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फर्जी सीएम राहत कोष में फर्जीवाड़ा : फतेहाबाद में 64 आवेदन निकले थे फर्जी, डीसी की चिट्टी पर भी नहीं हुई थी कार्रवाई
Updated Thu, 06 Sep 2018 12:46 AM IST
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अमित रूखाया
फतेहाबाद। कैथल में पकड़े गए मुख्यमंत्री राहत कोष से फर्जी मेडिकल आवेदनों की मदद से सहायता राशि लेने की तर्ज पर फतेहाबाद में भी ऐसे मामले सामने आए थे लेकिन डीसी की चिट्टी के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके चलते इन मामलों का मास्टरमाइंड पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। अगर पुलिस ने समय रहते हुए इन मामलों को ट्रेस कर मास्टरमाइंड को काबू कर लिया होता तो गिरोह पहले ही पुलिस की गिरफ्त में होता। जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज ने इसकी पुष्टि की है। भारद्वाज की मानें तो पुलिस का तर्क था कि चूंकि आरोपियों को सीएम राहत कोष से मदद मिली नहीं थी, इसलिए इस मामले में आरोप नहीं बनता।
64 आवेदन निकले थे फर्जी, सीएम दफ्तर को सूचित कर रोकी थी आर्थिक मदद
जिला प्रशासन के सूत्रों की मानें इस गोरखधंधे का खुलासा उस समय हुआ जब फतेहाबाद के गांव थेड़ी के रहने वाले रामदयाल ने जिला उपायुक्त डा. हरदीप सिंह को शिकायत देकर कहा कि नरेंद्र नामक व्यक्ति ने उससे धोखाधड़ी करके उसके मेडिकल आवेदन के कागज तैयार कर दिए हैं और उससे एक हजार भी ऐंठ लिए हैं। इसके बाद उपायुक्त ने एसडीएम की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में एसडीएम सतबीर जांगू के अलावा जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज व सीएमओ डा. मनीष बंसल को शामिल किया गया। इन लोगों ने अपनी जांच में मेडिकल राहत आवेदन फार्म नकली पाया। इस बीच जांच टीम को कई और आवेदन ऐसे मिले जो फर्जी थे। जांच टीम ने जब अपनी जांच का दायरा बनाया तो कुल 64 आवेदनों में फर्जी दस्तावेज लगे मिले। इसके बाद जांच टीम ने पूरे तथ्यों के साथ 64 फर्जी आवेदकों की सूची के साथ अपनी जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीसी डा. हरदीप सिंह को सौंप दी।
ये थे फर्जी आवेदकों के नाम
एसडीएम की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने जिन 64 आवेदकों के आवेदन फर्जी पाए थे, उनमें राखी, अर्जुन, सुनहरी, प्रीतम कुमार, मुंशीराम, जिया राम, कृष्णा देवी, पाशो बाई, वीना रानी, कालीदास, जसविंद्र, दीवान चंद, मेजर, पूजा देवी, शीलो बाई, मुस्कान, जगदीश, गीता, कैलाशो बाई, किरण, अमरजीत, रमेश, सावित्री, श्रवण, श्याम लाल, शिमला, उषा रानी, निर्मल, मुंशीराम, साहबराज, गुरदेव सिंह, चेतूराम, रघुनाथ, फूलवती, कृष्णा देवी, अरूण, राजकुमार, बंतो देवी, चुन्नी बाई, महेंद्र, शकुंतला, रमेश कुमार, अंग्रेज कौर, कौशल्या, मायादेवी, साधुराम, लख्मीचंद, भरीबाई, प्रीतम सिंह, किरण, परमेश्वरी, रणजीत कुमार, राजपाल, आशाराम, अर्जुन दास, रामकुमार, वेद कुमारी, हरदयाल सिंह, बीना देवी, विक्रम, रोशनी, मंजू, सोनू एवं सीमा शामिल थे।
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पुलिस का तर्क, फर्जी आवेदकों ने फिलहाल नहीं लिए पैसे तो नहीं बनता आरोप
डीसी की चिट्टी के बावजूद पुलिस विभाग ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज की मानें तो उस समय पुलिस का तर्क था कि आरोपियों ने सीएम राहत कोष से फिलहाल पैसा नहीं लिया है, इसलिए इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं बनती। इतना ही नहीं, पुलिस ने ढिलाई बरतते हुए इन फर्जी आवेदकों से पूछताछ तक नहीं की। अगर ऐसा कर दिया गया होता तो निश्चित तौर पर इस मामले के मास्टरमाइंड नरेंद्र को पहले ही काबू किया जा सकता था।
वर्जन
एक शिकायत मिलने के बाद डीसी साहब ने एसडीएम और सिविल सर्जन के साथ मुझे एक कमेटी में रखकर जांच करवाई थी। जांच में 64 फर्जी आवेदकों का खुलासा हुआ था। हमने रिपोर्ट सौंपी तो डीसी हरदीप सिंह ने इस बारे में पुलिस को पत्र लिखा लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद।
ये मामला फिलहाल मेरे ध्यान में नहीं है। वीरवार को कार्यालय से जानकारी लेने के बाद ही इस बारे में कुछ कह सकूंगा।
