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लिंगानुपात : 68 गांवों में एक हजार पार बेटियां तो 17 में लड़खड़ाई स्थिति
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लोहारु रोड से गुजरतीं नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं। (फाइल फोटो)
- फोटो : CharkhiDadri
हनी सोनी
चरखी दादरी। जिले में 2020 के मुकाबले 2021 में लिंगानुपात की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जिले के 68 गांवों ने अन्य गांवों के लिए भी नजीर पेश की हैं। ये वो गांव हैं जिनमें पिछले 11 माह में लिंगानुपात का आंकड़ा एक हजार से पार चल रहा है। कुछ गांव तो ऐसे हैं, जहां गत 11 माह में बेटों के मुकाबले तीन गुना अधिक बेटियां पैदा हुई हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से नवंबर 2021 तक मोरवाला का लिंगानुपात 3250 है। वहीं, जिले के 17 गांव और ढाणियां ऐसी हैं जहां लिंगानुपात 500 से नीचे है और ये स्थिति चिंताजनक है। विभाग और प्रशासन को इन गांवों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं, जिले की दो ढाणियां ऐसी हैं, जहां पिछले 11 माह में एक भी बेटी पैदा नहीं हुई है। जिले में जनवरी से नवंबर तक 2021 तक लिंगानुपात 905 है। विश्व बालिका दिवस पर पेश है विशेष रिपोर्ट...
11 माह में जन्मे 7082 बच्चे, लड़कों की संख्या ज्यादा
जिले में जनवरी से नवंबर 2021 तक 11 माह में 7082 बच्चे पैदा हुए हैं। इनमें लड़कों की संख्या 3666 और लड़कियों की संख्या 3316 है। जिले के 103 गांव ऐसे हैं जहां इस समयावधि में 10 से अधिक बेटियां जन्मी हैं। झोझूकलां में गत वर्ष सर्वाधिक 49 बेटियां जन्मी हैं और 43 बेटियों के जन्म के साथ चरखी दूसरे नंबर है।
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3000 से अधिक लिंगानुपात के साथ मिशाल बने ये गांव
जिले के गांव मोरवाला में जनवरी से नवंबर 2021 तक लिंगानुपात 3250 रहा। इस समयावधि में यहां आठ लड़के और 26 लड़कियां पैदा हुई। डुडीवाला नंदकरण का लिंगानुपात भी इस समयावधि में 3000 है और यहां तीन लड़कों पर 9 लड़कियां पैदा हुईं। भारीवास का लिंगानुपात भी 3000 है और यहां एक लड़के पर तीन लड़कियां पैदा हुईं। सूरजा ढाणी का लिंगानुपात भी 3000 है और पिछले 11 माह में यहां एक भी लड़का पैदा नहीं हुआ जबकि तीन बेटियों ने जन्म लिया। कपूरी में भी लिंगानुपात 300 रहा और यहां एक लड़के पर तीन लड़कियां पैदा हुईं।
इन गांवों में 500 से भी कम है लिंगानुपात
बिंद्रावन में लिंगानुपात 500 है। इसी प्रकार मांढी हरिया में 438, मांढी केहर में 444, ढाणी अहीर में 500, डालावास में 333, माई खुर्द में 214, गंढास ढाणी में 500, कुब्जानगर में 364, ढाणी खूबी और हड़ौदा खुर्द में 0, खोरडा में 421, डोहका हरिया में 440, पंचगांव में 333, नौसवा में 286, साहुवास में 368, गोकल में 400 और खातीवास में 500 है।
विभाग ने ये किए प्रयास
- जहां लिंगानुपात कम था और वहां जागरूकता अभियान चलाया।
- बेटियों को आंगनबाड़ी केंद्र पर सामूहिक जन्मदिन मनाया गया।
- कोरोना काल में भी कन्या जन्म पर जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य केंद्र पर सम्मानित किया।
नजीर : कमोद में बेटियों के नाम से लगी हैं घर के बाहर नेम प्लेट
बेटियों को बचाने के मामले में कमोद की ओर से चार साल पहले पेश की गई नजीर को आज भी सराहा जा रहा है। इस गांव में सामूहिक रूप से घरों के बाहर बेटियों की नेम प्लेट लगाने का निर्णय लेकर इसे धरातल पर लागू भी किया था। जनवरी से नवंबर 2021 तक इस गांव में 11 बेटियां जन्मी हैं जबकि लिंगानुपात 846 रहा है।
2020 के मुकाबले 2021 में जिले में लिंगानुपात की स्थिति काफी सुधरी है। अब जिन गांवों में 1000 से कम लिंगानुपात है, उन पर विभाग का फोकस रहेगा। स्थिति सामान्य होते ही इन गांवों में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जिला प्रशासन के सहयोग से महिला एवं बाल विकास विभाग लिंगानुपात की स्थिति को और बेहतर करने के लिए प्रयासरत है। - गीता सहारण, सीडीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग
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चरखी दादरी। जिले में 2020 के मुकाबले 2021 में लिंगानुपात की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जिले के 68 गांवों ने अन्य गांवों के लिए भी नजीर पेश की हैं। ये वो गांव हैं जिनमें पिछले 11 माह में लिंगानुपात का आंकड़ा एक हजार से पार चल रहा है। कुछ गांव तो ऐसे हैं, जहां गत 11 माह में बेटों के मुकाबले तीन गुना अधिक बेटियां पैदा हुई हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से नवंबर 2021 तक मोरवाला का लिंगानुपात 3250 है। वहीं, जिले के 17 गांव और ढाणियां ऐसी हैं जहां लिंगानुपात 500 से नीचे है और ये स्थिति चिंताजनक है। विभाग और प्रशासन को इन गांवों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं, जिले की दो ढाणियां ऐसी हैं, जहां पिछले 11 माह में एक भी बेटी पैदा नहीं हुई है। जिले में जनवरी से नवंबर तक 2021 तक लिंगानुपात 905 है। विश्व बालिका दिवस पर पेश है विशेष रिपोर्ट...
