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परिवार के लिए बनीं राजमिस्त्री, अब तक 300 आशियाने तैयार कर चुकी हैं कौशल्या
Tue, 20 Oct 2020 01:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चरखी दादरी
अमर उजाला नेटवर्क, चरखी दादरी
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2020 01:19 PM IST
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मकान बनातीं कौशल्या देवी।
- फोटो : अमर उजाला
कहते हैं कि नारी परिवार की धुरी होती है और अगर वह मन में कुछ करने की ठान ले तो फिर कुछ असंभव नहीं है। ऐसे ही कबीर नगर निवासी 46 वर्षीय कौशल्या देवी ने परिस्थितियों के आगे घुटने टेक लेने वालीं महिलाओं के लिए एक बानगी पेश की है। आर्थिक तंगी के कारण मजदूरी शुरू करने वाले कौशल्या देवी अब पेशेवर राजमिस्त्री बन चुकी हैं और अब तक 300 से अधिक आशियाने बना चुकी हैं। कौशल्या देवी का कहना है कि उन्हें खुशी है कि नौकरी न मिल पाने के बावजूद वह अपने परिवार का पालन-पोषण स्वाभिमान से कर रही हैं।
कौशल्या देवी का कहना है कि आठवीं पास करते ही उनकी शादी हो गई थी और उनका परिवार संयुक्त था। पति राजकुमार पेशे से रिक्शा चालक है। शादी के बाद चार बच्चे हो गए। केवल पति की आमदनी से घर चलाना मुश्किल हो गया। इसके बाद कौशल्या ने मजदूरी शुरू की। उन्होंने बताया कि मजदूरी के साथ उसने पढ़ाई भी शुरू की। पहले दसवीं और फिर आंगनबाड़ी का डिप्लोमा किया, लेकिन नौकरी नहीं मिल पाई। उसने पढ़ाई के साथ मजदूरी भी जारी रखी। कौशल्या ने बताया कि चारों बच्चे (दो लड़के और दो लड़की) भी बड़े हो गए और उनकी पढ़ाई के खर्च की चिंता भी सताने लगी। इसके चलते उसने मजदूरी करने के साथ राजमिस्त्री का काम भी शुरू कर दिया।
पहले जिन्होंने मारे ताने, अब वो ही काम के मुरीद
कौशल्या ने बताया कि जिस समय उसने राजमिस्त्री का काम शुरू किया, तो कुछ लोगों ने ताने भी मारे। अपने परिवार और बच्चों के भविष्य की सोचकर उसने तानों को अनसुना किया और अपना काम जारी रखा। कौशल्या ने बताया कि जो लोग ताने मारते थे और आज वही उसके काम के मुरीद हैं। ऐसे कुछ लोगों के मकान का निर्माण भी वो कर चुकी है।
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झुग्गी में गुजारी रातों को नहीं भूल सकती
कौशल्या ने बताया कि शादी के बाद पति के कंधों पर सारी जिम्मेदारी आ गई। पति की आमदनी भी काफी कम हो गई। सर पर छत भी नहीं थी और उन्होंने अपने बच्चों के साथ झुग्गियों में रात गुजारी है। उन रातों को वह कभी नहीं भूल सकती। अब उसका खुद का घर है और हाल ही में प्लॉट भी खरीदा है। छोटे बेटा पढ़ाई कर रहा है, जबकि बड़ा बेटा मंडी में नौकरी कर रहा है। कौशल्या देवी का कहना है कि परिवार की अब आर्थिक हालत भी काफी सुधरी है, जिसकी उसे खुशी भी है।
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कौशल्या देवी का कहना है कि आठवीं पास करते ही उनकी शादी हो गई थी और उनका परिवार संयुक्त था। पति राजकुमार पेशे से रिक्शा चालक है। शादी के बाद चार बच्चे हो गए। केवल पति की आमदनी से घर चलाना मुश्किल हो गया। इसके बाद कौशल्या ने मजदूरी शुरू की। उन्होंने बताया कि मजदूरी के साथ उसने पढ़ाई भी शुरू की। पहले दसवीं और फिर आंगनबाड़ी का डिप्लोमा किया, लेकिन नौकरी नहीं मिल पाई। उसने पढ़ाई के साथ मजदूरी भी जारी रखी। कौशल्या ने बताया कि चारों बच्चे (दो लड़के और दो लड़की) भी बड़े हो गए और उनकी पढ़ाई के खर्च की चिंता भी सताने लगी। इसके चलते उसने मजदूरी करने के साथ राजमिस्त्री का काम भी शुरू कर दिया।
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पहले जिन्होंने मारे ताने, अब वो ही काम के मुरीद
कौशल्या ने बताया कि जिस समय उसने राजमिस्त्री का काम शुरू किया, तो कुछ लोगों ने ताने भी मारे। अपने परिवार और बच्चों के भविष्य की सोचकर उसने तानों को अनसुना किया और अपना काम जारी रखा। कौशल्या ने बताया कि जो लोग ताने मारते थे और आज वही उसके काम के मुरीद हैं। ऐसे कुछ लोगों के मकान का निर्माण भी वो कर चुकी है।
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झुग्गी में गुजारी रातों को नहीं भूल सकती
कौशल्या ने बताया कि शादी के बाद पति के कंधों पर सारी जिम्मेदारी आ गई। पति की आमदनी भी काफी कम हो गई। सर पर छत भी नहीं थी और उन्होंने अपने बच्चों के साथ झुग्गियों में रात गुजारी है। उन रातों को वह कभी नहीं भूल सकती। अब उसका खुद का घर है और हाल ही में प्लॉट भी खरीदा है। छोटे बेटा पढ़ाई कर रहा है, जबकि बड़ा बेटा मंडी में नौकरी कर रहा है। कौशल्या देवी का कहना है कि परिवार की अब आर्थिक हालत भी काफी सुधरी है, जिसकी उसे खुशी भी है।