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Charkhi Dadri News: हेल्थ वेलनेस सेंटर के सामान खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप, विजिलेंस जांच शुरू
Wed, 26 Mar 2025 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 26 Mar 2025 12:54 AM IST
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फोटो 20
चरखी दादरी नागरिक अस्पताल। संवाद
- जिला स्वास्थ्य विभाग ने जेम पोर्टल से खरीदा था साढ़े 22 लाख का सामान, अधिकारियों पर 50 प्रतिशत कमीशन लेकर नियमों के विरुद्ध खरीद करने का आरोप
- 9 मई 2024 को मुख्यमंत्री के पास पहुंची थी शिकायत, विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज कर शुरू की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर हेल्थ वेलनेस सेंटर्स के डायग्नोस्टिक सामान की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। करीब साढ़े 22 लाख की धनराशि से खरीदे गए सामान में अधिकारियों पर 50 प्रतिशत कमीशन लेकर नियमों के खिलाफ खरीद प्रक्रिया अपनाने का आरोप है। इस मामले में विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता के अलावा विभागीय अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए गए।
सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र जटासरा ने 9 मई 2024 को मुख्यमंत्री के पास शिकायत भेजी थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन सीएमओ समेत दो डिप्टी सीएमओ पर हेल्थ वेलनेस सेंटर्स के डायग्नोस्टिक सामान की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप था। शिकायतकर्ता ने इस शिकायत की एक प्रति हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव समेत एडीजीपी सीआईडी, विजिलेंस पंचकूला, विजिलेंस रोहतक व हिसार को भी भेजी थी।
शिकायत में बताया गया कि चरखी दादरी सीएमओ कार्यालय की ओर से एचडब्ल्यूसी यानी हेल्थ वेलनेस सेंटर्स के लिए डायग्नोस्टिक का सामान खरीदा गया है। इसकी खरीद टेंडर के जरिये होनी थी। वर्ष 2023-24 में टेंडर भी हो चुका था। लेकिन, अधिकारियों ने इस टेंडर को दरकिनार करते हुए नियमों के खिलाफ जाकर 22.50 लाख का सामान खरीदा। आरोप है कि सामान कि खरीद में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है।
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शिकायतकर्ता ने बताया था कि अकाउंट ऑफिसर ने पीयूसी नोटिंग में स्पष्ट लिखा है कि 5 लाख से अधिक कीमत के सामान की खरीद ई-टेंडर के तहत की जाएगी। वहीं, चीफ फार्मेसी ऑफिसर ने नोटिंग में लिखा कि इनका टेंडर पहले हो चुका है, जिसकी वैधता 15 मई 2024 तक थी। इसके बावजूद तत्कालीन सिविल सर्जन ने दो डिप्टी सीएमओ के साथ मिलकर साढ़े 22 लाख का सामान जेम पोर्टल से खरीदा। इससे पहले उन्होंने सेटिंग की और 50 प्रतिशत कमीशन लेकर सामान अपने लोगों से खरीदा। सामान खरीद में जल्दबाजी इसलिए की गई क्योंकि जून 2024 में सीएमओ को सेवानिवृत्त होना था।
- स्वास्थ्य विभाग के बजाय उच्चस्तरीय टीम से थी जांच कराने की मांग
सूत्रों की मानें तो शिकायतकर्ता ने सीएम को भेजी शिकायत के नीचे एक अलग से नोट डाला था। इसमें मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के बजाय उच्चस्तरीय टीम से कराने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने अंदेशा जताया था कि भ्रष्टाचार करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर जांच प्रभावित कर सकते हैं।
- मंगलवार को दर्ज हुए बयान
इस मामले में विजिलेंस जांच शुरू हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो विजिलेंस जांच अधिकारी शिकायतकर्ता के बयान पहले दर्ज कर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उनके बयान मंगलवार को भैरवी गांव स्थित किसान मॉडल स्कूल में दर्ज किए गए।
वर्सन:
डायग्नोस्टिक सामान खरीद का ये मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। जांच एजेंसी का हम हरसंभव सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
-डॉ. राजविंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी नागरिक अस्पताल। संवाद
- जिला स्वास्थ्य विभाग ने जेम पोर्टल से खरीदा था साढ़े 22 लाख का सामान, अधिकारियों पर 50 प्रतिशत कमीशन लेकर नियमों के विरुद्ध खरीद करने का आरोप
- 9 मई 2024 को मुख्यमंत्री के पास पहुंची थी शिकायत, विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज कर शुरू की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर हेल्थ वेलनेस सेंटर्स के डायग्नोस्टिक सामान की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। करीब साढ़े 22 लाख की धनराशि से खरीदे गए सामान में अधिकारियों पर 50 प्रतिशत कमीशन लेकर नियमों के खिलाफ खरीद प्रक्रिया अपनाने का आरोप है। इस मामले में विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता के अलावा विभागीय अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए गए।
सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र जटासरा ने 9 मई 2024 को मुख्यमंत्री के पास शिकायत भेजी थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन सीएमओ समेत दो डिप्टी सीएमओ पर हेल्थ वेलनेस सेंटर्स के डायग्नोस्टिक सामान की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप था। शिकायतकर्ता ने इस शिकायत की एक प्रति हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव समेत एडीजीपी सीआईडी, विजिलेंस पंचकूला, विजिलेंस रोहतक व हिसार को भी भेजी थी।
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शिकायत में बताया गया कि चरखी दादरी सीएमओ कार्यालय की ओर से एचडब्ल्यूसी यानी हेल्थ वेलनेस सेंटर्स के लिए डायग्नोस्टिक का सामान खरीदा गया है। इसकी खरीद टेंडर के जरिये होनी थी। वर्ष 2023-24 में टेंडर भी हो चुका था। लेकिन, अधिकारियों ने इस टेंडर को दरकिनार करते हुए नियमों के खिलाफ जाकर 22.50 लाख का सामान खरीदा। आरोप है कि सामान कि खरीद में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है।
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शिकायतकर्ता ने बताया था कि अकाउंट ऑफिसर ने पीयूसी नोटिंग में स्पष्ट लिखा है कि 5 लाख से अधिक कीमत के सामान की खरीद ई-टेंडर के तहत की जाएगी। वहीं, चीफ फार्मेसी ऑफिसर ने नोटिंग में लिखा कि इनका टेंडर पहले हो चुका है, जिसकी वैधता 15 मई 2024 तक थी। इसके बावजूद तत्कालीन सिविल सर्जन ने दो डिप्टी सीएमओ के साथ मिलकर साढ़े 22 लाख का सामान जेम पोर्टल से खरीदा। इससे पहले उन्होंने सेटिंग की और 50 प्रतिशत कमीशन लेकर सामान अपने लोगों से खरीदा। सामान खरीद में जल्दबाजी इसलिए की गई क्योंकि जून 2024 में सीएमओ को सेवानिवृत्त होना था।
- स्वास्थ्य विभाग के बजाय उच्चस्तरीय टीम से थी जांच कराने की मांग
सूत्रों की मानें तो शिकायतकर्ता ने सीएम को भेजी शिकायत के नीचे एक अलग से नोट डाला था। इसमें मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के बजाय उच्चस्तरीय टीम से कराने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने अंदेशा जताया था कि भ्रष्टाचार करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर जांच प्रभावित कर सकते हैं।
- मंगलवार को दर्ज हुए बयान
इस मामले में विजिलेंस जांच शुरू हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो विजिलेंस जांच अधिकारी शिकायतकर्ता के बयान पहले दर्ज कर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उनके बयान मंगलवार को भैरवी गांव स्थित किसान मॉडल स्कूल में दर्ज किए गए।
वर्सन:
डायग्नोस्टिक सामान खरीद का ये मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। जांच एजेंसी का हम हरसंभव सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
-डॉ. राजविंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी