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पोस्टमार्टम के लिए नहीं मिला डॉक्टर, परिजनों ने की नारेबाजी
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Tue, 05 Apr 2016 11:46 PM IST
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BHIWANI
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भिवानी। सामान्य अस्पताल के डेड हाउस में मंगलवार को लाये दो शवों के पोस्टमार्टम के लिए परिजन घंटों इंतजार करते रहे मगर डाक्टर नहीं आया। खफा परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, मंत्रियों के भी फोन मिलाये। किसी का बंद मिला तो कोई मीटिंग में व्यस्त मिला। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद डाक्टर आए और दोपहर के समय शवों का पोस्टमार्टम हुआ। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर रोष जताया।
सोमवार को सिवानी में एसबीआई बैंक में कार्यरत करीब 48 वर्षीय कर्मचारी बलजीत सिंह की हृदयघात से मौत हो गई। वह मूलरूप से सिरसा के गांव मसीता का रहने वाला था। पुलिस व परिजन सोमवार देर सायं शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल लाये। तोशाम में भी एक युवक सुरेंद्र का शव संदिग्ध हालत में फंदे पर लटका मिला। पुलिस सोमवार सायं को ही शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल लाई।
परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस सुबह सवेरे ही कागजी कार्रवाई भी पूरी कर ली। शवों के पोस्टमार्टम के लिए सुबह साढ़े सात बजे ही मृतकों के परिजन व अन्य ग्रामीण शव गृह के पास नहीं आए। परिजनों ने 10 बजे तक चिकित्सक के आने का इंतजार किया मगर डाक्टर नहीं आए। इमरजेंसी में जाकर ड्यूटी वाले डाक्टर का नंबर लेकर मिलाया मगर किसी ने नहीं उठाया। इसके बाद परिजनों सिविल सर्जन से संपर्क साधा तो पहले उनसे भी बात नहीं हो पाई। उनके कार्यालय गए तो वहां मौजूद कर्मचारियों जल्द डाक्टर भेजने की बात कही। इसके बाद भी घंटेभर से अधिक समय तक डाक्टर नहीं आए। खफा मृतकों के परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, जनस्वास्थ्य मंत्री घनश्याम सर्राफा का भी फोन मिलाया मगर बात नहीं हो पाई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी। स्वास्थ्य विभाग अधिकारी हरकत में आए और पोस्टमार्टम के लिए डाक्टर को बुलाया गया। दोपहर 12 बजे के बाद ही शवों का पोस्टमार्टम हुआ।
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मामले में सिवानी थाना से एएसआई राजबीर सिंह ने बताया कि हमारी ओर से कागजात पूरे थे। डाक्टर किसी कारण लेट हुए, जिस कारण परिजनों ने रोष जताया।
दावे बेहतर व्यवस्था के, फ्रिजर तक खराब
दावे किए जा रहे है कि करोड़ों रुपये खर्च कर सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधा दी जा रही है और यहां न समय पर डाक्टर मिलते है और न ही अन्य व्यवस्थाएं। यह कहना है खानक से आए युवक बिजेंद्र का। अपने परिजन सुरेंद्र के शव का पोस्टमार्टम कराने आए युवक बिजेंद्र ने बताया कि वे सायं को शव पोस्टमार्टम के लिए लाए थे, तब का खुले में ही रखा है। यहां डेड हाउस का फ्रिजर तक खराब है। फ्रिजर पांच-छह साल से खराब है। जिस डाक्टर की ड्यूटी थे, उसके पास फोन किया मगर उठाया नहीं। दोबारा किया तो स्विच ऑफ कर लिया।
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सोमवार को सिवानी में एसबीआई बैंक में कार्यरत करीब 48 वर्षीय कर्मचारी बलजीत सिंह की हृदयघात से मौत हो गई। वह मूलरूप से सिरसा के गांव मसीता का रहने वाला था। पुलिस व परिजन सोमवार देर सायं शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल लाये। तोशाम में भी एक युवक सुरेंद्र का शव संदिग्ध हालत में फंदे पर लटका मिला। पुलिस सोमवार सायं को ही शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल लाई।
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परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस सुबह सवेरे ही कागजी कार्रवाई भी पूरी कर ली। शवों के पोस्टमार्टम के लिए सुबह साढ़े सात बजे ही मृतकों के परिजन व अन्य ग्रामीण शव गृह के पास नहीं आए। परिजनों ने 10 बजे तक चिकित्सक के आने का इंतजार किया मगर डाक्टर नहीं आए। इमरजेंसी में जाकर ड्यूटी वाले डाक्टर का नंबर लेकर मिलाया मगर किसी ने नहीं उठाया। इसके बाद परिजनों सिविल सर्जन से संपर्क साधा तो पहले उनसे भी बात नहीं हो पाई। उनके कार्यालय गए तो वहां मौजूद कर्मचारियों जल्द डाक्टर भेजने की बात कही। इसके बाद भी घंटेभर से अधिक समय तक डाक्टर नहीं आए। खफा मृतकों के परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, जनस्वास्थ्य मंत्री घनश्याम सर्राफा का भी फोन मिलाया मगर बात नहीं हो पाई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी। स्वास्थ्य विभाग अधिकारी हरकत में आए और पोस्टमार्टम के लिए डाक्टर को बुलाया गया। दोपहर 12 बजे के बाद ही शवों का पोस्टमार्टम हुआ।
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मामले में सिवानी थाना से एएसआई राजबीर सिंह ने बताया कि हमारी ओर से कागजात पूरे थे। डाक्टर किसी कारण लेट हुए, जिस कारण परिजनों ने रोष जताया।
दावे बेहतर व्यवस्था के, फ्रिजर तक खराब
दावे किए जा रहे है कि करोड़ों रुपये खर्च कर सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधा दी जा रही है और यहां न समय पर डाक्टर मिलते है और न ही अन्य व्यवस्थाएं। यह कहना है खानक से आए युवक बिजेंद्र का। अपने परिजन सुरेंद्र के शव का पोस्टमार्टम कराने आए युवक बिजेंद्र ने बताया कि वे सायं को शव पोस्टमार्टम के लिए लाए थे, तब का खुले में ही रखा है। यहां डेड हाउस का फ्रिजर तक खराब है। फ्रिजर पांच-छह साल से खराब है। जिस डाक्टर की ड्यूटी थे, उसके पास फोन किया मगर उठाया नहीं। दोबारा किया तो स्विच ऑफ कर लिया।