंद होने से हजारों परिवारों को नुकसान हुआ है। इसमें किसानों को गन्ना फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता था। वहीं मजदूरों को भी रोजगार मिला हुआ था। इसलिए सरकार को किसानों की समस्या का समाधान तुरंत प्रभाव से करना चाहिए। इस अवसर पर जनवादी नौजवान सभा के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप सिंह नत्थवान, कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार धारनिया, चेयरमैन रामनारायण बिश्रोई, रामस्वरूप जाखड़, अजय कुमार झाझड़ा, जगदीश चंद्र सिंथला, फकीर चंद, ईश्वर सिंह नहला, महेंद्र सिंह जांडली, बलबीर सिंह दहिया, भलेराम, आजाद सिंह, अजीत बाजिया, रामनिवास, रामफल ओला, पवन कुमार, राजकरण, रामनिवास आदि किसानों ने भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
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