- दीपक सहारण, जिला पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।
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फतेहाबाद। कैथल में पकड़े गए मुख्यमंत्री राहत कोष से फर्जी मेडिकल आवेदनों की मदद से सहायता राशि लेने की तर्ज पर फतेहाबाद में भी ऐसे मामले सामने आए थे लेकिन डीसी की चिट्टी के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके चलते इन मामलों का मास्टरमाइंड पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। अगर पुलिस ने समय रहते हुए इन मामलों को ट्रेस कर मास्टरमाइंड को काबू कर लिया होता तो गिरोह पहले ही पुलिस की गिरफ्त में होता। जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज ने इसकी पुष्टि की है। भारद्वाज की मानें तो पुलिस का तर्क था कि चूंकि आरोपियों को सीएम राहत कोष से मदद मिली नहीं थी, इसलिए इस मामले में आरोप नहीं बनता।
64 आवेदन निकले थे फर्जी, सीएम दफ्तर को सूचित कर रोकी थी आर्थिक मदद
जिला प्रशासन के सूत्रों की मानें इस गोरखधंधे का खुलासा उस समय हुआ जब फतेहाबाद के गांव थेड़ी के रहने वाले रामदयाल ने जिला उपायुक्त डा. हरदीप सिंह को शिकायत देकर कहा कि नरेंद्र नामक व्यक्ति ने उससे धोखाधड़ी करके उसके मेडिकल आवेदन के कागज तैयार कर दिए हैं और उससे एक हजार भी ऐंठ लिए हैं। इसके बाद उपायुक्त ने एसडीएम की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में एसडीएम सतबीर जांगू के अलावा जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज व सीएमओ डा. मनीष बंसल को शामिल किया गया। इन लोगों ने अपनी जांच में मेडिकल राहत आवेदन फार्म नकली पाया। इस बीच जांच टीम को कई और आवेदन ऐसे मिले जो फर्जी थे। जांच टीम ने जब अपनी जांच का दायरा बनाया तो कुल 64 आवेदनों में फर्जी दस्तावेज लगे मिले। इसके बाद जांच टीम ने पूरे तथ्यों के साथ 64 फर्जी आवेदकों की सूची के साथ अपनी जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीसी डा. हरदीप सिंह को सौंप दी।
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ये थे फर्जी आवेदकों के नाम
एसडीएम की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने जिन 64 आवेदकों के आवेदन फर्जी पाए थे, उनमें राखी, अर्जुन, सुनहरी, प्रीतम कुमार, मुंशीराम, जिया राम, कृष्णा देवी, पाशो बाई, वीना रानी, कालीदास, जसविंद्र, दीवान चंद, मेजर, पूजा देवी, शीलो बाई, मुस्कान, जगदीश, गीता, कैलाशो बाई, किरण, अमरजीत, रमेश, सावित्री, श्रवण, श्याम लाल, शिमला, उषा रानी, निर्मल, मुंशीराम, साहबराज, गुरदेव सिंह, चेतूराम, रघुनाथ, फूलवती, कृष्णा देवी, अरूण, राजकुमार, बंतो देवी, चुन्नी बाई, महेंद्र, शकुंतला, रमेश कुमार, अंग्रेज कौर, कौशल्या, मायादेवी, साधुराम, लख्मीचंद, भरीबाई, प्रीतम सिंह, किरण, परमेश्वरी, रणजीत कुमार, राजपाल, आशाराम, अर्जुन दास, रामकुमार, वेद कुमारी, हरदयाल सिंह, बीना देवी, विक्रम, रोशनी, मंजू, सोनू एवं सीमा शामिल थे।
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पुलिस का तर्क, फर्जी आवेदकों ने फिलहाल नहीं लिए पैसे तो नहीं बनता आरोप
डीसी की चिट्टी के बावजूद पुलिस विभाग ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज की मानें तो उस समय पुलिस का तर्क था कि आरोपियों ने सीएम राहत कोष से फिलहाल पैसा नहीं लिया है, इसलिए इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं बनती। इतना ही नहीं, पुलिस ने ढिलाई बरतते हुए इन फर्जी आवेदकों से पूछताछ तक नहीं की। अगर ऐसा कर दिया गया होता तो निश्चित तौर पर इस मामले के मास्टरमाइंड नरेंद्र को पहले ही काबू किया जा सकता था।
वर्जन
एक शिकायत मिलने के बाद डीसी साहब ने एसडीएम और सिविल सर्जन के साथ मुझे एक कमेटी में रखकर जांच करवाई थी। जांच में 64 फर्जी आवेदकों का खुलासा हुआ था। हमने रिपोर्ट सौंपी तो डीसी हरदीप सिंह ने इस बारे में पुलिस को पत्र लिखा लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी, फतेहाबाद।
ये मामला फिलहाल मेरे ध्यान में नहीं है। वीरवार को कार्यालय से जानकारी लेने के बाद ही इस बारे में कुछ कह सकूंगा।
- दीपक सहारण, जिला पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।