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Charkhi Dadri News: रबी सीजन में 29 हजार टन यूरिया व 13 हजार टन डीएपी की जरूरत
Tue, 08 Sep 2026 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 08 Sep 2026 01:03 AM IST
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चरखी दादरी। रबी सीजन की फसलों की बिजाई शुरू होने के 44 दिन शेष हैं। ऐसे में डीएपी व यूरिया खाद की जरूरत को देखते हुए विभाग ने मुख्यालय को खाद की मांग संबंधी विवरण भेज दिया है। जिले में मार्च 2026 तक 29 हजार टन यूरिया खाद की जरूरत रहेगी जबकि डीएपी खाद की जरूरत 13 हजार टन है। इसी प्रकार एनपीके व एसएसपी खाद की जरूरत 10 हजार टन रहेगी। नवंबर माह में यूरिया 8000 व डीएपी खाद की जरूरत 8000 टन रहेगी। जिला का कृषि योग्य कुल रकबा एक लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है।
15 अक्तूबर से शुरू होती है बिजाई
रबी की फसलों की बिजाई का सीजन 15 अक्तूबर से शुरू हो जाता है। शुरुआत में सरसों की बिजाई होती है। किसान सरसों की बिजाई में खाद का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद नवंबर प्रथम सप्ताह से गेहूं की अगेती बिजाई का कार्य शुरू हो जाता है। इसके बाद गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई 25 दिसंबर तक की जा सकेगी। ऐसे में यूरिया व डीएपी खाद की जरूरत दिसंबर माह तक बनी रहेगी।
दिसंबर में मांग ज्यादा
दिसंबर में यूरिया खाद की जरूरत ज्यादा रहेगी क्योंकि उस समय फसलों की सिंचाई का कार्य शुरू हो जाता है। किसान पहली व दूसरी सिंचाई के दौरान यूरिया खाद का छिड़काव करते हैं। विभाग की ओर से भी महीना वार खाद की आवक करवाई जाती है। जमीन के हिसाब से ही खाद की मांग ऊपर भेजी गई है।
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खाद का आकड़ों सहित विवरण
रबी सीजन में खपत एक नजर में:
मात्रा एमटी में यूरिया डीएपी एनपीके एसएसपी
अक्तूबर 2000 4000 1000 5000
नवंबर 8000 8000 2000 1000
दिसंबर 8000 1000 00 00
जनवरी 10000 00 00 00
फरवरी 00 00 00 00
मार्च 00 00 00 00
इसी प्रकार रबी सीजन में यूरिया की कुल जरूरत 29 हजार एमटी व डीएपी की मांग 13 हजार एमटी रहेगी। एपीके तीन हजार व एसएसपी खाद की सात हजार एमटी की जरूरत पड़ेगी। विभाग ने सभी प्रकार की खाद मंगवाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिख दिया है।
कोट:
विभाग व सरकार को रबी सीजन के लिए खाद का उचित अभी से करना चाहिए, ताकि किसानों को समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके। किसानों को खरीद केंद्रों के बाहर लंबी लाइन नहीं लगानी पड़े। हर सीजन में खाद की किल्लत बनी रहती है। किसान की पहले ही आर्थिक हालत कमजोर बनी हुई है।
हरपाल सिंह भांडवा, जिला अध्यक्ष, भाकियू
जरूरत के अनुसार खाद मंगवाई जाएगी। कुल बिजित रकबा के आधार पर खपत का आकलन किया जाता है। दिसंबर व जनवरी माह में यूरिया की ज्यादा खपत बनी रहेगी। बिजाई के समय डीएपी की जरूरत होती है। किसान रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करें। जैविक एवं देसी खाद ज्यादा फायदेमंद होता है। -डॉ. जितेंद्र कुमार, खाद नियंत्रक, कृषि विभाग
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15 अक्तूबर से शुरू होती है बिजाई
रबी की फसलों की बिजाई का सीजन 15 अक्तूबर से शुरू हो जाता है। शुरुआत में सरसों की बिजाई होती है। किसान सरसों की बिजाई में खाद का ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद नवंबर प्रथम सप्ताह से गेहूं की अगेती बिजाई का कार्य शुरू हो जाता है। इसके बाद गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई 25 दिसंबर तक की जा सकेगी। ऐसे में यूरिया व डीएपी खाद की जरूरत दिसंबर माह तक बनी रहेगी।
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दिसंबर में मांग ज्यादा
दिसंबर में यूरिया खाद की जरूरत ज्यादा रहेगी क्योंकि उस समय फसलों की सिंचाई का कार्य शुरू हो जाता है। किसान पहली व दूसरी सिंचाई के दौरान यूरिया खाद का छिड़काव करते हैं। विभाग की ओर से भी महीना वार खाद की आवक करवाई जाती है। जमीन के हिसाब से ही खाद की मांग ऊपर भेजी गई है।
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खाद का आकड़ों सहित विवरण
रबी सीजन में खपत एक नजर में:
मात्रा एमटी में यूरिया डीएपी एनपीके एसएसपी
अक्तूबर 2000 4000 1000 5000
नवंबर 8000 8000 2000 1000
दिसंबर 8000 1000 00 00
जनवरी 10000 00 00 00
फरवरी 00 00 00 00
मार्च 00 00 00 00
इसी प्रकार रबी सीजन में यूरिया की कुल जरूरत 29 हजार एमटी व डीएपी की मांग 13 हजार एमटी रहेगी। एपीके तीन हजार व एसएसपी खाद की सात हजार एमटी की जरूरत पड़ेगी। विभाग ने सभी प्रकार की खाद मंगवाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिख दिया है।
कोट:
विभाग व सरकार को रबी सीजन के लिए खाद का उचित अभी से करना चाहिए, ताकि किसानों को समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके। किसानों को खरीद केंद्रों के बाहर लंबी लाइन नहीं लगानी पड़े। हर सीजन में खाद की किल्लत बनी रहती है। किसान की पहले ही आर्थिक हालत कमजोर बनी हुई है।
हरपाल सिंह भांडवा, जिला अध्यक्ष, भाकियू
जरूरत के अनुसार खाद मंगवाई जाएगी। कुल बिजित रकबा के आधार पर खपत का आकलन किया जाता है। दिसंबर व जनवरी माह में यूरिया की ज्यादा खपत बनी रहेगी। बिजाई के समय डीएपी की जरूरत होती है। किसान रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करें। जैविक एवं देसी खाद ज्यादा फायदेमंद होता है। -डॉ. जितेंद्र कुमार, खाद नियंत्रक, कृषि विभाग