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ADGP Suicide: पोस्टमार्टम करवाने से परिवार का फिर इनकार, अंबाला से कांग्रेस सांसद ने की न्यायिक जांच की मांग
Fri, 10 Oct 2025 11:55 PM IST
नवीन दलाल
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: नवीन दलाल
Updated Fri, 10 Oct 2025 11:55 PM IST
सार
परिजनों का कहना है कि जब तक हरियाणा डीजीपी और एसपी रोहतक गिरफ्तार नहीं हो जाते तब तक वह एडीजीपी पूरण कुमार का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे।
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ADGP Y Puran Kumar suicide
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी ने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से लुधियाना में मुलाकात की और उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की। चंडीगढ़ पुलिस ने जांच के लिए 6 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता चंडीगढ़ के आईजी करेंगे।
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अभी भी पोस्टमार्टम करवाने को तैयार नहीं परिजन
आईएएस डी सुरेश और मृतक आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार के भाई जो विदेश से आए हैं, उन्होंने सेक्टर 9 पुलिस मुख्यालय में चंडीगढ़ के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा से मुलाकात की है। उन्होंने डीजीपी को बताया कि जब तक हरियाणा डीजीपी और एसपी रोहतक गिरफ्तार नहीं हो जाते तब तक वह एडीजीपी पूरण कुमार का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे। इस पर डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच के लिए आईजी के नेतृत्व एसआईटी गठन कर दी गई है।
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जातिगत उत्पीड़न के गंभीर आरोप
अंबाला से सांसद वरुण चौधरी के साथ आप विधायक अमित रतन, जो मृतक अधिकारी की पत्नी आईएएस अमनीत पी. कुमार के छोटे भाई हैं, ने कटारिया को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मंगलवार को सेक्टर-11 के सरकारी आवास पर खुद को गोली मारने वाले पूरन कुमार के सुसाइड नोट का जिक्र किया गया। सूत्रों के अनुसार, नोट में हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम हैं, जिन पर पिछले कुछ वर्षों में जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और अपमान का आरोप है।
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चौधरी ने ज्ञापन में लिखा कि एक आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या से पूरा देश सदमे में है। और भी चौंकाने वाला कारण यह है कि उन्होंने यह कदम हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों द्वारा किए गए जातिगत भेदभाव के कारण उठाया। बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर का अत्याचार-मुक्त भारत का सपना अभी भी अधूरा है। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरन कुमार के परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की।
परिवार की शिकायत: एफआईआर में अधूरी जानकारी
चंडीगढ़ पुलिस ने गुरुवार देर रात बीएनएस की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और एससी/एसटी एक्ट की कुछ धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। हालांकि, अमनीत ने चंडीगढ़ एसएसपी कंवरदीप कौर को पत्र लिखकर एफआईआर में "अधूरी जानकारी" और "कमजोर धाराओं" पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि सभी आरोपियों के नाम सही ढंग से जोड़े जाएं और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं को मजबूत किया जाए।चौधरी ने कहा, "पूरन कुमार ने अपने अंतिम नोट में हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया का विशेष उल्लेख किया है। उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।" परिवार ने मांग की है कि दोनों अधिकारी अपने पदों से हटाए जाएं, क्योंकि उनकी मौजूदगी जांच को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए 7 दिन में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।लुधियाना में मुलाकात के बाद चौधरी और रतन चंडीगढ़ के सेक्टर-24 में अमनीत के आवास पहुंचे। रतन ने कहा कि पूरन जी बहादुर थे, लेकिन उन्हें ऐसी परिस्थितियों में धकेल दिया गया। आजादी के 80 साल बाद भी जातिगत शोषण जारी है।" उन्होंने एफआईआर में खाली आरोपी कॉलम पर सवाल उठाया। परिवार ने डीजीपी कपूर और एसपी बिजारनिया के निलंबन की मांग की है। अमनीत ने 6 अक्टूबर को रोहतक में दर्ज एक फर्जी एफआईआर का भी जिक्र किया, जिसे साजिश का हिस्सा बताया।