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इंसानियत के हाथ : इंसानों के साथ पशुओं की भी बचा रहे जिंदगी
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घायल गोवंश को प्राथमिक उपचार देते संस्था के सदस्य।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। दस युवाओं की टीम ने 19 साल पहले रक्तदान के क्षेत्र में और 17 साल पहले पशुओं की सेवा करने का जो बीड़ा उठाया था, उसे आज भी निभा रहे हैं। फर्क इतना है कि अब दस सदस्यीय टीम का दायरा बढ़कर 200 पहुंच गया है, जिससे सामाजिक कार्य करने में और सहूलियतें हो रही हैं। हम बात कर रहे हैं शहर के बाबा स्वामी दयाल सेवा संगठन की।
इस संगठन के युवा रक्तदान के प्रति लोगों का नजरिया बदलने के साथ साथ गो संरक्षण और घायल पशुओं को उपचार दिलाने का कार्य भी कर रहे हैं। पिछले 19 सालों में यह संगठन जिले में 650 रक्तदान शिविर लगा चुका है, जिनमें करीब 50 हजार यूनिट रक्त एकत्र हुआ, जो हजारों जिंदगियां बचाने के काम में आया है।
2002 में सामाजिक कार्य करने के लिए दस युवाओं ने बाबा स्वामी दयाल सेवा संगठन बनाया। पहला रक्तदान शिविर भी संगठन ने 2002 में ही लगाया था। अब इस संगठन से 200 से अधिक युवा जुड़ चुके हैं, जो क्रमबद्ध ढंग से सामाजिक कार्यों में अलग-अलग समय अपनी सहभागिता निभाते हैं। संगठन के सचिव रिंपी फौगाट का कहना है कि पिछले 19 सालों में 650 रक्तदान कैंप लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 50 हजार यूनिट एकत्र कर दूसरे जिलों और प्रदेश से बाहर भी जरूरतमंदों के लिए मुहैया करवाया गया है। एक साल में संगठन 35 से 40 शिविर लगाता है। उन्होंने बताया कि दादरी सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं है और इसके चलते दूसरे जिलों के ब्लड बैंकों की टीम से संपर्क कर शिविर लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि रक्तदान शिविर नियमित अंतराल पर लगने का सबसे बड़ा फायदा ये मिला कि आज के समय में जिले 500 एक्टिव ब्लड डोनर हैं। रक्तदान को लेकर क्षेत्र के लोगों की सोच अब पूरी तरह बदल चुकी है और वे इस नेक कार्य के लिए आगे आ रहे हैं।
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रिंपी ने बताया कि 2004 के दौरान मृत पशुओं के उठान का कार्य नगरपालिका ने बंद करवा दिया, जो अब तक शुरू नहीं हुआ है। इसके बाद 2004 में ही घायल पशुओं का इलाज करवाने व मृत गोवंश और अन्य पशुओं को मिट्टी देने का कार्य संगठन ने शुरू किया। उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़े युवा अब तक करीब 45 हजार घायल पशुओं जैसे गाय, बंदर, कुत्ता, मोर आदि को मौके पर उपचार देने के साथ पशु अस्पताल भी पहुंचा चुके हैं, जबकि करीब 2500 मृत पशुओं को मिट्टी भी दी गई है। इस प्रकार के सामाजिक कार्यों पर जो खर्च आता है, उसका वहन युवा मिलकर अपनी जेब से करते हैं।
संगठन पदाधिकारी बोले: आगे बढ़ते गए और बन गया कारवां
- हम दस साथियों ने 2002 में रक्तदान और 2004 में पशु संरक्षण के क्षेत्र में काम शुरू किया था। तब से ही ये दोनों कार्य लगातार जारी हैं। जिस सोच के साथ संगठन की स्थापना की थी, वो आज भी बरकरार है। हम बस प्रयास करते गए और युवा टीम में जुड़ने से कारवां बढ़ता चला गया। रक्तदान के क्षेत्र में अब दादरी के युवा प्रदेश और देश में मिसाल बन चुके हैं।
रिंपी फौगाट, सचिव, बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ
सामाजिक कार्यों के लिए युवाओं को समय अवश्य निकालना चाहिए। हमें जहां भी मौका मिले सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। संगठन से अब काफी युवा जुड़ चुके हैं जो रक्तदान और पशु सेवा के कार्य के लिए चौबीस घंटे तैयार रहते हैं। मैं खुद को खुशनसीब समझता हूं कि संगठन का हिस्सा हूं जिसके जरिये में सामाजिक कार्यों में सहभागिता निभाने का मौका मिल रहा है।
संजय चाहर, संगठन सदस्य
मैं पिछले करीब आठ साल से संगठन से जुड़ा हूं और रक्तदान व पशु सेवा कार्य में हरसंभव सहयोग कर रहा हूं। शुरुआत में सामान्य जिंदगी और इस कार्य के लिए समय निकालने में थोड़ी दिक्कतें आईं, लेकिन मैंने अपने दोनों कार्य साथ-साथ जारी रखे। इसके बाद फिर सब सामान्य हो गया और अब मैं अपनी सामान्य जिंदगी के साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी समय निकाल रहा हूं। राकेश योगी, संगठन सदस्य
मैं करीब दस साल से संगठन से जुड़ा हुआ हूं। शुरुआत में रक्तदान को लेकर मन में भ्रम था, लेकिन रिंपी फौगाट से प्रेरणा मिलने के बाद यह वहम निकल गया। अब तक मैं 30 से अधिक बार रक्तदान कर चुका हूं। घायल गोवंश या किसी अन्य पशु के उपचार या मदद के लिए मैं 24 घंट और सातों दिन तत्पर हूं। सामाजिक कार्यों में सहभागिता निभाकर मन को तसल्ली मिलती है।
राजेश सोनी, संगठन सदस्य
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इस संगठन के युवा रक्तदान के प्रति लोगों का नजरिया बदलने के साथ साथ गो संरक्षण और घायल पशुओं को उपचार दिलाने का कार्य भी कर रहे हैं। पिछले 19 सालों में यह संगठन जिले में 650 रक्तदान शिविर लगा चुका है, जिनमें करीब 50 हजार यूनिट रक्त एकत्र हुआ, जो हजारों जिंदगियां बचाने के काम में आया है।
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2002 में सामाजिक कार्य करने के लिए दस युवाओं ने बाबा स्वामी दयाल सेवा संगठन बनाया। पहला रक्तदान शिविर भी संगठन ने 2002 में ही लगाया था। अब इस संगठन से 200 से अधिक युवा जुड़ चुके हैं, जो क्रमबद्ध ढंग से सामाजिक कार्यों में अलग-अलग समय अपनी सहभागिता निभाते हैं। संगठन के सचिव रिंपी फौगाट का कहना है कि पिछले 19 सालों में 650 रक्तदान कैंप लगाए जा चुके हैं, जिनमें करीब 50 हजार यूनिट एकत्र कर दूसरे जिलों और प्रदेश से बाहर भी जरूरतमंदों के लिए मुहैया करवाया गया है। एक साल में संगठन 35 से 40 शिविर लगाता है। उन्होंने बताया कि दादरी सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं है और इसके चलते दूसरे जिलों के ब्लड बैंकों की टीम से संपर्क कर शिविर लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि रक्तदान शिविर नियमित अंतराल पर लगने का सबसे बड़ा फायदा ये मिला कि आज के समय में जिले 500 एक्टिव ब्लड डोनर हैं। रक्तदान को लेकर क्षेत्र के लोगों की सोच अब पूरी तरह बदल चुकी है और वे इस नेक कार्य के लिए आगे आ रहे हैं।
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रिंपी ने बताया कि 2004 के दौरान मृत पशुओं के उठान का कार्य नगरपालिका ने बंद करवा दिया, जो अब तक शुरू नहीं हुआ है। इसके बाद 2004 में ही घायल पशुओं का इलाज करवाने व मृत गोवंश और अन्य पशुओं को मिट्टी देने का कार्य संगठन ने शुरू किया। उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़े युवा अब तक करीब 45 हजार घायल पशुओं जैसे गाय, बंदर, कुत्ता, मोर आदि को मौके पर उपचार देने के साथ पशु अस्पताल भी पहुंचा चुके हैं, जबकि करीब 2500 मृत पशुओं को मिट्टी भी दी गई है। इस प्रकार के सामाजिक कार्यों पर जो खर्च आता है, उसका वहन युवा मिलकर अपनी जेब से करते हैं।
संगठन पदाधिकारी बोले: आगे बढ़ते गए और बन गया कारवां
- हम दस साथियों ने 2002 में रक्तदान और 2004 में पशु संरक्षण के क्षेत्र में काम शुरू किया था। तब से ही ये दोनों कार्य लगातार जारी हैं। जिस सोच के साथ संगठन की स्थापना की थी, वो आज भी बरकरार है। हम बस प्रयास करते गए और युवा टीम में जुड़ने से कारवां बढ़ता चला गया। रक्तदान के क्षेत्र में अब दादरी के युवा प्रदेश और देश में मिसाल बन चुके हैं।
रिंपी फौगाट, सचिव, बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ
सामाजिक कार्यों के लिए युवाओं को समय अवश्य निकालना चाहिए। हमें जहां भी मौका मिले सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। संगठन से अब काफी युवा जुड़ चुके हैं जो रक्तदान और पशु सेवा के कार्य के लिए चौबीस घंटे तैयार रहते हैं। मैं खुद को खुशनसीब समझता हूं कि संगठन का हिस्सा हूं जिसके जरिये में सामाजिक कार्यों में सहभागिता निभाने का मौका मिल रहा है।
संजय चाहर, संगठन सदस्य
मैं पिछले करीब आठ साल से संगठन से जुड़ा हूं और रक्तदान व पशु सेवा कार्य में हरसंभव सहयोग कर रहा हूं। शुरुआत में सामान्य जिंदगी और इस कार्य के लिए समय निकालने में थोड़ी दिक्कतें आईं, लेकिन मैंने अपने दोनों कार्य साथ-साथ जारी रखे। इसके बाद फिर सब सामान्य हो गया और अब मैं अपनी सामान्य जिंदगी के साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी समय निकाल रहा हूं। राकेश योगी, संगठन सदस्य
मैं करीब दस साल से संगठन से जुड़ा हुआ हूं। शुरुआत में रक्तदान को लेकर मन में भ्रम था, लेकिन रिंपी फौगाट से प्रेरणा मिलने के बाद यह वहम निकल गया। अब तक मैं 30 से अधिक बार रक्तदान कर चुका हूं। घायल गोवंश या किसी अन्य पशु के उपचार या मदद के लिए मैं 24 घंट और सातों दिन तत्पर हूं। सामाजिक कार्यों में सहभागिता निभाकर मन को तसल्ली मिलती है।
राजेश सोनी, संगठन सदस्य