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Charkhi Dadri News: बिजली निगम ने 30 साल पुराना काला मीटर बदलना किया शुरू
Wed, 04 Dec 2024 01:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 04 Dec 2024 01:11 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। बिजली निगम ने 30 साल पुराने काले रंग के मीटर बदलने का काम शुरू कर दिया है। आज भी जिले में इन मीटरों की संख्या करीब 800 है। ये मीटर उस जमाने के लगे हुए हैं जब प्रदेश में बिजली आपूर्ति की शुरुआत हुई थी। ये मीटर रीडिंग कम निकालते हैं। इससे बिजली चोरी का अंदेशा ज्यादा रहता है।
बिजली निगम ऐसे प्रत्येक बिंदु पर काम रहा है। ताकि बिजली की खपत कम से कम हो और निगम को घाटा भी न झेलना पड़े। साथ ही उपभोक्ताओं को भी फायदा हो। बिजली निगम ने कंप्यूटराइज्ड मीर पोल पर लगा रखे हैं। आज से तीन दशक पहले मीटर घरों के अंदर होते थे, जिससे चोरी होती थी। जयपुर वाले काले मीटर से तो चोरी करना और भी आसान रहा है। इस मीटर में सीधे तार लगाकर चोरी की जा सकती है।
वैसे भी यह मीटर उस समय लगते थे जब 60,100 व 200 वाॅट के बल्ब होते थे। इन बल्ब में ही काले मीटर काफी कम रीडिंग निकालते थे। औसत रीडिंग नहीं निकल पाती थी। एलईडी बल्ब में काले मीटर बेहद कम रीडिंग निकाल रहे हैं। इससे निगम को नुकसान हो रहा है। घरों में रीडिंग लेना भी आसान नहीं होता था।
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चरखी दादरी। बिजली निगम ने 30 साल पुराने काले रंग के मीटर बदलने का काम शुरू कर दिया है। आज भी जिले में इन मीटरों की संख्या करीब 800 है। ये मीटर उस जमाने के लगे हुए हैं जब प्रदेश में बिजली आपूर्ति की शुरुआत हुई थी। ये मीटर रीडिंग कम निकालते हैं। इससे बिजली चोरी का अंदेशा ज्यादा रहता है।
बिजली निगम ऐसे प्रत्येक बिंदु पर काम रहा है। ताकि बिजली की खपत कम से कम हो और निगम को घाटा भी न झेलना पड़े। साथ ही उपभोक्ताओं को भी फायदा हो। बिजली निगम ने कंप्यूटराइज्ड मीर पोल पर लगा रखे हैं। आज से तीन दशक पहले मीटर घरों के अंदर होते थे, जिससे चोरी होती थी। जयपुर वाले काले मीटर से तो चोरी करना और भी आसान रहा है। इस मीटर में सीधे तार लगाकर चोरी की जा सकती है।
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वैसे भी यह मीटर उस समय लगते थे जब 60,100 व 200 वाॅट के बल्ब होते थे। इन बल्ब में ही काले मीटर काफी कम रीडिंग निकालते थे। औसत रीडिंग नहीं निकल पाती थी। एलईडी बल्ब में काले मीटर बेहद कम रीडिंग निकाल रहे हैं। इससे निगम को नुकसान हो रहा है। घरों में रीडिंग लेना भी आसान नहीं होता था।
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