{"_id":"6a329ddddc57bf295d050db8","slug":"the-spio-cannot-prevent-anyone-from-filing-an-rti-application-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1089-1047792-2026-06-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: एसपीआईओ किसी को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से नहीं रोक सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: एसपीआईओ किसी को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से नहीं रोक सकता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- आरटीआई आवेदन पर प्रतिबंध लगाने वाले एसपीआईओ को सूचना आयोग की फटकार
- शाहाबाद शुगर मिल्स के जन सूचना अधिकारी से पूछा - किस कानून के तहत आरटीआई लगाने से रोका जा सकता है?
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य जन सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) किसी नागरिक को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से नहीं रोक सकता है। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने शाहाबाद शुगर मिल्स कुरुक्षेत्र के एसपीआईओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने आरटीआई अधिनियम 2005 के प्रावधानों के विपरीत कार्य किया है। आयोग ने अधिकारी से पूछा कि आरटीआई अधिनियम की कौन-सी धारा उन्हें किसी आवेदक को आरटीआई आवेदन देने से रोकने का अधिकार देती है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मामला संदीप शरण द्वारा 12 नवंबर 2025 को दाखिल एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। आवेदक का आरोप था कि निर्धारित समय सीमा में सही और पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। इसके बाद उन्होंने 27 जनवरी 2026 को सूचना आयोग में शिकायत दायर कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
मामले की सुनवाई में राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि एसपीआईओ ने 21 जनवरी 2026 को जारी एक पत्र के माध्यम से आवेदक को भविष्य में आरटीआई आवेदन देने से रोकने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि आवेदक आरटीआई आवेदन देना बंद नहीं करता तो उसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कार्रवाई की जा सकती है।
विज्ञापन
आयोग ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत एसपीआईओ केवल सूचना उपलब्ध कराने वाला वैधानिक अधिकारी है। उसके पास किसी नागरिक को आरटीआई आवेदन देने से रोकने, प्रतिबंधित करने या ब्लैकलिस्ट करने का कोई अधिकार नहीं है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार या अधिक संख्या में आरटीआई आवेदन देता है तब भी एसपीआईओ उस पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं लगा सकता है। प्रत्येक आवेदन का निपटारा अलग-अलग और कानून के अनुसार करना अनिवार्य है।
आदेश में कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8 और 9 में ही सूचना न देने के सीमित आधार निर्धारित हैं। आयोग ने माना कि एसपीआईओ द्वारा जारी किया गया पत्र प्रथम दृष्टया कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध प्रतीत होता है। आयोग ने शिकायतकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को द्वितीय अपील में परिवर्तित कर दिया है। साथ ही शाहाबाद शुगर मिल्स के एसपीआईओ को 15 दिनों के भीतर मांगी गई पूरी सूचना निशुल्क और सत्यापित प्रतियों सहित उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
- शाहाबाद शुगर मिल्स के जन सूचना अधिकारी से पूछा - किस कानून के तहत आरटीआई लगाने से रोका जा सकता है?
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य जन सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) किसी नागरिक को आरटीआई आवेदन दाखिल करने से नहीं रोक सकता है। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने शाहाबाद शुगर मिल्स कुरुक्षेत्र के एसपीआईओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने आरटीआई अधिनियम 2005 के प्रावधानों के विपरीत कार्य किया है। आयोग ने अधिकारी से पूछा कि आरटीआई अधिनियम की कौन-सी धारा उन्हें किसी आवेदक को आरटीआई आवेदन देने से रोकने का अधिकार देती है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मामला संदीप शरण द्वारा 12 नवंबर 2025 को दाखिल एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। आवेदक का आरोप था कि निर्धारित समय सीमा में सही और पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। इसके बाद उन्होंने 27 जनवरी 2026 को सूचना आयोग में शिकायत दायर कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई में राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि एसपीआईओ ने 21 जनवरी 2026 को जारी एक पत्र के माध्यम से आवेदक को भविष्य में आरटीआई आवेदन देने से रोकने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि आवेदक आरटीआई आवेदन देना बंद नहीं करता तो उसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कार्रवाई की जा सकती है।
विज्ञापन
आयोग ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत एसपीआईओ केवल सूचना उपलब्ध कराने वाला वैधानिक अधिकारी है। उसके पास किसी नागरिक को आरटीआई आवेदन देने से रोकने, प्रतिबंधित करने या ब्लैकलिस्ट करने का कोई अधिकार नहीं है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार या अधिक संख्या में आरटीआई आवेदन देता है तब भी एसपीआईओ उस पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं लगा सकता है। प्रत्येक आवेदन का निपटारा अलग-अलग और कानून के अनुसार करना अनिवार्य है।
आदेश में कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8 और 9 में ही सूचना न देने के सीमित आधार निर्धारित हैं। आयोग ने माना कि एसपीआईओ द्वारा जारी किया गया पत्र प्रथम दृष्टया कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध प्रतीत होता है। आयोग ने शिकायतकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को द्वितीय अपील में परिवर्तित कर दिया है। साथ ही शाहाबाद शुगर मिल्स के एसपीआईओ को 15 दिनों के भीतर मांगी गई पूरी सूचना निशुल्क और सत्यापित प्रतियों सहित उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।