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विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज व बुजुर्ग खाट छोड़कर खाद के लिए कतार में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Oct 2021 12:12 AM IST
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Students leaving school-college and elderly bunk in queue for fertilizer
सदर थाने में लगाए गए डेस्क पर टोकन कटवाता स्कूली विद्यार्थी। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। खाद किल्लत के चलते बिजाई कार्य ही प्रभावित नहीं हो रहा, बल्कि किसानों और उनके परिजनों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। आलम यह है कि विद्यार्थी स्कूल व कॉलेज छोड़कर तो बुजुर्ग खाट छोड़कर अलसुबह कतार में लग रहे हैं। पहले घंटों तक थाने के बाहर बैठकर टोकन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है तो फिर करीब चार किलोमीटर दूर स्थित नई अनाज मंडी पहुंचकर खाद पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। खाद के दो बैग लेने में किसानों और उनके परिजनों का पूरा दिन बीत जाता है।
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सोमवार को सदर थाने पहुंचे 80 वर्षीय दयानंद ने बताया कि इस उम्र में खाट छोड़कर लाइन में लगने से जो परेशानी हो रही है उसे बयां नहीं कर सकता। उनका कहना है कि घंटों तक कतार में खड़ा रहने में सक्षम नहीं हूं, इसलिए बीच-बीच में आगे और पीछे वालों से निवदेन कर कुछ समय के लिए सड़क पर ही बैठ रहा हूं।
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इस तरह की परेशानी अकेले दयानंद की नहीं है, बल्कि अनेक ऐसे बुजुर्ग हैं जो खाद पाने के लिए कतार में खड़े हैं। माया कौर का कहना है कि 78 की उम्र में दूधवा से दादरी आना और खाद लेकर जाना उसके लिए आसान नहीं है, लेकिन इसके अलावा दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है। इसी प्रकार खाद से पहले टोकन लेने के लिए लाइन में लगे स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें छुट्टी करके खाद के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है और वे पिछले चार से पांच घंटे से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण टोकन का नंबर नहीं आया है। हालांकि कृषि विभाग और जिला प्रशासन का तर्क है कि जिले में खाद किल्लत का जल्द समाधान हो जाएगा और अब स्थिति पहले के मुकाबले काफी सुधर गई है।
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छात्राएं बोलीं : खाद के लिए कॉलेज की छुट्टी कर लगे हैं कतार में
- मैं बीएसई फाइनल वर्ष की छात्रा हूं। पुरुषों की लाइन काफी लगी होती है, जबकि महिलाओं की लाइन उससे छोटी है और इसके चलते मैं दादरी आई हूं। इसके लिए आज कॉलेज से छुट्टी करनी पड़ी।
दीपिका, ढाणी फौगाट
-सुबह साढ़े पांच बजे मैं मां के साथ दादरी आई थी। आज कॉलेज से छुट्टी करनी पड़ी और मैं बीए फाइनल वर्ष में पढ़ती हूं। पिछले चार घंटे से लाइन में लगी हूं लेकिन टोकन के लिए नंबर नहीं आया है।
पूजा, ढाणी फौगाट
बुजुर्ग बोले: घंटों इंतजार करने में फूल रहीं सांसें, लड़खड़ा रहे कदम
- मेरी उम्र करीब 68 वर्ष है और मैं घंटों तक लाइन में खड़ा रहने में समर्थ नहीं हूं। सुबह छह बजे थाने के बाहर पहुंचा था और साढ़े तीन घंटे बीतने के बाद भी टोकन लेने का अभी नंबर नहीं आया है।
रामानंद, बरसाना
- मेरी उम्र 65 साल है और मैं करीब 20 किलोमीटर दूर मोरवाला से दादरी आया हूं। चार घंटे से कतार में लगा हूं और नंबर आएगा या नहीं, ये भी नहीं पता है। इस उम्र में घंटों लाइन में खड़ा रहने में सांसे फूल रही हैं जबकि कदम भी लड़खड़ा रहे हैं।
जोगेंद्र, मोरवाला
स्कूल छोड़कर आठ किलोमीटर दूर खाद लेने पहुंचे विद्यार्थी
- मैं नौवीं कक्षा में पढ़ता हूं और खाद लेने के लिए सुबह सात बजे से लाइन में लगा हूं। मेरे गांव से दादरी की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। सदर थाने से टोकन लेकर मैं परिजनों के साथ खाद लेने नई अनाज मंडी जाऊंगा।

अंकित, महराणा
- मैं अपने परिजन के साथ खाद लेने दादरी आया हूं। मैं पांचवी कक्षा में पढ़ता हूं और आज स्कूल से छुट्टी करके यहां आया हूं। पिता के थकने के बाद मैं लाइन में खड़ा हो जाता हूं, इससे पिता को आराम मिल जाता है जबकि अन्य लोग भी ऐतराज नहीं करते।
धीरज, महाराणा
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