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सिंचाई विभाग ने बदला शेड्यूल, जिले में और गहराएगा पेयजल संकट
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सूखी पड़ी जिले की मुख्य लोहारु नहर।
- फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। जिले के जलघरों में चार दिन का पानी और है, ऊपर से सिंचाई विभाग ने प्रदेश सरकार के निर्देशों पर पानी सप्लाई का नया शेड्यूल तैयार किया है। इसके लागू होने के बाद अब महीने में 16 दिन नहरों में पानी चलेगा और 24 दिन बंद रहेगी। पानी की अगली बारी की समयावधि 9 दिन बढ़ाई गई, ऐसे में जिले की लगभग साढ़े पांच लाख की आबादी को पीक गर्मी के समय पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पहले के शेड्यूल की अगर बात करें तो 15 दिन बाद नहरी बारी आती थी और 15 दिन ही नहरों में पानी चलता था। नया टाइम टेबल मानसून तक बना रहेगा।
जिले में जमीन का पानी मीठा नहीं होने के चलते पेयजल आपूर्ति पूर्णतया नहरों पर निर्भर है। नहरों के जरिये ही जिले के 58 जलघरों के टैंकों को भरा जाता है। 15 दिन की टर्म में ही जनस्वास्थ्य विभाग शहर में सुचारु रूप से पेयजल आपूर्ति नहीं कर पा रहा था, जबकि अब नहरी टर्म बढ़ाकर 24 दिन कर दी गई है, ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के लिए जिले के लोगों के लिए 16 दिन नहरों में पानी चलने पर 24 दिन का पानी जुटाना आसान काम नहीं होगा। पुराने टाइमटेबल की अगर बात करें तो जलघरों के टैंक भरने के बाद विभाग 10 से 12 दिन ही पेयजल आपूर्ति कर पाता था, जबकि अब नए टाइम टेबल से तो जिलावासियों को अगली टर्म आने तक कम से कम दस दिन तक पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। इस समस्या का समाधान अगली टर्म पर नहरों में पानी आने के बाद ही हो पाएगा।
इस बार 17 तक पहुंचेगा जिले की नहरों में पानी
अब 17 अप्रैल को जिले की नहरों में पानी पहुंचेगा। मेन खुबड़ू हेड से 16 अप्रैल को पानी छोड़ा जाएगा। इस समय जिले को 900 क्यूसेक पानी की जरूरत है तब जाकर पूर्ति संभव है। पानी का भंडारण करने के लिए विभाग के पास टैंकों की कमी बनी हुई है। टैंकों में मुश्किल से दस से बारह दिन का ही पानी स्टोरेज हो सकता है।
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खरीदकर पानी पीने को विवश हैं लोग
गर्मी के मौसम में हर साल जिले में पेयजल संकट गहराता है। खासकर शहर में हालात ज्यादा खराब बने रहते हैं। इस समय जिले के अधिकतर जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं है और ग्रामीण क्षेत्र में लोग खेतों में लगे ट्यूबवेल व हैंडपंप आदि से काम चला लेते हैं। वहीं, शहर में लोग आरओ का पानी खरीदकर पीने को विवश हैं। सरकारी पेयजल सप्लाई का पानी का पीने लायक नहीं होने की वजह से अधिकतर लोगों ने अपने घरों में भी आरओ लगवा रखे हैं।
इन नहरों के जरिये जलघरों तक पहुंचता है पानी
जिले में मेन लोहारु कैनाल, बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, मेहड़ा, बरसाना व कितलाना डिस्ट्रीब्यूटरी से जलघरों में पानी डाला जाता है। नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पाने की वजह से अंतिम छोर पर पड़ने वाले गांवों के जलघरों तक पानी नहीं पहुंच पाता है और इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मानक के अनुसार नहीं हो पा रही सप्लाई
शहर और जिले की अगर बात करें तो जनस्वास्थ्य विभाग और सरकार के मानक अनुसार पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही। नियमानुसार प्रति व्यक्ति 70 लीटर पेयजल आपूर्ति का प्रावधान है, लेकिन जिले में भंडारण क्षमता कम होने से विभाग को मजबूरीवश इसमें कटौती करनी पड़ रही है।
