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Bhiwani News: दिवाली पर्व पर बाजारों में पानी वाले दीयों व फैंसी लाइटों की भरमार
Wed, 23 Oct 2024 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 23 Oct 2024 11:13 PM IST
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हुड्डा पार्क के समीप दुकान पर रखें पानी वाले दिये।
भिवानी। अहोई अष्टमी व्रत के ठीक एक सप्ताह बाद प्रकाश का त्योहार दिवाली आने वाला है। बाजारों में फैंसी लाइट, रंग बिरंगी लाइट, मिट्टी के दीयों के साथ पानी के दीयों की भी भरमार है। लोग मिट्टी के दीयों की जगह पानी के दीये खरीदना भी पसंद कर रहे हैं। शहर में जगह-जगह दीये व सजावटी लाइटों की स्टाल लग चुकी हैं।
दुकानदार नवीन, रमेश व मनीराम ने बताया कि दिवाली के दीये बनाने का काम एक महीने पहले शुरू कर दिया जाता है। हालांकि लोग डिजाइन वाले दीये लेना भी पसंद करते हैं। इसके अलावा मशीनों से तैयार दीये भी बाहर से मंगा कर बेचते हैं। इस समय मिट्टी के दीये सौ रुपये दर्जन के हिसाब से बेच रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार लोग मिट्टी की दीये छोड़ कर पानी वाले दीयों की मांग करने लगे हैं। जिससे उनकी मेहनत इस विज्ञान एवं तकनीकी भरे समय में फीकी पड़ रही है।
उनके अनुसार बड़ी कंपनियों में तैयार बैटरी पर आधारित पानी से चलने वाले दीये लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। महंगाई के जमाने में लोग तेल के पैसे बचाने के चक्कर में पानी के दीये खरीद रहे हैं। दुकानदारों ने लोगों से आह्वान किया की अपनी संस्कृति बचाने के लिए मिट्टी के दीयों का प्रयोग करें और उनका भी रोजगार बना रहे।
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पिछले 40 साल से दीये बेचने का काम करने वाली हांसी गेट निवासी रुक्मणि ने बताया कि दिवाली का त्योहार प्रकाश का त्योहार है। इस शुभ दिन में तेल के दीये जलाना घर में सुख शांति के लिए अच्छा माना जाता है। लेकिन आजकल चमक दमक भरे इस माहौल में लाइटों से घर की सजावट करना पसंद करते हैं। लोग अपनी सुविधानुसार पानी के दीये प्रयोग कर रहे हैं।
दुकानदार प्रियांशु ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से पानी के दीये बेचने के लिए मंगवा रखे हैं। ये दीये प्लास्टिक के बनाए गए हैं। इनके अंदर बैटरी डाली गयी है। इसके अंदर एक लाइट लगाई गई है। जो पानी के संपर्क में आते ही दीये की भांति जलना शुरू हो जाते हैं। इन दीयों की खास बात ये है कि आप इन्हें दिवाली पर्व मनाने के बाद भविष्य में प्रयोग करने के लिए सुरक्षित रख सकते हैं। बाजार में इनकी कीमत 15 रुपये से ले कर 150 रुपये दर्जन तक बेचे जा रहे हैं।
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दुकानदार नवीन, रमेश व मनीराम ने बताया कि दिवाली के दीये बनाने का काम एक महीने पहले शुरू कर दिया जाता है। हालांकि लोग डिजाइन वाले दीये लेना भी पसंद करते हैं। इसके अलावा मशीनों से तैयार दीये भी बाहर से मंगा कर बेचते हैं। इस समय मिट्टी के दीये सौ रुपये दर्जन के हिसाब से बेच रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार लोग मिट्टी की दीये छोड़ कर पानी वाले दीयों की मांग करने लगे हैं। जिससे उनकी मेहनत इस विज्ञान एवं तकनीकी भरे समय में फीकी पड़ रही है।
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उनके अनुसार बड़ी कंपनियों में तैयार बैटरी पर आधारित पानी से चलने वाले दीये लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। महंगाई के जमाने में लोग तेल के पैसे बचाने के चक्कर में पानी के दीये खरीद रहे हैं। दुकानदारों ने लोगों से आह्वान किया की अपनी संस्कृति बचाने के लिए मिट्टी के दीयों का प्रयोग करें और उनका भी रोजगार बना रहे।
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पिछले 40 साल से दीये बेचने का काम करने वाली हांसी गेट निवासी रुक्मणि ने बताया कि दिवाली का त्योहार प्रकाश का त्योहार है। इस शुभ दिन में तेल के दीये जलाना घर में सुख शांति के लिए अच्छा माना जाता है। लेकिन आजकल चमक दमक भरे इस माहौल में लाइटों से घर की सजावट करना पसंद करते हैं। लोग अपनी सुविधानुसार पानी के दीये प्रयोग कर रहे हैं।
दुकानदार प्रियांशु ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से पानी के दीये बेचने के लिए मंगवा रखे हैं। ये दीये प्लास्टिक के बनाए गए हैं। इनके अंदर बैटरी डाली गयी है। इसके अंदर एक लाइट लगाई गई है। जो पानी के संपर्क में आते ही दीये की भांति जलना शुरू हो जाते हैं। इन दीयों की खास बात ये है कि आप इन्हें दिवाली पर्व मनाने के बाद भविष्य में प्रयोग करने के लिए सुरक्षित रख सकते हैं। बाजार में इनकी कीमत 15 रुपये से ले कर 150 रुपये दर्जन तक बेचे जा रहे हैं।