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तीन दिन तै सबेरे पांच बजे लाइन में लागां, फैर भी खाद कौनी मिलै..
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पुरानी अनाज मंडी में डीएपी के लिए इंतजार करते किसान।
- फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी/बाढड़ा। तीन दिन तै सबेरे पांच बजे लाइन में लागां, फैर भी खाद कौनी मिलै..यह कहना है खाद विक्रय केंद्रों के बाहर लाइन में लगे किसानों का।
डीएपी की किल्लत ने किसानों की पूरी दिनचर्या ही बिगाड़ दी है। डीएपी के लिए किसानों को न केवल नींद खराब करनी पड़ रही है बल्कि उनका पूरी दिनचर्या ही बिगड़ गई है। किसानों को खाद के लिए सुबह चार बजे उठना पड़ रहा है। पांच बजे तक खाद विक्रय केंद्रों के बाहर लाइनें लग रही है। यहां भी धक्का-मुक्की के बीच पांच से छह घंटे इंतजार के बाद खाद मिल रही है। ऐसे में अधिकतर किसानों का तो नाश्ता भी कतार में ही हो रहा है। घंटों इंतजार के बाद भी किसानों को एक आधार कार्ड पर दो ही बैग ही डीएपी मिल रहा है। इस बात की भी गारंटी नहीं कि कतार में खडे़ सभी किसानों को डीएपी मिलेगी या नहीं।
मांग के अनुरूप जिले में डीएपी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। आलम ये है कि अन्नदाताओं को खाद लेने के लिए घंटों बर्बाद करने पड़ रहे हैं। चार से पांच घंटे लाइन में लगने के बाद भी खाद मिलेगी या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार करीब एक हजार मीट्रिक टन खाद जिले में पहुंच चुकी है और जबकि 300 मीट्रिक टन खाद की खेप जल्द पहुंचने का अनुमान है। हालांकि मांग के अनुरूप यह पूर्ति बहुत कम है। जिले में सरसों का बिजाई रकबा इस बार करीब 54 हजार हेक्टेयर अनुमानित है और इस लिहाज से भी करीब 54 हजार डीएपी के बैग किसानों को बिजाई के दौरान चाहिए। अभी तक डीएपी बेहद कम किसानों को मिल पाई है। दादरी शहर की पुरानी अनाज मंडी में और बाढड़ा में 12 जगहों पर डीएपी वितरण होता है। बाढड़ा सोसायटी के केंद्रों पर पिछले एक सप्ताह से खाद नहीं है जबकि दादरी में वितरण कार्य बेहद धीमा चल रहा है। ऐसे में डीएपी लेने के लिए प्रतिदिन किसान सहकारी समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। बाढड़ा के केंद्रीय सहकारी बैंक की सहकारी समिति के अलावा कादमा, बेरला, नांधा, धनासरी, चांदवास, बेरला कारी धारणी व हुई में खाद वितरण होता है और सोसायटी की तरफ से प्रथम चरण में 28 हजार बैगों की डिमांड भेजी गई थी। इसकी सितंबर के अंतिम सप्ताह में आपूर्ति होनी थी, लेकिन खेप अक्तूबर माह के 16 दिन बीतने के बाद भी नहीं पहुंची है। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से डीएपी की समस्या का समाधान करवाने की मांग की है।
साढे़ पांच बजे से कतार में किसान, साढे़ नौ बजे शुरू होता है वितरण
दादरी मुख्यालय की बात करें सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही किसान पुरानी अनाज मंडी में वितरण केंद्र पर पहुंच जाते हैं। करीब साढ़े नौ बजे के बाद वितरण शुरू होता है और उसके बाद अगर खाद मिल जाए तो किसान खुशी से वरना मायूस होकर लौटते हैं। कई किसान तो ऐसे हैं जो पिछले दो दिन से लगातार कतार में खड़े हो रहे हैं, लेकिन नंबर आने से पहले ही स्टॉक खत्म हो जाता है। इन किसानों को सुबह जल्दी शहर पहुंचना पड़ रहा है और इसके बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अब तक जिले में एक हजार मीट्रिक टन डीएपी पहुंच चुकी है और जल्द ही करीब 300 मीट्रिक टन की खेप और पहुंचने का अनुमान है। दूसरी ओर किसानों ने प्रशासन व सरकार से पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया करवाने की मांग की है। इस समय किसानों को एक आधार कार्ड पर 50-50 किलोग्राम वजन के दो बैग मिल रहे हैं।
