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63 साल पहले दिए थे एक हजार रुपये

Sun, 06 Oct 2013 07:07 PM IST
राहुल श्याम
राहुल श्याम Updated Sun, 06 Oct 2013 07:07 PM IST
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63 years ago given 1000 rs

प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने न सिर्फ पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को शेख फरीद के इस शहर में बसाया बल्कि उनके विकास और सांस्कृतिक पुनर्वास में भी अपना योगदान दिया था।

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पाकिस्तान से विभाजन का दंश झेलकर यहां पहुंचे हिंदुओं को पंडित जवाहरलाल नेहरू और बादशाह खान द्वारा बसाने के बाद डॉ. प्रसाद फरीदाबाद विकास बोर्ड के पहले अध्यक्ष बने।
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वहां से आए हिंदुओं में से कुछ लोगों ने जब राजेंद्र बाबू से रामलीला करने की बात बताई तो वह सहयोग के लिए तैयार हो गए। उन्होंने सहयोग के रूप में एक हजार रुपये और ढेर सारा हौसला दिया।
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विजय रामलीला कमेटी के चेयरमैन विश्वबंधु शर्मा ने ‘अमर उजाला’ से यह बात साझा की। शर्मा कहते हैं कि उस वक्त यह रकम बहुत बड़ी थी और उससे भी बड़ी बात राजेंद्र बाबू जैसे राष्ट्रपति द्वारा सहयोग करने की थी। उसी से रामलीला का शुभारंभ हुआ और सिलसिला अब तक जारी है।

वो बताते हैं कि संस्कृति को जिंदा रखने में राजेंद्र बाबू ने 63 साल पहले पूरा साथ दिया। चूंकि वह फरीदाबाद विकास बोर्ड के अध्यक्ष थे उनसे मिलना आसान था।

राजकीय प्रेस कर्मियों ने शुरू कराई थी लीला
शिव मंदिर रामलीला कमेटी द्वारा प्रेस कॉलोनी में 1972 में रामलीला शुरू कराई गई थी। इसकी शुरुआत उस समय राजकीय प्रेस में काम करने वाले शिवचरण लाल शर्मा, स्व. शिवपाल और मनमोहन ने करवाई थी। किन्हीं कारणों से 2007 से 10 तक यहां पर लीला नहीं हुई। इसी दौरान इसे शुरू करवाने वाले शिवचरण लाल शर्मा मंत्री बन गए और उनके सहयोग से रामलीला फिर शुरू हो गई।


पलवल वालों ने कराई शुरुआत
सेक्टर-15 की श्रद्धा रामलीला कमेटी की शुरुआत 2008 में हुई। यहां पलवल के कलाकारों ने शुरुआत कराई। पलवल के जवाहर नगर कैंप में लगभग दो दशक से रामलीला कर रहे कुछ परिवार कारोबार और जॉब के सिलसिले में यहां शिफ्ट हुए] जिनमें कुलभूषण बाली, राजकुमार ढींगड़ा, नरेंद्र छाबड़ा और अनिल चावला प्रमुख हैं।

इन लोगों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर रामलीला का मंचन करने की इच्छा जताई। फिर भला रामजी की लीला के लिए कौन मना करता। यूं ही कारवां बढ़ता गया।

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