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Charkhi Dadri News: 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की भेजी मांग, पहली खेप में 750 मीट्रिक टन पहुंची
Sat, 02 Nov 2024 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 02 Nov 2024 10:45 PM IST
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प्राइवेट थोक विक्रेताओं व पैक्स समितियों के माध्यम से होगा खाद का वितरण, 1.22 लाख हेक्टेयर है जिले का कृषि योग्य रकबा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले की खपत को देखते हुए विभाग ने डीएपी के बाद अब 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की मांग भेजी है। पहली खेप के रूप में 750 मीट्रिक टन यूरिया पहुंच गई है। वितरण पैक्स समितियों के जरिए होगा।
बिजाई के बाद पहली सिंचाई के दौरान किसान यूरिया का छिड़काव करते हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1,22,358 हेक्टेयर है। इस बार रबी सीजन में सरसों की बिजाई का आंकड़ा 55 हजार व गेहूं का 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रहने का अनुमान है। सरसों व गेहूं दोनों ही फसल में यूरिया का इस्तेमाल होता है।
जिले में अब डीएपी के बाद यूरिया का वितरण कार्य भी शुरू हो गया है। विभाग ने इस बार जिले के लिए 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की मांग भेजी है। नवंबर माह में 12 हजार मीट्रिक टन यूरिया पहुंचेगी। 750 मीट्रिक टन यूरिया पहुंच गई है। गांवों में स्थित पैक्स समितियों, जमीदारा सोसायटी कार्यालय व इफको केंद्रों से यूरिया का वितरण होना है।
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- मिट्टी की जांच करवाएं किसान
कृषि विभाग के अधिकारियों की किसानों के लिए सलाह है कि वे मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही खाद का इस्तेमाल करें। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि जमीन को कितनी मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत है। किसान यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचें। इससे फसल में फायदा के बजाय नुकसान ज्यादा होता है। किसान गोबर की देसी खाद, जैविक खाद का अधिक इस्तेमाल करें। ताकि, पैदावार को बढ़ाया जा सके।
वर्सन:
यूरिया की पहली खेप पहुंच गई है। सभी प्राइवेट थोक विक्रेताओं व पैक्स समितियों के माध्यम से खाद का वितरण किया जाएगा। खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी। किसान खाद का जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करें। जिले के लिए 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की मांग भेजी है।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
फोटो-16
पुरानी अनाज मंडी स्थित खाद वितरण केंद्र। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले की खपत को देखते हुए विभाग ने डीएपी के बाद अब 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की मांग भेजी है। पहली खेप के रूप में 750 मीट्रिक टन यूरिया पहुंच गई है। वितरण पैक्स समितियों के जरिए होगा।
बिजाई के बाद पहली सिंचाई के दौरान किसान यूरिया का छिड़काव करते हैं। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1,22,358 हेक्टेयर है। इस बार रबी सीजन में सरसों की बिजाई का आंकड़ा 55 हजार व गेहूं का 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रहने का अनुमान है। सरसों व गेहूं दोनों ही फसल में यूरिया का इस्तेमाल होता है।
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जिले में अब डीएपी के बाद यूरिया का वितरण कार्य भी शुरू हो गया है। विभाग ने इस बार जिले के लिए 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की मांग भेजी है। नवंबर माह में 12 हजार मीट्रिक टन यूरिया पहुंचेगी। 750 मीट्रिक टन यूरिया पहुंच गई है। गांवों में स्थित पैक्स समितियों, जमीदारा सोसायटी कार्यालय व इफको केंद्रों से यूरिया का वितरण होना है।
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- मिट्टी की जांच करवाएं किसान
कृषि विभाग के अधिकारियों की किसानों के लिए सलाह है कि वे मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही खाद का इस्तेमाल करें। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि जमीन को कितनी मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत है। किसान यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचें। इससे फसल में फायदा के बजाय नुकसान ज्यादा होता है। किसान गोबर की देसी खाद, जैविक खाद का अधिक इस्तेमाल करें। ताकि, पैदावार को बढ़ाया जा सके।
वर्सन:
यूरिया की पहली खेप पहुंच गई है। सभी प्राइवेट थोक विक्रेताओं व पैक्स समितियों के माध्यम से खाद का वितरण किया जाएगा। खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी। किसान खाद का जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करें। जिले के लिए 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की मांग भेजी है।
-कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग
फोटो-16
पुरानी अनाज मंडी स्थित खाद वितरण केंद्र। संवाद