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किसान बोले- देशवासियों का पेट भर पाए, इसलिए भूख पेट पहुंच रहे खाद लेने
किसानों को रबी फसल के लिए खाद की जरूरत है लेकिन प्रशासन व सरकार समय पर खाद मुहैया नहीं करवा रहे। देशवासियों का पेट भरने के लिए अन्नदाता खाद लेने के लिए स्वयं भूखे पेट जाकर लाइनों में लग रहा है, लेकिन इस ओर शासन व प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।
धर्मपाल, जिला प्रधान, भारतीय किसान यूनियन
बिजाई का समय है लेकिन किसानों को समय पर डीएपी नहीं मिल रही है जिससे किसानों को फसल बिजाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। दो दिनों में खाद नही आई तो किसान आंदौलन करने को मजबूर होंगे।
हरपाल, किसान
डीएपी लेने के लिए सुबह साढ़े पांच बजे मैं दादरी आया था। चार घंटे हो चुके हैं, लेकिन लाइन अभी भी बहुत लंबी है। तीन दिनों से लगातार मायूस लौट रहा हूं। दादरी आने-जाने में किराया और समय की बर्बादी हो रही है।
रामफल, किसान
मैं आज चौथी बार दादरी डीएपी लेने आया हूं। तीन दिनों से खाली हाथ लौट रहा हूं। आज मैं सुबह साढ़े पांच बजे मंडी में पहुंच गया था और उस दौरान भी यहां काफी किसान मौजूद थे। लाइन तो लंबी है लेकिन उम्मीद है कि आज डीएपी मिल जाएगी।
जगबीर, किसान
एक हजार मीट्रिक टन डीएपी जिले में पहुंच चुकी है। जल्द ही करीब 300 मीट्रिक टन की खेप पहुंच जाएगी और इसके बाद वितरण कार्य में तेजी आएगी।
प्रदीप गोदारा, जिला उपायुक्त, चरखी दादरी
डीएपी की कमी जिले में नहीं रहने दी जाएगी। जरुरत के अनुसार डीएपी की खेप वितरण केंद्रों पर मुहैया करवाई जाएगी। किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए हम प्रयासरत हैं।
कृष्ण कुमार, चीफ मैनेजर, इफको
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डीएपी की किल्लत ने किसानों की पूरी दिनचर्या ही बिगाड़ दी है। डीएपी के लिए किसानों को न केवल नींद खराब करनी पड़ रही है बल्कि उनका पूरी दिनचर्या ही बिगड़ गई है। किसानों को खाद के लिए सुबह चार बजे उठना पड़ रहा है। पांच बजे तक खाद विक्रय केंद्रों के बाहर लाइनें लग रही है। यहां भी धक्का-मुक्की के बीच पांच से छह घंटे इंतजार के बाद खाद मिल रही है। ऐसे में अधिकतर किसानों का तो नाश्ता भी कतार में ही हो रहा है। घंटों इंतजार के बाद भी किसानों को एक आधार कार्ड पर दो ही बैग ही डीएपी मिल रहा है। इस बात की भी गारंटी नहीं कि कतार में खडे़ सभी किसानों को डीएपी मिलेगी या नहीं।
मांग के अनुरूप जिले में डीएपी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। आलम ये है कि अन्नदाताओं को खाद लेने के लिए घंटों बर्बाद करने पड़ रहे हैं। चार से पांच घंटे लाइन में लगने के बाद भी खाद मिलेगी या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार करीब एक हजार मीट्रिक टन खाद जिले में पहुंच चुकी है और जबकि 300 मीट्रिक टन खाद की खेप जल्द पहुंचने का अनुमान है। हालांकि मांग के अनुरूप यह पूर्ति बहुत कम है। जिले में सरसों का बिजाई रकबा इस बार करीब 54 हजार हेक्टेयर अनुमानित है और इस लिहाज से भी करीब 54 हजार डीएपी के बैग किसानों को बिजाई के दौरान चाहिए। अभी तक डीएपी बेहद कम किसानों को मिल पाई है। दादरी शहर की पुरानी अनाज मंडी में और बाढड़ा में 12 जगहों पर डीएपी वितरण होता है। बाढड़ा सोसायटी के केंद्रों पर पिछले