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तीन आंख वाले नारियल भगवान शिव के प्रतीक : चंद्रप्रकाश ठाकुर
Wed, 24 Jul 2024 05:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 24 Jul 2024 05:51 AM IST
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चरखी दादरी में शिव महापुराण कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु और कथावाचक चंद्रप्रकाश ठाकुर।
चरखी दादरी। ऐतिहासिक बड़ा शिव मंदिर में शिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में मंगलवार को शिव महापुराण कथा आयोजित की गई। वृंदावन धाम से पधारे पंडित चंद्रप्रकाश ठाकुर ने कथा सुनाई। उन्होंने श्रीकलश की महिमा बताई। चंद्रप्रकाश ने कहा कि कलश हिंदू धर्म में शुभ प्रतीक है। यह तांबे का बर्तन है जिसका आधार बड़ा और मुंह छोटा होता है। इसे आम तौर पर पूर्ण कलश, पूर्ण कुंभ और पूर्ण घट के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि ऋग्वेद के अनुसार पूर्ण कलश प्रचुरता और जीवन स्रोत का प्रतिनिधित्व करता है। भक्त पूजा के दौरान कलश में पवित्र जल भरते हैं और उसके ऊपर नारियल रखते हैं। नारियल का सिर आकाश की ओर होता है और वे आम के पत्ते, कभी-कभी पान की बेल को पानी में डुबोकर रखते हैं। कुछ लोग बर्तन को सिक्कों, रत्नों, सोने या अनाज से भी भर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि अमृत खोजने के लिए असुरों और देवताओं ने समुद्र मंथन किया और इस प्रक्रिया के अंत में उन्हें एक कलश मिला। इस प्रकार कलश अमरता का प्रतीक बन गया क्योंकि इसमें अमृत था। कलश से जुड़ी एक और कहानी यह है कि ब्रह्मांड के निर्माण से पहले भगवान विष्णु दूधिया सागर में अपने शेषनाग-शैय्या पर रहे।
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उनकी नाभि से एक कमल निकला जो भगवान ब्रह्मा में बदल गया, जिन्होंने फिर दुनिया का निर्माण किया। पुराणों के हिसाब से मान्यता है कि कलश में पानी उस आदिम जल के समान है जिससे निर्माता ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया। इस मौके पर शिव मंदिर के प्रधान रमेश फौगाट और कार्यकारिणी के सदस्यों ने प्रसाद भी बांटा।
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उन्होंने कहा कि ऋग्वेद के अनुसार पूर्ण कलश प्रचुरता और जीवन स्रोत का प्रतिनिधित्व करता है। भक्त पूजा के दौरान कलश में पवित्र जल भरते हैं और उसके ऊपर नारियल रखते हैं। नारियल का सिर आकाश की ओर होता है और वे आम के पत्ते, कभी-कभी पान की बेल को पानी में डुबोकर रखते हैं। कुछ लोग बर्तन को सिक्कों, रत्नों, सोने या अनाज से भी भर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि अमृत खोजने के लिए असुरों और देवताओं ने समुद्र मंथन किया और इस प्रक्रिया के अंत में उन्हें एक कलश मिला। इस प्रकार कलश अमरता का प्रतीक बन गया क्योंकि इसमें अमृत था। कलश से जुड़ी एक और कहानी यह है कि ब्रह्मांड के निर्माण से पहले भगवान विष्णु दूधिया सागर में अपने शेषनाग-शैय्या पर रहे।
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उनकी नाभि से एक कमल निकला जो भगवान ब्रह्मा में बदल गया, जिन्होंने फिर दुनिया का निर्माण किया। पुराणों के हिसाब से मान्यता है कि कलश में पानी उस आदिम जल के समान है जिससे निर्माता ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया। इस मौके पर शिव मंदिर के प्रधान रमेश फौगाट और कार्यकारिणी के सदस्यों ने प्रसाद भी बांटा।