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11 माह में जन्मे 7082 बच्चे, लड़कों की संख्या ज्यादा
जिले में जनवरी से नवंबर 2021 तक 11 माह में 7082 बच्चे पैदा हुए हैं। इनमें लड़कों की संख्या 3666 और लड़कियों की संख्या 3316 है। जिले के 103 गांव ऐसे हैं जहां इस समयावधि में 10 से अधिक बेटियां जन्मी हैं। झोझूकलां में गत वर्ष सर्वाधिक 49 बेटियां जन्मी हैं और 43 बेटियों के जन्म के साथ चरखी दूसरे नंबर है।
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3000 से अधिक लिंगानुपात के साथ मिशाल बने ये गांव
जिले के गांव मोरवाला में जनवरी से नवंबर 2021 तक लिंगानुपात 3250 रहा। इस समयावधि में यहां आठ लड़के और 26 लड़कियां पैदा हुई। डुडीवाला नंदकरण का लिंगानुपात भी इस समयावधि में 3000 है और यहां तीन लड़कों पर 9 लड़कियां पैदा हुईं। भारीवास का लिंगानुपात भी 3000 है और यहां एक लड़के पर तीन लड़कियां पैदा हुईं। सूरजा ढाणी का लिंगानुपात भी 3000 है और पिछले 11 माह में यहां एक भी लड़का पैदा नहीं हुआ जबकि तीन बेटियों ने जन्म लिया। कपूरी में भी लिंगानुपात 300 रहा और यहां एक लड़के पर तीन लड़कियां पैदा हुईं।
इन गांवों में 500 से भी कम है लिंगानुपात
बिंद्रावन में लिंगानुपात 500 है। इसी प्रकार मांढी हरिया में 438, मांढी केहर में 444, ढाणी अहीर में 500, डालावास में 333, माई खुर्द में 214, गंढास ढाणी में 500, कुब्जानगर में 364, ढाणी खूबी और हड़ौदा खुर्द में 0, खोरडा में 421, डोहका हरिया में 440, पंचगांव में 333, नौसवा में 286, साहुवास में 368, गोकल में 400 और खातीवास में 500 है।
विभाग ने ये किए प्रयास
- जहां लिंगानुपात कम था और वहां जागरूकता अभियान चलाया।
- बेटियों को आंगनबाड़ी केंद्र पर सामूहिक जन्मदिन मनाया गया।
- कोरोना काल में भी कन्या जन्म पर जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य केंद्र पर सम्मानित किया।
नजीर : कमोद में बेटियों के नाम से लगी हैं घर के बाहर नेम प्लेट
बेटियों को बचाने के मामले में कमोद की ओर से चार साल पहले पेश की गई नजीर को आज भी सराहा जा रहा है। इस गांव में सामूहिक रूप से घरों के बाहर बेटियों की नेम प्लेट लगाने का निर्णय लेकर इसे धरातल पर लागू भी किया था। जनवरी से नवंबर 2021 तक इस गांव में 11 बेटियां जन्मी हैं जबकि लिंगानुपात 846 रहा है।
2020 के मुकाबले 2021 में जिले में लिंगानुपात की स्थिति काफी सुधरी है। अब जिन गांवों में 1000 से कम लिंगानुपात है, उन पर विभाग का फोकस रहेगा। स्थिति सामान्य होते ही इन गांवों में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जिला प्रशासन के सहयोग से महिला एवं बाल विकास विभाग लिंगानुपात की स्थिति को और बेहतर करने के लिए प्रयासरत है। - गीता सहारण, सीडीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग