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गाड़ी मालिकों से ज्यादा वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराते थे कम राशि
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ओवरलोड वाहनों से वसूली मामले में पुलिस की चार्जशीट में कई रोचक मामले दर्ज हैं। दोनों दलालों के अलावा आरटीए सहायक सचिव, क्लर्क और तत्कालीन डीसी के पीए ने माना है कि आरटीए स्टाफ डंपर मालिकों से साठगांठ कर सरकारी राजस्व में कम राशि जमा करता था। कुछ गाड़ी मालिकों ने भी अपने बयान में इस बात को स्वीकार किया है। यही नहीं, पिछले कुछ समय से अधिकारी होटलों और बाड़ों पर भी सेटिंग करने लगे थे।
पुलिस के हत्थे चढ़े दलाल रविंद्र ने खुलासा किया है कि ओवरलोडिंग में चालान करते समय चरखी दादरी के आरटीए के सहायक सचिव मनीष मदान गाड़ी मालिकों से ज्यादा वसूली करता था। जबकि सरकारी खजाने में कम राशि जमा कराई जाती थी। चरखी दादरी आरटीए कार्यालय स्टाफ की ओर से ओवरलोड वाहनों की चालान राशि में कटौती की शिकायतें पहले भी हो चुकी हैं। इस मामले की जांच चल रही है।
बता दें कि चरखी दादरी सिटी थाने में नौ अगस्त 2017 को सीएम फ्लाइंग की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई थी। एफआईआर के अनुसार, सीएम फ्लाइंग ने चरखी दादरी आरटीए कार्यालय की चालान बुक में छेड़छाड़ (चालान राशि को अधिक से कम करना) करने का मामला पकड़ा था। इस संबंध में पूर्व आरटीए गौरव कुमार सहित तत्कालीन आरटीए ओमप्रकाश, सहायक सचिव धर्मेंद्र व लिपिक जसबीर के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सीएम फ्लाइंग को अलग-अलग तारीखों को काटे गए 29 चालान में कटौती मिली थी। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने कुछ माह पहले यह एफआईआर रद्द कर दी है, जबकि कोर्ट से फिलहाल इसे रद्द करने की अनुमति नहीं मिली है।
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मंथली नहीं देने पर बिना चालान खड़ी कराते थे गाड़ी
चार्जशीट में गवाह बनाए गए ट्रांसपोर्टर धर्मेंद्र ने बताया कि ओवरलोडिंग का खेल 2014 से जारी है। उसके पास छह गाड़ियां हैं। इनमें से तीन अन्य जिलों में जाती हैं। प्रत्येक गाड़ी की दस हजार रुपये मंथली आरटीए स्टाफ के पास पहुंचाई जाती है। धर्मेंद्र ने बताया कि वह अपनी गाड़ियों की मंथली बिल्लूू खेड़ी सनवाल को देता था। बिल्लू का बिलावल गांव में होटल है। धर्मेंद्र ने बताया कि आरटीए सचिव द्वारका प्रसाद को भी उसने कई बार मंथली सीधे दी है। धर्मेंद्र ने बताया कि मंथली नहीं देने पर गाड़ी मालिकों पर चालान करने का भय दिखाकर दबाव बनाया जाता था।
होटलों के पीछे बनाए बाड़े की कमाई में भी था आरटीए स्टाफ का हिस्सा
मामले में गवाह बने ट्रांसपोर्टर धर्मेंद्र, सोमबीर व जितेंद्र ने बताया है कि बिलावल गांव में बिल्लू के होटल के पीछे आरटीए स्टाफ ने अवैध बाड़ा बना रखा था। ओवरलोड गाड़ियों को यहां लाकर खड़ा कर दिया जाता था। दलाल बिल्लू डंपर मालिकों से रात के समय चालान राशि से आधे में साठगांठ कर गाड़ी वहां से भेज देता था। एक दिन बाड़े में गाड़ी खड़ी करने का 500 रुपये चार्ज लिया जाता था। बाड़े से होने वाली कमाई में आरटीए स्टाफ का भी हिस्सा था।
सात जिलों में आरटीए सहायक सचिव रह चुका है मनीष मदान
चार्जशीट के अनुसार मनीष मदान ने बताया है कि वह 1993 में स्टेनो टाइपिस्ट परिवहन आयुक्त चंडीगढ़ में भर्ती हुआ था। साल 2005 में बतौर सहायक पदोन्नत हो गया। साल 2007 में गुड़गांव आरटीए सहायक सचिव के रूप में ट्रांसफर हो गया। 2010 में उसकी पोस्टिंग जींद में हो गई। 2013 में कुरुक्षेत्र ऑफिस ट्रांसफर हो गया और फिर फरवरी 2016 में सोनीपत पोस्टिंग हो गई। अगस्त 2016 में झज्जर तबादला हो गया। मार्च 2018 से वह चरखी दादरी में बतौर आरटीए सहायक सचिव काम कर रहा था।
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पुलिस के हत्थे चढ़े दलाल रविंद्र ने खुलासा किया है कि ओवरलोडिंग में चालान करते समय चरखी दादरी के आरटीए के सहायक सचिव मनीष मदान गाड़ी मालिकों से ज्यादा वसूली करता था। जबकि सरकारी खजाने में कम राशि जमा कराई जाती थी। चरखी दादरी आरटीए कार्यालय स्टाफ की ओर से ओवरलोड वाहनों की चालान राशि में कटौती की शिकायतें पहले भी हो चुकी हैं। इस मामले की जांच चल रही है।
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बता दें कि चरखी दादरी सिटी थाने में नौ अगस्त 2017 को सीएम फ्लाइंग की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई थी। एफआईआर के अनुसार, सीएम फ्लाइंग ने चरखी दादरी आरटीए कार्यालय की चालान बुक में छेड़छाड़ (चालान राशि को अधिक से कम करना) करने का मामला पकड़ा था। इस संबंध में पूर्व आरटीए गौरव कुमार सहित तत्कालीन आरटीए ओमप्रकाश, सहायक सचिव धर्मेंद्र व लिपिक जसबीर के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सीएम फ्लाइंग को अलग-अलग तारीखों को काटे गए 29 चालान में कटौती मिली थी। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने कुछ माह पहले यह एफआईआर रद्द कर दी है, जबकि कोर्ट से फिलहाल इसे रद्द करने की अनुमति नहीं मिली है।
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मंथली नहीं देने पर बिना चालान खड़ी कराते थे गाड़ी
चार्जशीट में गवाह बनाए गए ट्रांसपोर्टर धर्मेंद्र ने बताया कि ओवरलोडिंग का खेल 2014 से जारी है। उसके पास छह गाड़ियां हैं। इनमें से तीन अन्य जिलों में जाती हैं। प्रत्येक गाड़ी की दस हजार रुपये मंथली आरटीए स्टाफ के पास पहुंचाई जाती है। धर्मेंद्र ने बताया कि वह अपनी गाड़ियों की मंथली बिल्लूू खेड़ी सनवाल को देता था। बिल्लू का बिलावल गांव में होटल है। धर्मेंद्र ने बताया कि आरटीए सचिव द्वारका प्रसाद को भी उसने कई बार मंथली सीधे दी है। धर्मेंद्र ने बताया कि मंथली नहीं देने पर गाड़ी मालिकों पर चालान करने का भय दिखाकर दबाव बनाया जाता था।
होटलों के पीछे बनाए बाड़े की कमाई में भी था आरटीए स्टाफ का हिस्सा
मामले में गवाह बने ट्रांसपोर्टर धर्मेंद्र, सोमबीर व जितेंद्र ने बताया है कि बिलावल गांव में बिल्लू के होटल के पीछे आरटीए स्टाफ ने अवैध बाड़ा बना रखा था। ओवरलोड गाड़ियों को यहां लाकर खड़ा कर दिया जाता था। दलाल बिल्लू डंपर मालिकों से रात के समय चालान राशि से आधे में साठगांठ कर गाड़ी वहां से भेज देता था। एक दिन बाड़े में गाड़ी खड़ी करने का 500 रुपये चार्ज लिया जाता था। बाड़े से होने वाली कमाई में आरटीए स्टाफ का भी हिस्सा था।
सात जिलों में आरटीए सहायक सचिव रह चुका है मनीष मदान
चार्जशीट के अनुसार मनीष मदान ने बताया है कि वह 1993 में स्टेनो टाइपिस्ट परिवहन आयुक्त चंडीगढ़ में भर्ती हुआ था। साल 2005 में बतौर सहायक पदोन्नत हो गया। साल 2007 में गुड़गांव आरटीए सहायक सचिव के रूप में ट्रांसफर हो गया। 2010 में उसकी पोस्टिंग जींद में हो गई। 2013 में कुरुक्षेत्र ऑफिस ट्रांसफर हो गया और फिर फरवरी 2016 में सोनीपत पोस्टिंग हो गई। अगस्त 2016 में झज्जर तबादला हो गया। मार्च 2018 से वह चरखी दादरी में बतौर आरटीए सहायक सचिव काम कर रहा था।