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Haryana Weather: 24 सालों में चौथी बार बिना बारिश के बीता नवंबर, 14 सालों में रात का तापमान अधिक

Sun, 01 Dec 2024 08:50 AM IST
नवीन दलाल अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 01 Dec 2024 08:50 AM IST
सार

चंडीगढ़ मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि नवंबर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश होती है और इस बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हो पाए। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तरी गोलार्ड से आने वाली ठंडी हवाओं का अनुकूल न होना था।

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Haryana Weather November passed without rain for fourth time in 24 years
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अक्तूबर के बाद नवंबर भी सूखा बीता। 24 साल में यह चौथा मौका है, जब नवंबर में बारिश की एक बूंद नहीं गिरी। 100 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। बारिश नहीं होने का सीधा असर तापमान पर पड़ा है। रात का तापमान 14 सालों में सबसे अधिक दर्ज किया गया है। दिसंबर शुरू हो चुका, लेकिन अब भी लोगों को कड़ाके की ठंड का इंतजार है। मौसम विभाग का कहना है कि कड़ाके की ठंड के लिए अभी लोगों को थोड़ा इंतजार और करना होगा।

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मौसम विभाग के मुताबिक नवंबर में औसतन 3.7 फीसदी सामान्य बारिश दर्ज की जाती है। बीते 24 सालों में वर्ष 2011, 2016, 2021 और 2024 के नवंबर में बारिश नहीं हुई है। पिछले साल नवंबर के महीने में सामान्य से 32 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई थी। उससे पहले 2020 में 76 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।
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मौसम में आए बदलाव का सबसे ज्यादा असर तापमान पर पड़ा है। हरियाणा के कुछ जिलों में रात का तापमान बीते 14 सालों में सबसे अधिक दर्ज किया गया है। अंबाला में रात का औसत तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। पिछले साल अधिकतम तापमान 14.6 डिग्री रिकॉर्ड हुआ था। वहीं, करनाल में रात का औसत तापमान 13.6 डिग्री दर्ज किया गया, जो 14 सालों में सबसे अधिक रहा है। वहीं, हिसार में रात का औसत तापमान 12.1 डिग्री दर्ज किया गया है। 2011 में 12.6 डिग्री रिकॉर्ड हुआ था।
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अगले दस दिन बारिश की संभावना नहीं
चंडीगढ़ मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि नवंबर में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश होती है और इस बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हो पाए। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तरी गोलार्ड से आने वाली ठंडी हवाओं का अनुकूल न होना था। अगले आठ से दस दिन भी बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। बारिश की वजह से रात का तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है।


नवंबर में बारिश न होना किसानों के लिए फायदेमंद
उधर, कृषि विशेषज्ञ व भारतीय कृषि अनुंसधान संस्थान दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने कहा कि नवंबर में बारिश का न होना किसानों के लिए अच्छी खबर है। 25 अक्तूबर से 12 नवंबर के बीच बारिश नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान बुवाई का समय होता है। चना, सरसों, जौ, गेहूं, आलू की बुवाई चलती है। बुवाई से पहले और बुवाई के 15 से 20 दिन के बीच यदि बारिश हुई तो दस से 15 फीसदी फसल बर्बाद हो सकती है।

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