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नि परमिशन सलीब पर चढ़े संत गोपालदास, प्रशासन की फूली सांसें, एसएचओ हटवाते रहे बिजली की तारें
Updated Thu, 27 Jul 2017 12:31 AM IST
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- ढिंगसरा गोचरण भूमि विवाद पर ईसा मसीह की तरह सूली पर चढ़े संत गोपालदास, जान खतरे में डालकर समर्थकों ने शहरभर में निकाला जलूस
-चुपचाप साथ चलते रहे पुलिस अधिकारी, एक बार भी नहीं किया खतरनाक स्टंट रोकने का प्रयास
-चलने के लायक नहीं थे संत गोपाल दास, गाड़ी से उठाकर लाए गए थे धरनास्थल पर
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बिना परमिशन सलीब पर चढ़े संत गोपालदास, प्रशासन की फूली सांसें, एसएचओ हटवाते रहे बिजली की तारें
- जलूस खत्म होने से पहले पहुंचे एसडीएम ने लिया ज्ञापन, चलने की हालत में भी नहीं थे संत, फिर भी सलीब पर लटके
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। ढिंगसरा गोचर भूमि के विवाद को लेकर संत गोपालदास द्वारा अपनाया गया विरोध का तरीका जितना अनोखा था, उतना ही खतरनाक भी। लेकिन ना तो उनके समर्थकों और ना ही पुलिस अधिकारियों ने इस संदर्भ में कोई कदम उठाए। तकरीबन पांच किलोमीटर से अधिक लंबे जलूस में कई बार ऐसा हुआ कि लगभग दस फुट तक ऊंचे सलीब पर टंगे संत गोपालदास बिजली की तारों की चपेट में आते-आते बचे। बार-बार उनके समर्थक लाठियों के सहारे बिजली की तारों को साइड में किया ताकि संत गोपालदास को सुरक्षित वहां से गुजारा जा सके। इसके चलते सारा समय पुलिस और जिला प्रशासन की सांसें फूली रही। इसी वजह से एसडीएम सतबीर जांगू प्रदर्शन खत्म होने से पहले ही जवाहर चौक पहुंच गए और ज्ञापन पहले लेकर प्रदर्शन खत्म करवाया।
सलीब छोड़िए, प्रदर्शन तक का नहीं दिया नोटिस, बिना अनुमति हुआ प्रदर्शन
शहर वासियों के लिए ये अपनी तरह का एक अनोखा ही प्रदर्शन था जिसमें संत गोपालदास दस फुट से ऊंचे सलीब पर टंगे हुए थे। लेकिन इस सारे प्रदर्शन और इस सलीब पर टंगने के लिए जिला प्रशासन से किसी प्रकार की कोई परमिशन तक नहीं ली गई थी। खुद सिटी एसएचओ सोमवीर ढाका ने इसकी पुष्टि की है। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने इस प्रदर्शन का कोई रूट तक पुलिस प्रशासन को पहले नहीं बताया जिसके चलते सारी पुलिस फोर्स को जलूस के साथ साथ चलना पड़ा। हालांकि ये प्रदर्शन पूरी तरह से गैरकानूनी था, लेकिन चूंकि मामला काफी संवेदनशील था और ग्रामीणों को प्रदर्शन करने से मामला बिगड़ सकता था, इसलिए सिटी एसएचओ ने प्रदर्शन को रोका नहीं लेकिन वो सुरक्षा के मद्देनजर संत गोपालदास के साथ साथ ही चलते रहे। कई जगह तो बिजली की तारों को उन्होंने ही हटवाया।
चलने की हालत में नहीं थे संत गोपालदास, दो घंटे तक दस फुट ऊंचा लटके
संत गोपाल दास बुधवार दोपहर को जिस समय लाल बत्ती चौक स्थित अम्बेडकर पार्क में धरना दे रहे ढिंगसरा के ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उस समय उनकी हालत इतनी खराब थी कि गाड़ी से लेकर उनको धरनास्थल तक गोद में उठाकर ले जाया गया। पत्रकारों से भी बात इसलिए नहीं की लगातार अनशन के चलते वो बोलने की स्थिति में नहीं थे। लेकिन प्रदर्शन के दौरान उनके समर्थकों ने उन्हें दस फुट ऊंचे सलीब पर टांग दिया जिसमें निश्चित तौर पर काफी शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है। लाल बत्ती चौक से शुरूहुआ ये जलूस जवाहर चौक दो घंटे के बाद जाकर खत्म हुआ। तब तक संत गोपालदास सलीब पर ही लटके रहे।
