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Charkhi Dadri News: लंबित मांगें न मानने पर आशा वर्कर्स ने शहर में किया प्रदर्शन
Wed, 21 May 2025 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 21 May 2025 12:09 AM IST
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प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी कर रोष जतातीं आशा वर्कर्स।
चरखी दादरी। सीटू राज्य कमेटी के आह्वान पर लंबित मांगें न मानने पर आशा वर्कर्स ने शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला प्रधान प्रेमपति ने किया। झोझू कलां ब्लाॅक प्रधान प्रमिला गुडाना, संघ के जिला कोषाध्यक्ष राजकुमार घिकाड़ा व यशपाल मलिक की मौजूदगी में सीटीएम को ज्ञापन सौंपा।
राज्य उपप्रधान कमलेश भैरवी ने कहा कि हरियाणा सरकार कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा वर्कर्स को धमकी भरे पत्र भेज रही है। सरकार अपनी नाकामी को छुपाना चाहती है। सरकार ऐसा करके प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों को खुली छूट दे रही है।
कमलेश ने कहा कि अगर सरकार कन्या भ्रूण हत्या को रोकना चाहती है तो प्रदेश में तमाम अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे में शामिल करे। उन्हाेंने कहा कि सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए जितनी योजनाओं की घोषणा की हैं, वे केवल कागजों तक ही सीमित हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी पीएचसी पर डिलीवरी के समय अगर कोई इमरजेंसी होती है तो महिला डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं है।
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गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए एक दिन कैंप लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। ज्यादातर पीएचसी पर लैब टेक्नीशियन और दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं। कई सरकारी जिला अस्पतालों में भी अल्ट्रासाउंड की मशीन उपलब्ध नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए गांव स्तर पर सब सेंटर में जरूरी दवाइयां और एमसीपी कार्ड तक समय पर उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं। डिलीवरी हो जाने के बाद मां और बच्चे को घर तक पहुंचने के लिए पर्याप्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हैं।
कमलेश भैरवी ने कहा कि इन तमाम समस्याओं से सरकार को यूनियन की ओर से बार-बार अवगत करवाया गया है जिन पर सरकार ने कोई अमल नहीं किया है। आशा वर्कर्स यूनियन सरकार के इस रवैये का कड़ा विरोध करती है। आशा वर्कर्स यूनियन के राज्य सम्मेलन में 14 व 15 जून को पानीपत में आगामी आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इस दौरान प्रमिला, कविता, राकेश, मंजू ,मुन्नी, कमला, बबली, मनीषा मौजूद रहे।
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राज्य उपप्रधान कमलेश भैरवी ने कहा कि हरियाणा सरकार कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा वर्कर्स को धमकी भरे पत्र भेज रही है। सरकार अपनी नाकामी को छुपाना चाहती है। सरकार ऐसा करके प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों को खुली छूट दे रही है।
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कमलेश ने कहा कि अगर सरकार कन्या भ्रूण हत्या को रोकना चाहती है तो प्रदेश में तमाम अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे में शामिल करे। उन्हाेंने कहा कि सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए जितनी योजनाओं की घोषणा की हैं, वे केवल कागजों तक ही सीमित हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी पीएचसी पर डिलीवरी के समय अगर कोई इमरजेंसी होती है तो महिला डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं है।
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गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए एक दिन कैंप लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। ज्यादातर पीएचसी पर लैब टेक्नीशियन और दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं। कई सरकारी जिला अस्पतालों में भी अल्ट्रासाउंड की मशीन उपलब्ध नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए गांव स्तर पर सब सेंटर में जरूरी दवाइयां और एमसीपी कार्ड तक समय पर उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं। डिलीवरी हो जाने के बाद मां और बच्चे को घर तक पहुंचने के लिए पर्याप्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हैं।
कमलेश भैरवी ने कहा कि इन तमाम समस्याओं से सरकार को यूनियन की ओर से बार-बार अवगत करवाया गया है जिन पर सरकार ने कोई अमल नहीं किया है। आशा वर्कर्स यूनियन सरकार के इस रवैये का कड़ा विरोध करती है। आशा वर्कर्स यूनियन के राज्य सम्मेलन में 14 व 15 जून को पानीपत में आगामी आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इस दौरान प्रमिला, कविता, राकेश, मंजू ,मुन्नी, कमला, बबली, मनीषा मौजूद रहे।