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Bhiwani News: भिवानी-घग्गर ड्रेन में क्षमता से पांच गुना अधिक बरसाती पानी निकासी का दबाव
Mon, 04 Aug 2025 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 04 Aug 2025 11:32 PM IST
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गांव दांग खुर्द में फिर ओवरफ्लो हुई भिवानी घग्घर ड्रेन।
भिवानी। भिवानी-घग्गर ड्रेन में इसकी क्षमता से पांच गुना अधिक बरसाती पानी पहुंचने से पूरा तंत्र बेबस हो गया है। ड्रेन की हालत यह है कि किनारे टूटने लगे हैं और पानी की निकासी बंद हो गई है। जिले के ढाई हजार एकड़ से अधिक खेतों में जलभराव हो चुका है लेकिन सिंचाई विभाग चाहकर भी इसकी निकासी नहीं करा पा रहा। ड्रेन अब पानी को आगे नहीं ले जा रही जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
भिवानी-घग्गर ड्रेन की वहन क्षमता 65 से 100 क्यूसेक के बीच है लेकिन इन दिनों इसमें 500 क्यूसेक से अधिक पानी का दबाव है। यही वजह है कि खेतों से निकासी संभव नहीं हो पा रही। अधिकारी फिलहाल गांवों की आबादी और सार्वजनिक स्थलों में घुसे पानी की निकासी में ही उलझे हैं। खेतों की बात करें तो वहां जमा पानी अक्तूबर के अंत तक खाली हो पाएगा।
यह ड्रेन भिवानी से शुरू होकर हिसार के कंवारी गांव तक करीब 43 किलोमीटर लंबी है। इसके जरिये शहर और आसपास के गांवों का दूषित पानी निकाला जाता है लेकिन अब खेत, जोहड़ और अन्य जल स्रोत भी ओवरफ्लो होकर इसी ड्रेन में आ गए हैं। जिले की नहरों में भी निकासी कराई जा रही है लेकिन मोहला हेड से अतिरिक्त पानी पहले ही मुसीबत बन चुका है जिससे नहरें पहले से लबालब हैं।
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स्थिति यह है कि न नहरों में और पानी लिया जा सकता है, न ड्रेन में पानी को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस ड्रेन से गांव धनाना, पुर, सिवाड़ा, जताई, रामूपुरा, बलियाली, दांग खुर्द, दांग कलां, तिगड़ाना, प्रेमनगर सहित अनेक गांव जुड़े हैं। इन गांवों में खेतों में फसलें नहीं बल्कि बरसाती पानी लबालब भरा हुआ है। किसानों की चिंता अब केवल फसलों की बर्बादी तक सीमित नहीं रही बल्कि खेतों से पानी निकलवाने की चुनौती और बड़ी हो गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता गांवों की आबादी से पानी निकालने की है। खेतों से पानी की निकासी में अभी दो माह तक का समय लग सकता है। ऐसे में प्रभावित किसानों को लंबे इंतजार के लिए तैयार रहना होगा।
भिवानी-घग्गर ड्रेन पहले से ही ओवरफ्लो चल रही है। इसमें अब खेतों के पानी की निकासी संभव नहीं है। हमारी प्राथमिकता है कि गांवों की आबादी तक बरसाती पानी न पहुंचे, इसके प्रबंध जुटाना है। हालांकि नहरों में पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है। दो दिन बाद ड्रेन से भी पानी की निकासी का काम शुरू कराएंगे। फिलहाल कुछ नई जगहों पर भी पंप लगाए जा रहे हैं। - जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, भिवानी वाटर सर्विसेज, सिंचाई विभाग
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भिवानी-घग्गर ड्रेन की वहन क्षमता 65 से 100 क्यूसेक के बीच है लेकिन इन दिनों इसमें 500 क्यूसेक से अधिक पानी का दबाव है। यही वजह है कि खेतों से निकासी संभव नहीं हो पा रही। अधिकारी फिलहाल गांवों की आबादी और सार्वजनिक स्थलों में घुसे पानी की निकासी में ही उलझे हैं। खेतों की बात करें तो वहां जमा पानी अक्तूबर के अंत तक खाली हो पाएगा।
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यह ड्रेन भिवानी से शुरू होकर हिसार के कंवारी गांव तक करीब 43 किलोमीटर लंबी है। इसके जरिये शहर और आसपास के गांवों का दूषित पानी निकाला जाता है लेकिन अब खेत, जोहड़ और अन्य जल स्रोत भी ओवरफ्लो होकर इसी ड्रेन में आ गए हैं। जिले की नहरों में भी निकासी कराई जा रही है लेकिन मोहला हेड से अतिरिक्त पानी पहले ही मुसीबत बन चुका है जिससे नहरें पहले से लबालब हैं।
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स्थिति यह है कि न नहरों में और पानी लिया जा सकता है, न ड्रेन में पानी को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस ड्रेन से गांव धनाना, पुर, सिवाड़ा, जताई, रामूपुरा, बलियाली, दांग खुर्द, दांग कलां, तिगड़ाना, प्रेमनगर सहित अनेक गांव जुड़े हैं। इन गांवों में खेतों में फसलें नहीं बल्कि बरसाती पानी लबालब भरा हुआ है। किसानों की चिंता अब केवल फसलों की बर्बादी तक सीमित नहीं रही बल्कि खेतों से पानी निकलवाने की चुनौती और बड़ी हो गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता गांवों की आबादी से पानी निकालने की है। खेतों से पानी की निकासी में अभी दो माह तक का समय लग सकता है। ऐसे में प्रभावित किसानों को लंबे इंतजार के लिए तैयार रहना होगा।
भिवानी-घग्गर ड्रेन पहले से ही ओवरफ्लो चल रही है। इसमें अब खेतों के पानी की निकासी संभव नहीं है। हमारी प्राथमिकता है कि गांवों की आबादी तक बरसाती पानी न पहुंचे, इसके प्रबंध जुटाना है। हालांकि नहरों में पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है। दो दिन बाद ड्रेन से भी पानी की निकासी का काम शुरू कराएंगे। फिलहाल कुछ नई जगहों पर भी पंप लगाए जा रहे हैं। - जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, भिवानी वाटर सर्विसेज, सिंचाई विभाग