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सरपंची को लेकर 2017 में हुआ था बड़ेसरा में हत्याकांड, अब 65 वर्षीय भूप सिंह वहां 1122 वोटों से जीत सरपंच बने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2022 10:33 PM IST
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There was a massacre in Badesara in 2017 regarding Sarpanchi, now 65-year-old Bhup Singh won by 1122 votes as Sarpanch
13 फोटो गांव बडेसरा के सरपंच बने भूपसिंह का स्वागत करते ग्रामीण। विज्ञप्ति - फोटो : Bhiwani
भिवानी। सरपंच के खिलाफ आरटीआई से साल 2017 में बड़ेसरा गांव में एक के बाद एक पांच हत्याओं की वारदातों को अंजाम दिया गया था। लेकिन इस बार वहां शांतिपूर्वक चुनाव हुआ और 65 वर्षीय भूप सिंह 1122 मतों से विजयी होकर सरपंच चुने गए। बहुचर्चित बड़सेरा हत्याकांड सामने आने के बाद ही ये गांव सुर्खियों में आ गया था। यहां पर सरपंची की चुनावी रंजिश के चलते ही पांच हत्याएं हुई थीं। इसके बाद से आज तक गांव में पुलिस का कड़ा पहरा है।
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इस बार पंचायत चुनावों में बड़ेसरा में भी काफी रोचक मुकाबला बना। बबलू पूर्व सरपंच के चाचा भूप सिंह 1122 मतों से जीतकर इस बार सरपंच बने हैं। उनकी जीत पर गांव में जश्न का माहौल बना। भूप सिंह ने कहा कि गांव में सभी लोगों को साथ लेकर विकास के काम कराएंगे। गांव की मूलभूत समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निदान कराएंगे। जिले का गांव बड़ेसरा सरपंची के चुनावों की रंजिश में हुई हत्याओं के बाद से काफी संवेदनशील गांव बना है। यहां पर कई बार हत्या प्रयास की भी कोशिशें हो चुकी है। इसी वजह से गांव में पुलिस की एक अस्थायी छावनी भी बनी हैं, जहां पर चौबीसों घंटे पुलिस की तैनाती दी हुई है। क्योंकि गांव में अब भी दो वर्ग ऐसे हैं, जिनकी चुनावी रंजिश की वजह से दुश्मनी चली आ रही है।
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ये था बड़ेसरा हत्याकांड का विवाद
बड़ेसरा निवासी बलजीत ने साल 2017 में महिला सरपंच सुदेश के खिलाफ एक आरटीआई लगाई थी। इसमें उसकी दसवीं कक्षा की मार्कशीट फर्जी पाई गई थी। तब से दो पक्षों के बीच रंजिश हो गई। उसके बाद बलजीत और उसके परिवार के पांच लोगों की हत्या की जा चुकी है। 2017 में बलजीत के चाचा भल्लेराम और ताऊ महेंद्र की गोली मारकर हत्या हुई थी। उसके बाद अक्तूबर 2019 में पूर्व सरपंच पवन की हत्या कर दी गई। 2017 में तिहरे हत्याकांड के मुख्य गवाह सूबे सिंह की भी जुलाई 2020 में तीन गोली मारकर उसी के घर के सामने उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद आपसी रंजिश में सदस्यों पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए हैं।
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