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दस मिनट के भीतर जिंदा हो सकता है आदमी
अमर उजाला फरीदाबाद
Updated Tue, 15 Oct 2013 10:23 PM IST
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हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल ने दावा किया है कि हार्ट अटैक से मरने वाले व्यक्ति को दस मिनट के अंदर जिंदा किया जा सकता है। मौत के बाद मृतक व्यक्ति की छाती 100 बार प्रति मिनट की दर से दबाएं। दबाव डेढ़ इंच तक होना चाहिए।
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डॉ. अग्रवाल यहां मारवाड़ी युवा मंच की ओर से नीलम बाटा रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। वह यहां 23 से 27 अक्तूबर तक दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित होने वाले परफेक्ट हेल्थ मेले के बारे में जानकारी देने आए थे।
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उन्होंने कहा कि 80 साल से अधिक समय तक जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के बिना जिंदा रहने के लिए ‘80 का फंडा’ अपनाएं।
कमर की चौड़ाई, लो ब्लड प्रेशर, एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रोल), पल्स दर और फास्टिंग शुगर सभी को 80 से कम रखें। रोजाना 80 मिनट तक 80 कदम प्रति मिनट की गति से टहलें। उन्होंने कहा कि विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए 80 दिन धूप में बैठें। हृदय रोगों एवं शुगर से बचने के लिए साल में 80 दिन अनाज न खाएं। उन्होंने कहा कि यह भ्रम है कि काजू और बादाम में ज्यादा कोलेस्ट्रॉल होता है। दरअसल इन दोनों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा शून्य होती है।
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फास्ट फूड लाभदायक है पर प्राकृतिक
- डॉ. अग्रवाल ने कहा कि फास्ट फूड खाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, लेकिन यह प्राकृतिक होना चाहिए। फास्ट फूड संतरा, केला और सेब हैं न कि बर्गर। बर्गर बनावटी फास्ट फूड है। आलू का इस्तेमाल कम करना चाहिए। इस मौके पर मंच से जुड़े पवन गुप्ता, कमल अग्रवाल, संजीव एवं विमल खंडेलवाल सहित कई लोग मौजूद थे।
प्लेटलेट्स कम होने से नहीं पीसीबी बढ़ने से मरता है मरीज
- डॉ. अग्रवाल ने कहा कि प्लेटलेट्स के नाम पर खौफ बढ़ाया जा रहा है, जो ठीक नहीं। ज्यादा ब्लीडिंग होने पर ही प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। प्लेटलेट्स पांच हजार पर भी मरीज जिंदा रहता है। मरीज ब्लड में पीसीबी (पैक सेल वैल्यू) बढ़ने से मरता है। यह लिक्विड लेने से कम होता है।