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Bhiwani News: अधिवक्ता की भूमि का फर्जी मालिक बन फर्जी रजिस्ट्री मामले में फंसे तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी और रजिस्ट्री क्लर्क

Sat, 10 Jan 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sat, 10 Jan 2026 01:28 AM IST
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The then District Revenue Officer and Registry Clerk were caught in a fake registry case by becoming the fake owner of the advocate's land
भिवानी। आधार कार्ड में असल मालिक का फोटो बदलकर अधिवक्ता अजय सर्राफ की करीब आधा एकड़ बेशकीमती कृषि भूमि की फर्जी रजिस्ट्री कराने के मामले में अब तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी और रजिस्ट्री क्लर्क सहित नंबरदार भी फंस गए हैं। सिविल लाइन पुलिस थाना में आरोपियों सहित तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी, भूमि रजिस्ट्री क्लर्क, नंबरदार और तस्दीक करने वाले अधिवक्ता सहित दस नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि अभी तक फर्जी भूमि बिक्री घोटाले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में अधिवक्ता अजय सर्राफ की गांव नौरंगाबाद नेशनल हाईवे पर करीब 15 कनाल यानी आधा एकड़ भूमि को फर्जी मालिक बनाकर बेचने के मामले में तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी राजकुमार भौरिया, जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय के तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क तेजपाल और विपिन महता का नाम भी प्राथमिकी में शामिल किया गया है। फर्जी भूमि बिक्री मामले में अजय कुमार, सोमबीर, चंद्रपाल, लीलूराम नंबरदार, अनूप सिंह अधिवक्ता, कुलदीप और रश्मी सहित अन्य को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी के नाम पुलिस ने प्राथमिकी में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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फर्जी भूमि घोटाले में भूमि को बेचने के गिरोह के तौर पर भी देखा जा रहा है। शिकायतकर्ता अजय सर्राफ ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी और रजिस्ट्री क्लर्क जानबूझकर फर्जी लोगों द्वारा भूमि बेचने की प्रक्रिया में शामिल हुए। इसके बाद भूमि का फर्जी तरीके से इंतकाल दर्ज कराने का भी प्रयास किया गया।
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इस बारे में सिविल लाइन थाने के एसएचओ देवेंद्र कुमार ने बताया कि थाने में अधिवक्ता अजय सर्राफ की करीब आधा एकड़ भूमि को फर्जी मालिक बनाकर बेचे जाने के मामले में तत्कालीन जिला राजस्व अधिकारी, तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क सहित दस नामजद और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लेगी।

अब सीसीटीवी फुटेज से खुलेंगे आरोपियों के राज
फर्जी मालिक बनकर भूमि बेचने के इस मामले में पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करेगी। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी भूमि को गलत तरीके से फर्जी लोगों द्वारा बेचने के लिए जिला राजस्व अधिकारी और तहसील कार्यालय में फोटो खिंचवाए गए। इन सभी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। सरल केंद्र में भी आरोपियों ने गलत दस्तावेजों की तस्दीक कराई थी। पुलिस ने सभी जगहों की फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच करने की गुजारिश की है।


ऐसे किया गया फर्जी भूमि बिक्री का घोटाला
भूमि के असल मालिक अजय सर्राफ के आधार कार्ड में उनका नाम ‘अजय कुमार’ और पिता का नाम ‘ओमप्रकाश’ दर्ज है। फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले आरोपी ने इसी नाम की समानता का फायदा उठाते हुए अजय के आधार में अपना फोटो लगवा लिया और तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री कराते समय अपनी तस्वीर खिंचवा कर असल मालिक बन बैठा। इस कथित मिलीभगत का फायदा उठाकर आरोपी ने अजय की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करा दी। जब अजय को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने देखा कि दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गई है और उनकी जगह कोई और फोटो खिंचवाकर भूमि बेच चुका है। इसके बाद अजय ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। प्रारंभिक जांच आर्थिक अपराध शाखा द्वारा कराई गई और फिर सिविल लाइन पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।
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