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Bhiwani News: डीएमडी बीमारी से पीड़ित दो भाइयों ने खून से लिखा प्रधानमंत्री को पत्र
Wed, 26 Mar 2025 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 26 Mar 2025 12:14 AM IST
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भिवानी। गांव फूलपुरा निवासी 11 वर्षीय हरेंद्र सिंह व दस वर्षीय वीरेंद्र सिंह ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) बीमारी से ग्रस्त हैं। अपने लिए जीवन रक्षक दवाई की मांग करने के लिए दोनों मरीजों ने अपने खून से अंगूठे का निशान लगा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
इसके अलावा उपायुक्त महावीर कौशिक व प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को भी प्रतिलिपि भेजी गई है। पत्र के माध्यम से मरीजों ने बताया कि वे दोनों भाई डीएमडी बीमारी से ग्रस्त हैं। यह एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है।
उन्होंने बताया कि चिकित्सक के अनुसार वे दोनों भाई 18 से 20 साल ही जिंदा रह सकते हैं। लेकिन वे पिछले चार साल से अपने लिए जीवन रक्षक दवाई के लिए राज्य के मंत्रियों व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि दवा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में भी प्रार्थना की थी। कोर्ट ने फैसला उनके हक में सुनाते हुए 40 दिन के अंदर दवाई देने का आदेश दिया था। लेकिन केंद्र सरकार ने फैसले पर स्टे ले लिया और सुप्रीम कोर्ट चली गई। इसके अलावा राष्ट्रपति को भी पत्र लिख कर गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने पत्र के माध्यम से फिलहाल देश के प्रधानमंत्री से दवाई लेने के लिए गुहार लगाई है।
दोनों भाइयों के लिए हमारे स्तर पर जो सहायता थी, वो कर चुके हैं। इसके बाद की प्रक्रिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की होती है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जांच कर ऐसे मरीजों को सर्टिफिकेट देती है। - डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
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इसके अलावा उपायुक्त महावीर कौशिक व प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को भी प्रतिलिपि भेजी गई है। पत्र के माध्यम से मरीजों ने बताया कि वे दोनों भाई डीएमडी बीमारी से ग्रस्त हैं। यह एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है।
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उन्होंने बताया कि चिकित्सक के अनुसार वे दोनों भाई 18 से 20 साल ही जिंदा रह सकते हैं। लेकिन वे पिछले चार साल से अपने लिए जीवन रक्षक दवाई के लिए राज्य के मंत्रियों व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि दवा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में भी प्रार्थना की थी। कोर्ट ने फैसला उनके हक में सुनाते हुए 40 दिन के अंदर दवाई देने का आदेश दिया था। लेकिन केंद्र सरकार ने फैसले पर स्टे ले लिया और सुप्रीम कोर्ट चली गई। इसके अलावा राष्ट्रपति को भी पत्र लिख कर गुहार लगा चुके हैं। उन्होंने पत्र के माध्यम से फिलहाल देश के प्रधानमंत्री से दवाई लेने के लिए गुहार लगाई है।
दोनों भाइयों के लिए हमारे स्तर पर जो सहायता थी, वो कर चुके हैं। इसके बाद की प्रक्रिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की होती है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जांच कर ऐसे मरीजों को सर्टिफिकेट देती है। - डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।