वर्जन::
नहरों में पानी आने पर जलघरों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। पानी का संकट नहीं होने दिया जाएगा। पानी का शेड्यूल बदला गया है। अब 24 दिन में नहरों मेें पानी छोड़ा जाएगा। - सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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जिले में जमीन का पानी मीठा नहीं होने के चलते पेयजल आपूर्ति पूर्णतया नहरों पर निर्भर है। नहरों के जरिये ही जिले के 58 जलघरों के टैंकों को भरा जाता है। 15 दिन की टर्म में ही जनस्वास्थ्य विभाग शहर में सुचारु रूप से पेयजल आपूर्ति नहीं कर पा रहा था, जबकि अब नहरी टर्म बढ़ाकर 24 दिन कर दी गई है, ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग के लिए जिले के लोगों के लिए 16 दिन नहरों में पानी चलने पर 24 दिन का पानी जुटाना आसान काम नहीं होगा। पुराने टाइमटेबल की अगर बात करें तो जलघरों के टैंक भरने के बाद विभाग 10 से 12 दिन ही पेयजल आपूर्ति कर पाता था, जबकि अब नए टाइम टेबल से तो जिलावासियों को अगली टर्म आने तक कम से कम दस दिन तक पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। इस समस्या का समाधान अगली टर्म पर नहरों में पानी आने के बाद ही हो पाएगा।
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इस बार 17 तक पहुंचेगा जिले की नहरों में पानी
अब 17 अप्रैल को जिले की नहरों में पानी पहुंचेगा। मेन खुबड़ू हेड से 16 अप्रैल को पानी छोड़ा जाएगा। इस समय जिले को 900 क्यूसेक पानी की जरूरत है तब जाकर पूर्ति संभव है। पानी का भंडारण करने के लिए विभाग के पास टैंकों की कमी बनी हुई है। टैंकों में मुश्किल से दस से बारह दिन का ही पानी स्टोरेज हो सकता है।
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खरीदकर पानी पीने को विवश हैं लोग
गर्मी के मौसम में हर साल जिले में पेयजल संकट गहराता है। खासकर शहर में हालात ज्यादा खराब बने रहते हैं। इस समय जिले के अधिकतर जलघरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं है और ग्रामीण क्षेत्र में लोग खेतों में लगे ट्यूबवेल व हैंडपंप आदि से काम चला लेते हैं। वहीं, शहर में लोग आरओ का पानी खरीदकर पीने को विवश हैं। सरकारी पेयजल सप्लाई का पानी का पीने लायक नहीं होने की वजह से अधिकतर लोगों ने अपने घरों में भी आरओ लगवा रखे हैं।
इन नहरों के जरिये जलघरों तक पहुंचता है पानी
जिले में मेन लोहारु कैनाल, बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी, मेहड़ा, बरसाना व कितलाना डिस्ट्रीब्यूटरी से जलघरों में पानी डाला जाता है। नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंच पाने की वजह से अंतिम छोर पर पड़ने वाले गांवों के जलघरों तक पानी नहीं पहुंच पाता है और इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मानक के अनुसार नहीं हो पा रही सप्लाई
शहर और जिले की अगर बात करें तो जनस्वास्थ्य विभाग और सरकार के मानक अनुसार पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही। नियमानुसार प्रति व्यक्ति 70 लीटर पेयजल आपूर्ति का प्रावधान है, लेकिन जिले में भंडारण क्षमता कम होने से विभाग को मजबूरीवश इसमें कटौती करनी पड़ रही है।
वर्जन::
नहरों में पानी आने पर जलघरों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। पानी का संकट नहीं होने दिया जाएगा। पानी का शेड्यूल बदला गया है। अब 24 दिन में नहरों मेें पानी छोड़ा जाएगा। - सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग