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चार साल से नहीं रेडियाग्राफर, धूल फांक रही एक्स-रे मशीन
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प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर भारी भरकम बजट जारी किया जाता है लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ ओर ही है। राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बौंदकलां में वर्ष 2015 से ही रेडियोग्राफर का पद रिक्त है। पद खाली होने के कारण मरीजों को एक्स-रे सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे मशीन होने के बाद भी दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को निजी अस्पतालों या फिर दूर-दराज के अस्पतालों में जाकर अपना एक्स-रे करवाना पड़ता है। सुविधा के अभाव में मरीजों को काफी परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी कोई ध्यान नहीं दे रहें है जिसके चलते सरकार भी समस्या को देखकर अनदेखा कर रही है। रेडियोग्राफर नहीं होने के कारण मरीजों को सामान्य नागरिक अस्पताल कलानौर कलां, भिवानी, चरखी दादरी और रोहतक में एक्स-रे के लिए जाना पड़ रहा है। रिक्त पद होने के चलते मशीन केवल शो-पीस बनकर रह गई है। मरीजों को केंद्र में एक्स-रे की सुविधा के अभाव में निजी अस्पतालों में जाकर 300 से 400 रुपये देकर अपना एक्स-रे करवाना पड़ता है।
इन गांवों को झेलनी पड़ रही परेशानियां
एक्स-रे की सुविधा के अभाव में बौंदकलां, बौंदखुर्द, रणकोली, निमड़ी, मालकोष, ऊण, सांकरोड, सांजरवास, फौगाट, रानीला, झींझर, भागेश्वरी, अचीना, बास, सांवड़, हिंडोल, लांबा, कोहलावास, मिसरी व जयश्री के ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है। लड़ाई-झगड़े या फिर गिरकर घायल होने वाले मरीजों को एक्स-रे की सुविधा के अभाव में अमूमन चरखी दादरी, भिवानी या फिर पीजीआई रोहतक रेफर करना पड़ता है।
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जिले में ही है केवल एक रेडियोग्राफर : डिप्टी सीएमओ
इस बारे में उप सिविल सर्जन डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि पूरे जिले में ही केवल एक ही रेडियोग्राफर कार्यरत है। जो कि केवल सामान्य अस्पताल चरखी दादरी में ही कार्यरत है। जिला अस्पताल में अनेक गांवों के ग्रामीण आते है। विभाग की ओर से इस बारे में डीजी हेल्थ को भी लेटर लिखा जा चुका है। बीच में दो रेडियोग्राफर को चरखी दादरी भेजा गया था। लेकिन दोनों ने ही ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। विभाग तो केवल उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर ही अवगत करवा सकता है।
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राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे मशीन होने के बाद भी दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को निजी अस्पतालों या फिर दूर-दराज के अस्पतालों में जाकर अपना एक्स-रे करवाना पड़ता है। सुविधा के अभाव में मरीजों को काफी परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी कोई ध्यान नहीं दे रहें है जिसके चलते सरकार भी समस्या को देखकर अनदेखा कर रही है। रेडियोग्राफर नहीं होने के कारण मरीजों को सामान्य नागरिक अस्पताल कलानौर कलां, भिवानी, चरखी दादरी और रोहतक में एक्स-रे के लिए जाना पड़ रहा है। रिक्त पद होने के चलते मशीन केवल शो-पीस बनकर रह गई है। मरीजों को केंद्र में एक्स-रे की सुविधा के अभाव में निजी अस्पतालों में जाकर 300 से 400 रुपये देकर अपना एक्स-रे करवाना पड़ता है।
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इन गांवों को झेलनी पड़ रही परेशानियां
एक्स-रे की सुविधा के अभाव में बौंदकलां, बौंदखुर्द, रणकोली, निमड़ी, मालकोष, ऊण, सांकरोड, सांजरवास, फौगाट, रानीला, झींझर, भागेश्वरी, अचीना, बास, सांवड़, हिंडोल, लांबा, कोहलावास, मिसरी व जयश्री के ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ती है। लड़ाई-झगड़े या फिर गिरकर घायल होने वाले मरीजों को एक्स-रे की सुविधा के अभाव में अमूमन चरखी दादरी, भिवानी या फिर पीजीआई रोहतक रेफर करना पड़ता है।
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जिले में ही है केवल एक रेडियोग्राफर : डिप्टी सीएमओ
इस बारे में उप सिविल सर्जन डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि पूरे जिले में ही केवल एक ही रेडियोग्राफर कार्यरत है। जो कि केवल सामान्य अस्पताल चरखी दादरी में ही कार्यरत है। जिला अस्पताल में अनेक गांवों के ग्रामीण आते है। विभाग की ओर से इस बारे में डीजी हेल्थ को भी लेटर लिखा जा चुका है। बीच में दो रेडियोग्राफर को चरखी दादरी भेजा गया था। लेकिन दोनों ने ही ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। विभाग तो केवल उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर ही अवगत करवा सकता है।