एक सप्ताह से खाद नहीं है जबकि दादरी में वितरण कार्य बेहद धीमा चल रहा है। ऐसे में डीएपी लेने के लिए प्रतिदिन किसान सहकारी समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। बाढड़ा के केंद्रीय सहकारी बैंक की सहकारी समिति के अलावा कादमा, बेरला, नांधा, धनासरी, चांदवास, बेरला कारी धारणी व हुई में खाद वितरण होता है और सोसायटी की तरफ से प्रथम चरण में 28 हजार बैगों की डिमांड भेजी गई थी। इसकी सितंबर के अंतिम सप्ताह में आपूर्ति होनी थी, लेकिन खेप अक्तूबर माह के 16 दिन बीतने के बाद भी नहीं पहुंची है। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से डीएपी की समस्या का समाधान करवाने की मांग की है।
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साढे़ पांच बजे से कतार में किसान, साढे़ नौ बजे शुरू होता है वितरण
दादरी मुख्यालय की बात करें सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही किसान पुरानी अनाज मंडी में वितरण केंद्र पर पहुंच जाते हैं। करीब साढ़े नौ बजे के बाद वितरण शुरू होता है और उसके बाद अगर खाद मिल जाए तो किसान खुशी से वरना मायूस होकर लौटते हैं। कई किसान तो ऐसे हैं जो पिछले दो दिन से लगातार कतार में खड़े हो रहे हैं, लेकिन नंबर आने से पहले ही स्टॉक खत्म हो जाता है। इन किसानों को सुबह जल्दी शहर पहुंचना पड़ रहा है और इसके बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अब तक जिले में एक हजार मीट्रिक टन डीएपी पहुंच चुकी है और जल्द ही करीब 300 मीट्रिक टन की खेप और पहुंचने का अनुमान है। दूसरी ओर किसानों ने प्रशासन व सरकार से पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया करवाने की मांग की है। इस समय किसानों को एक आधार कार्ड पर 50-50 किलोग्राम वजन के दो बैग मिल रहे हैं।
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किसान बोले- देशवासियों का पेट भर पाए, इसलिए भूख पेट पहुंच रहे खाद लेने
किसानों को रबी फसल के लिए खाद की जरूरत है लेकिन प्रशासन व सरकार समय पर खाद मुहैया नहीं करवा रहे। देशवासियों का पेट भरने के लिए अन्नदाता खाद लेने के लिए स्वयं भूखे पेट जाकर लाइनों में लग रहा है, लेकिन इस ओर शासन व प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।
धर्मपाल, जिला प्रधान, भारतीय किसान यूनियन
बिजाई का समय है लेकिन किसानों को समय पर डीएपी नहीं मिल रही है जिससे किसानों को फसल बिजाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। दो दिनों में खाद नही आई तो किसान आंदौलन करने को मजबूर होंगे।
हरपाल, किसान
डीएपी लेने के लिए सुबह साढ़े पांच बजे मैं दादरी आया था। चार घंटे हो चुके हैं, लेकिन लाइन अभी भी बहुत लंबी है। तीन दिनों से लगातार मायूस लौट रहा हूं। दादरी आने-जाने में किराया और समय की बर्बादी हो रही है।
रामफल, किसान
मैं आज चौथी बार दादरी डीएपी लेने आया हूं। तीन दिनों से खाली हाथ लौट रहा हूं। आज मैं सुबह साढ़े पांच बजे मंडी में पहुंच गया था और उस दौरान भी यहां काफी किसान मौजूद थे। लाइन तो लंबी है लेकिन उम्मीद है कि आज डीएपी मिल जाएगी।
जगबीर, किसान
एक हजार मीट्रिक टन डीएपी जिले में पहुंच चुकी है। जल्द ही करीब 300 मीट्रिक टन की खेप पहुंच जाएगी और इसके बाद वितरण कार्य में तेजी आएगी।
प्रदीप गोदारा, जिला उपायुक्त, चरखी दादरी
डीएपी की कमी जिले में नहीं रहने दी जाएगी। जरुरत के अनुसार डीएपी की खेप वितरण केंद्रों पर मुहैया करवाई जाएगी। किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए हम प्रयासरत हैं।
कृष्ण कुमार, चीफ मैनेजर, इफको