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Charkhi Dadri News: जयहिंद अस्पताल के दो चिकित्सकों पर केस दर्ज

Sun, 16 Jun 2024 03:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 16 Jun 2024 03:14 AM IST
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Case filed against two doctors
चरखी दादरी में जयहिंद अस्पताल को सील करने से पहले देर रात जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। 
चरखी दादरी। जयहिंद अस्पताल सील करने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने वहां कार्यरत दो चिकित्सकों और स्टाफ के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज करवाया है। इन आरोपियों में अस्पताल संचालक डॉ. नरेंद्र की पत्नी डॉ. श्वेता यादव और अस्पताल के सर्जन डॉ. तरुण मित्तल शामिल हैं।
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सरकार के निर्देशों और स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक के आदेशानुसार जिला स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे शहर के लोहारू रोड स्थित जयहिंद अस्पताल को सील कर दिया। इससे पहले वहां छह घंटे तक चली जांच में कई अनियमितताएं पकड़ में आईं।
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अनियमितताओं का संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल सील किया। कार्यवाहक सीएमओ डॉ. राजवीरेंद्र मलिक ने पुलिस को शिकायत दी। इसमें अस्पताल प्रबंधन पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, पीसीपीएनडीटी एक्ट, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। इस आधार पर वहां के सर्जन डॉ. तरुण मित्तल, अस्पताल संचालक की पत्नी डॉ. श्वेता यादव और स्टाफ सदस्यों के खिलाफ शहर थाने में मामला दर्ज करवाया गया।
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इस अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एक महिला के पति ने शिकायत दी थी। इसमें आरोप था कि सिजेरियन डिलिवरी के दौरान महिला के पेट में पट्टीनुमा गॉसिपिबोमा छोड़कर उपचार में लापरवाही की गई। इसके बाद सरकार ने पीजीआई मेडिकल बोर्ड समेत स्थानीय स्तर पर भी जांच का आदेश दिया था।
स्थानीय स्तर पर गोलमोल जांच की गई जबकि पीजीआई बोर्ड ने हाल ही में सरकार को रिपोर्ट सौंपी है। इसमें जयहिंद अस्पताल प्रबंधन पर सिजेरियन डिलिवरी के दौरान लापरवाही बरतने का अंदेशा जताया गया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम को शुक्रवार के निरीक्षण के दौरान भी यहां कई खामियां मिलीं।

- आरएस सांगवान अस्पताल में हुआ था महिला का पहला ऑपरेशन
शिकायतकर्ता की पत्नी की पहली सिजेरियन डिलिवरी वर्ष 2015 में आरएस सांगवान अस्पताल में हुई थी। वहां डॉ. ओपी सैनी ने ऑपरेशन किया था। उनकी योग्यता एमबीबीएस और एमएस (सामान्य सर्जरी) है। इसके पांच साल बाद बाद दूसरी सिजेरियन डिलिवरी जयहिंद अस्पताल में हुई। यहां कार्यरत डॉ. तरुण मित्तल की योग्यता एमबीबीएस और एमएस (सामान्य सर्जरी) है और डॉ. श्वेता यादव की योग्यता बीएएमएस एमएस (शल्य) है। रोहतक पीजीआई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे ऑपरेशन के दौरान चूक होने की ज्यादा संभावना बताई गई।

- दूसरी डिलिवरी के दौरान हुए दो अल्ट्रासाउंड, गॉसिपिबोमा नहीं आया नजर
पीजीआई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि दूसरी डिलिवरी के समय महिला के दो अल्ट्रासाउंड हुए और उनमें गॉसिपिबोमा नजर नहीं आया। ये तथ्य दूसरे ऑपरेशन में चूक होने की तरफ ही इशारा कर रहे हैं।

- शिकायतकर्ता का दावा डॉ. श्वेता ने किया दूसरा ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुलिस थाने में जो शिकायत दी गई है। उसमें शिकायतकर्ता का दावा है कि दूसरा सिजेरियन सेक्शन डॉ. श्वेता यादव ने किया था न कि डॉ. तरुण मित्तल ने। वहीं, डॉ. तरुण ने साफ कहा है कि उन्होंने सिजेरियन ऑपरेशन किया था और सहायक सर्जन के रूप में डॉ. श्वेता उनके साथ थीं। डॉ. तरुण के बयान के अनुसार वह मार्च 2020 से अस्पताल से जुड़े हैं। उन्होंने 24 मार्च 2020 से 30 सितंबर 2020 तक कॉल के आधार पर काम किया है। इसके बाद एक अक्तूबर 2020 से 30 अप्रैल 2021 तक नियमित आधार पर अपनी सेवाएं दीं।

- प्रयोग की गई सिरिंज क्रेशकार्ट में तो दस्ताने पड़े मिले आपातकालीन कक्ष में
टीम के सदस्य डॉ. राहुल अरोड़ा और जिला ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर तरुण कुमार को जांच के दौरान बायोमेडिकल वेस्ट की निस्तारण प्रक्रिया सही नहीं मिली। उपयोग की गई सिरिंज आपातकालीन क्रेशकार्ट में पड़ी मिली। इस्तेमाल किए हुए दस्ताने आपातकालीन कक्ष में पड़े मिले। बायोमेडिकल कचरे का उचित पृथक्कीकरण नहीं मिला। वहीं, डॉ. गौरव भारद्वाज, डॉ. नरेंद्र और डॉ. अंकुर नागर की टीम को रजिस्टर, एफ फॉर्म, रसीद बुक आदि के विश्लेषण के दौरान अनियमितताएं मिलीं। इनके अनुसार क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, बायोमेडिकल वेस्ट के मानदंडों के उल्लंघन और अनदेखी का खुलासा हुआ।



इस मामले में डॉ. राजविंद्र की शिकायत पर डॉ. तरुण मित्तल और डॉ. श्वेता यादव समेत अन्य के खिलाफ धारा 420, 336, 337 और 338 के तहत केस दर्ज किया गया है। - मुकेश कुमार, एएसआई एवं जांच अधिकारी।
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