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Charkhi Dadri News: 50 प्रतिशत पद पड़े खाली, तीन पीएचसी पर डॉक्टर ही नहीं

Sat, 06 Jan 2024 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 06 Jan 2024 01:05 AM IST
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50 percent posts are vacant, there are no doctors in three PHCs
कादमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जहां चिकित्सक नहीं है। 
चरखी दादरी। दादरी जिला के स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा अधिकारी (एमओ) की फिर से कमी बन गई है। हाल ही में चार चिकित्सक पीजी कोर्स करने चल गए हैं और इसके बाद अब जिले में 49 ही चिकित्सक बच गए हैं। दूसरी ओर जिला में चिकित्सा अधिकारी के 94 पद स्वीकृत हैं और 50 फीसदी पद खाली होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इस समय तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जहां चिकित्सक ही तैनात नहीं हैं।
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जिला की ओवरऑल स्थिति देखें तो चिकित्सकों के 50 फीसदी पद इस समय खाली हैं। जिले की आबादी की बात करें तो करीब साढ़े पांच लाख है और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 17 है। इनमें सिविल अस्पताल और मातृ शिशु अस्पताल के अलावा तीन सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और 12 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) हैं। इन केंद्रों पर चिकित्सकों के अलावा विशेषज्ञों और संसाधनों की कमी बनी हुई है, जिसके चलते पिछले लंबे समय से मरीजों को तमाम सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों की कमी के चलते जिले से प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज रोहतक पीजीआई या भिवानी रेफर किए जा रहे हैं।
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वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक विशेषज्ञों की जिले में तैनाती नहीं हो पाई है। जिसका सीधे तौर पर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मजबूरीवश मरीजों को भी दूसरे जिले के अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग के पास 15 वेंटिलेटर तो हैं, लेकिन इन्हें ऑपरेट करने वाला एक भी फिजिशियन नहीं है। स्वास्थ्य विभाग फिजिशियन की तैनाती के लिए मुख्यालय कई बार डिमांड भेज चुका है, लेकिन अब तक यह कमी दूर नहीं हुई है। वहीं, जिले में तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो बिना मेडिकल ऑफिसर के सहारे चल रहे हैं। वहीं, सिविल अस्पताल की अगर बात करें तो 42 में से 17 ही चिकित्सक तैनात हैं। मातृ शिशु अस्पताल में चिकित्सकों के 70 फीसदी पद खाली पड़े हैं। यहां सात में से दो ही चिकित्सक तैनात हैं। वहीं, सात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी 50 फीसदी ही चिकित्सक तैनात हैं।
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एमओ के पास ही है डिप्टी सीएमओ का चार्ज



अहम बात ये है कि डिप्टी सीएमओ के पद खाली होने से 7 एमओ के पास ही इनका चार्ज है और वो भी स्वास्थ्य केंद्रों पर वो अपनी सेवाओं का लाभ मरीजों को नहीं दे पा रहे हैं। डिप्टी सीएमओ का ज्यादातर फोकस अपने प्रोग्राम पर ही रहता है।



स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी है 2000

सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 1200 के करीब रहती है। इसके अलावा एमसीएच की दैनिक ओपीडी 150 रहती है। वहीं, एक सीएचसी की ओपीडी 60 से 70 रहती है और इस लिहाज से सीएचसी पर एक दिन में करीब 200 मरीज पहुंचते हैं। वहीं, एक पीएचसी की ओपीडी 25 से 30 रहती है और इसके अनुसार जिले के 12 पीएचसी पर प्रतिदिन करीब 350 मरीज पहुंचते हैं।

फिजिशियन है न पीडिट्रिशियन, कैसे हो उपचार

जिले में 17 वर्ष तक के बच्चों की संख्या करीब 60 हजार है। खास बात यह है कि जिले में एक भी पीडिट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) तैनात नहीं है। इसके अलावा जिले में एक भी फिजिशियन नहीं है। इसके अलावा चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की कमी भी जिले में खल रही है। सिविल अस्पताल में पिछले करीब पांच साल से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है।

ये पीएचसी चल रही बिन चिकित्सक के

जिले में वैसे तो सात पीएचसी पर जरूरत के अनुसार 50 फीसदी ही चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन तीन पीएचसी ऐसे हैं जहां स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक ही तैनात नहीं किए हैं। इनमें माईकलां, मानकावास और कादमा शामिल हैं। चिकित्सा अधिकारी की कमी के चलते मरीज परेशान हैं।



जानिये.... किस स्वास्थ्य केंद्र पर क्या है चिकित्सकों की तैनाती की स्थिति

स्वास्थ्य केंद्र - स्वीकृत पद- तैनात चिकित्सक-खाली पद

सिविल अस्पताल- 42-23-19

एमसीएच-7-3-4

बौंद सीएचसी-7- 6-1

झोझू सीएचसी- 7-4-3

गोपी सीएचसी-7-4-3

अचीना पीएचसी- 2-1-1

रानीला पीएचसी-2-1-1

सांवड़ पीएचसी-2-1-1

इमलोटा पीएचसी-2-1-1

बलकरा पीएचसी-2-1-1

संतोकपुरा पीएचसी-2-1-1

माईकलां पीएचसी-2-0-2

मानकावास पीएचसी-2-0-2

बाढड़ा पीएचसी-2-1-1

हड़ौदी पीएचसी-2-1-1

छपार पीएचसी-2-1-1

कादमा पीएचसी-2-0-2


जिले में चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों के पास डिमांड भेज चुके हैं। चिकित्सक मिलते ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती कर कमी दूर कर दी जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए प्रयासरत हैं।



-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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