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एमवीओ के बाद आरटीए की गाड़ी में भी लगा मिला जीपीएस सिस्टम
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एमवीओ (मोटर व्हीकल ऑफिसर) के बाद अब आरटीए दर्शना भारद्वाज की सरकारी गाड़ी में भी जीपीएस लगा मिला है। विभाग की दो गाड़ियों में जीपीएस मिलने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरटीए दर्शना भारद्वाज ने उनकी गाड़ी में चोरी छिपे जीपीएस लगाने की शिकायत आगामी कार्रवाई के लिए पुलिस को दे दी है। विभागीय अधिकारियों का शक है कि ओवरलोड माफिया ने चेकिंग टीम की लोकेशन पता लगाने के लिए सरकारी गाड़ियों में जीपीएस लगा रखे हैं।
गत 22 फरवरी को एमवीओ की सरकारी गाड़ी संख्या एचआर 84-5389 में जीपीएस लगा मिला था और इस मामले की शिकायत पुलिस को दी गई थी। पुलिस मामले की फिलहाल जांच कर रही है और अब आरटीए दर्शना भारद्वाज की सरकार गाड़ी संख्या एचआर-19एम-0020 में भी जीपीएस डिवाइस लगी मिली है। इसकी जांच की गई तो एयरटेल का सिम कार्ड मिला। आरटीए दर्शना भारद्वाज ने इस मामले की शिकायत पुलिस को दे दी है।
ओवारलोड माफिया चेकिंग स्टाफ की कार्रवाई से बचने के लिए हरसंभव पैंतरे खेल रहा है और आरटीए विभाग की दो सरकारी गाड़ियों में जीपीएस लगाना इसकी बानगी है। इससे पहले भी चेकिंग टीम के साथ मारपीट के अलावा सरकारी गाड़ियों को तोड़ने तक की घटनाएं हो चुकी हैं। यहां तक की चेकिंग टीम की रैकी करने के मामले भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद ओवरलोड माफिया बेखौफ हैं और अब कार्रवाई से बचने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा भी जमकर ले रहे हैं। वहीं, अब देखने वाली बात ये होगी कि पुलिस जांच पूरी कर कब आरोपियों को काबू करती है।
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प्रतिदिन गुजरते हैं आठ हजार से अधिक डंपर
जिले में 16 खनन क्षेत्र हैं जिनसे प्रतिदिन आठ हजार से अधिक डंपर, हाईवा और ट्रॉले भवन निर्माण सामग्री लेकर गुजरते हैं। इनमें से ओवरलोड मिलने वाले भारी वाहनों के आरटीए टीम लगातार मोटी राशि के चालान करती है और ओवरलोड माफिया इसी के मद्देनजर आरटीए टीम पर नजर रखने के लिए जीपीएस का सहारा ले रहा है।
- व्हाट्सएप ग्रुपों पर डालते हैं लोकेशन
आरटीए विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि चेकिंग स्टाफ की लोकेशन मिलते ही ओवरलोड माफिया इसे व्हाट्सएप ग्रुपों पर डाल देते हैं। इसके बाद ओवरलोड वाहनों के रूट तक बदल दिए जाते हैं। अगर चेकिंग टीम मुख्यमार्ग पर हो तो ओवरलोड वाहनों को अप्रोच सड़कों और कच्चे रास्तों से निकलवाया जाता है। आरटीए टीम की लोकेशन व्हाट्सएप ग्रुपों पर शेयर करने के सबूत पुलिस को पहले भी मिल चुके हैं।
अलग-अलग गाड़ियों से करते हैं टीम का पीछा
ओवरलोड माफिया गाड़ियों से भी आरटीए टीम पर नजर रखते हैं। कुछ दूरी बाद टीम पर नजर रखने वाली गाड़ी बदल दी जाती है। करीब डेढ़ साल पहले तत्कालीन आरटीए सचिव ने पुलिस विभाग को पीछा करने वाली 20 गाड़ियों के नंबर तक दिए थे जिनमें पंजाब के रजिस्ट्रेशन नंबर की गाड़ियां भी शामिल थीं।
वर्जन::
एमवीओ के अलावा मेरी सरकारी गाड़ी में भी जीपीएस लगा मिला है। इसमें एयरटेल का सिम कार्ड था। एमवीओ की गाड़ी में जीपीएस मिलने के बाद संदेह के आधार पर मैंने मेरी गाड़ी चैक करवाई तो ये खुलासा हुआ। मैंने आगामी कार्रवाई के लिए शिकायत पुलिस को दे दी है।
दर्शना भारद्वाज, आरटीए, चरखी दादरी
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गत 22 फरवरी को एमवीओ की सरकारी गाड़ी संख्या एचआर 84-5389 में जीपीएस लगा मिला था और इस मामले की शिकायत पुलिस को दी गई थी। पुलिस मामले की फिलहाल जांच कर रही है और अब आरटीए दर्शना भारद्वाज की सरकार गाड़ी संख्या एचआर-19एम-0020 में भी जीपीएस डिवाइस लगी मिली है। इसकी जांच की गई तो एयरटेल का सिम कार्ड मिला। आरटीए दर्शना भारद्वाज ने इस मामले की शिकायत पुलिस को दे दी है।
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ओवारलोड माफिया चेकिंग स्टाफ की कार्रवाई से बचने के लिए हरसंभव पैंतरे खेल रहा है और आरटीए विभाग की दो सरकारी गाड़ियों में जीपीएस लगाना इसकी बानगी है। इससे पहले भी चेकिंग टीम के साथ मारपीट के अलावा सरकारी गाड़ियों को तोड़ने तक की घटनाएं हो चुकी हैं। यहां तक की चेकिंग टीम की रैकी करने के मामले भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद ओवरलोड माफिया बेखौफ हैं और अब कार्रवाई से बचने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा भी जमकर ले रहे हैं। वहीं, अब देखने वाली बात ये होगी कि पुलिस जांच पूरी कर कब आरोपियों को काबू करती है।
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प्रतिदिन गुजरते हैं आठ हजार से अधिक डंपर
जिले में 16 खनन क्षेत्र हैं जिनसे प्रतिदिन आठ हजार से अधिक डंपर, हाईवा और ट्रॉले भवन निर्माण सामग्री लेकर गुजरते हैं। इनमें से ओवरलोड मिलने वाले भारी वाहनों के आरटीए टीम लगातार मोटी राशि के चालान करती है और ओवरलोड माफिया इसी के मद्देनजर आरटीए टीम पर नजर रखने के लिए जीपीएस का सहारा ले रहा है।
- व्हाट्सएप ग्रुपों पर डालते हैं लोकेशन
आरटीए विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि चेकिंग स्टाफ की लोकेशन मिलते ही ओवरलोड माफिया इसे व्हाट्सएप ग्रुपों पर डाल देते हैं। इसके बाद ओवरलोड वाहनों के रूट तक बदल दिए जाते हैं। अगर चेकिंग टीम मुख्यमार्ग पर हो तो ओवरलोड वाहनों को अप्रोच सड़कों और कच्चे रास्तों से निकलवाया जाता है। आरटीए टीम की लोकेशन व्हाट्सएप ग्रुपों पर शेयर करने के सबूत पुलिस को पहले भी मिल चुके हैं।
अलग-अलग गाड़ियों से करते हैं टीम का पीछा
ओवरलोड माफिया गाड़ियों से भी आरटीए टीम पर नजर रखते हैं। कुछ दूरी बाद टीम पर नजर रखने वाली गाड़ी बदल दी जाती है। करीब डेढ़ साल पहले तत्कालीन आरटीए सचिव ने पुलिस विभाग को पीछा करने वाली 20 गाड़ियों के नंबर तक दिए थे जिनमें पंजाब के रजिस्ट्रेशन नंबर की गाड़ियां भी शामिल थीं।
वर्जन::
एमवीओ के अलावा मेरी सरकारी गाड़ी में भी जीपीएस लगा मिला है। इसमें एयरटेल का सिम कार्ड था। एमवीओ की गाड़ी में जीपीएस मिलने के बाद संदेह के आधार पर मैंने मेरी गाड़ी चैक करवाई तो ये खुलासा हुआ। मैंने आगामी कार्रवाई के लिए शिकायत पुलिस को दे दी है।
दर्शना भारद्वाज, आरटीए, चरखी दादरी