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26एफटीबीपी22 : फव्वारा चौक में प्रदर्शन के दौरान दस फुट ऊंचे सलीब पर लटके हुए संत गोपालदास।
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-चुपचाप साथ चलते रहे पुलिस अधिकारी, एक बार भी नहीं किया खतरनाक स्टंट रोकने का प्रयास
-चलने के लायक नहीं थे संत गोपाल दास, गाड़ी से उठाकर लाए गए थे धरनास्थल पर
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बिना परमिशन सलीब पर चढ़े संत गोपालदास, प्रशासन की फूली सांसें, एसएचओ हटवाते रहे बिजली की तारें
- जलूस खत्म होने से पहले पहुंचे एसडीएम ने लिया ज्ञापन, चलने की हालत में भी नहीं थे संत, फिर भी सलीब पर लटके
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। ढिंगसरा गोचर भूमि के विवाद को लेकर संत गोपालदास द्वारा अपनाया गया विरोध का तरीका जितना अनोखा था, उतना ही खतरनाक भी। लेकिन ना तो उनके समर्थकों और ना ही पुलिस अधिकारियों ने इस संदर्भ में कोई कदम उठाए। तकरीबन पांच किलोमीटर से अधिक लंबे जलूस में कई बार ऐसा हुआ कि लगभग दस फुट तक ऊंचे सलीब पर टंगे संत गोपालदास बिजली की तारों की चपेट में आते-आते बचे। बार-बार उनके समर्थक लाठियों के सहारे बिजली की तारों को साइड में किया ताकि संत गोपालदास को सुरक्षित वहां से गुजारा जा सके। इसके चलते सारा समय पुलिस और जिला प्रशासन की सांसें फूली रही। इसी वजह से एसडीएम सतबीर जांगू प्रदर्शन खत्म होने से पहले ही जवाहर चौक पहुंच गए और ज्ञापन पहले लेकर प्रदर्शन खत्म करवाया।
सलीब छोड़िए, प्रदर्शन तक का नहीं दिया नोटिस, बिना अनुमति हुआ प्रदर्शन
शहर वासियों के लिए ये अपनी तरह का एक अनोखा ही प्रदर्शन था जिसमें संत गोपालदास दस फुट से ऊंचे सलीब पर टंगे हुए थे। लेकिन इस सारे प्रदर्शन और इस सलीब पर टंगने के लिए जिला प्रशासन से किसी प्रकार की कोई परमिशन तक नहीं ली गई थी। खुद सिटी एसएचओ सोमवीर ढाका ने इसकी पुष्टि की है। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने इस प्रदर्शन का कोई रूट तक पुलिस प्रशासन को पहले नहीं बताया जिसके चलते सारी पुलिस फोर्स को जलूस के साथ साथ चलना पड़ा। हालांकि ये प्रदर्शन पूरी तरह से गैरकानूनी था, लेकिन चूंकि मामला काफी संवेदनशील था और ग्रामीणों को प्रदर्शन करने से मामला बिगड़ सकता था, इसलिए सिटी एसएचओ ने प्रदर्शन को रोका नहीं लेकिन वो सुरक्षा के मद्देनजर संत गोपालदास के साथ साथ ही चलते रहे। कई जगह तो बिजली की तारों को उन्होंने ही हटवाया।
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चलने की हालत में नहीं थे संत गोपालदास, दो घंटे तक दस फुट ऊंचा लटके
संत गोपाल दास बुधवार दोपहर को जिस समय लाल बत्ती चौक स्थित अम्बेडकर पार्क में धरना दे रहे ढिंगसरा के ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उस समय उनकी हालत इतनी खराब थी कि गाड़ी से लेकर उनको धरनास्थल तक गोद में उठाकर ले जाया गया। पत्रकारों से भी बात इसलिए नहीं की लगातार अनशन के चलते वो बोलने की स्थिति में नहीं थे। लेकिन प्रदर्शन के दौरान उनके समर्थकों ने उन्हें दस फुट ऊंचे सलीब पर टांग दिया जिसमें निश्चित तौर पर काफी शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है। लाल बत्ती चौक से शुरूहुआ ये जलूस जवाहर चौक दो घंटे के बाद जाकर खत्म हुआ। तब तक संत गोपालदास सलीब पर ही लटके रहे।
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26एफटीबीपी22 : फव्वारा चौक में प्रदर्शन के दौरान दस फुट ऊंचे सलीब पर लटके हुए संत गोपालदास।