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जल के बिना किसी भी जीव का अस्तित्व संभव नहीं : सीजेएम
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आदर्श महिला महाविद्यालय में विश्व जल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते सीजेएम पवन कुमा
भिवानी। सीजेएम-कम-सचिव पवन कुमार की अध्यक्षता में आदर्श महिला महाविद्यालय में विश्व जल दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता अनुराधा खनगवाल तथा जनस्वास्थ्य विभाग से अशोक भाटी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण के महत्व को समझाना और आमजन को इस दिशा में जागरूक करना था। सीजेएम पवन कुमार ने कहा कि विश्व में जल दिवस बनाने का उद्देश्य पानी के महत्व व विवेकपूर्ण उपयोग के लिए जागरूकता फैलाई जा सके। जल ही जीवन है और इसके बिना किसी भी जीव का अस्तित्व संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि पानी की अनियंत्रित खपत और जल स्रोतों के दूषित होने से भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। पैनल अधिवक्ता अनुराधा खनगवाल ने जल संबंधी कानूनों और अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जल संरक्षण केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। जल का अपव्यय रोकने और समाज में इसके विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अशोक भाटी ने बताया कि पीने योग्य जल की उपलब्धता घट रही है और यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जल संकट विकराल रूप धारण कर सकता है। कार्यक्रम में छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे जल अपव्यय को रोकने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने और अपने परिवार व समाज में जल संरक्षण की आदतें विकसित करने के लिए प्रयास करेंगी। इस कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अल्का मित्तल, कार्यक्रम ऑफिसर डॉ. निशा शर्मा, डॉ. दीपू सैनी, डॉ. नूतन शर्मा, डॉ. निधि बूरा, डॉ. सुनंदा मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण के महत्व को समझाना और आमजन को इस दिशा में जागरूक करना था। सीजेएम पवन कुमार ने कहा कि विश्व में जल दिवस बनाने का उद्देश्य पानी के महत्व व विवेकपूर्ण उपयोग के लिए जागरूकता फैलाई जा सके। जल ही जीवन है और इसके बिना किसी भी जीव का अस्तित्व संभव नहीं है।
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उन्होंने कहा कि पानी की अनियंत्रित खपत और जल स्रोतों के दूषित होने से भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। पैनल अधिवक्ता अनुराधा खनगवाल ने जल संबंधी कानूनों और अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जल संरक्षण केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है, बल्कि हर नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। जल का अपव्यय रोकने और समाज में इसके विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अशोक भाटी ने बताया कि पीने योग्य जल की उपलब्धता घट रही है और यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जल संकट विकराल रूप धारण कर सकता है। कार्यक्रम में छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे जल अपव्यय को रोकने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने और अपने परिवार व समाज में जल संरक्षण की आदतें विकसित करने के लिए प्रयास करेंगी। इस कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अल्का मित्तल, कार्यक्रम ऑफिसर डॉ. निशा शर्मा, डॉ. दीपू सैनी, डॉ. नूतन शर्मा, डॉ. निधि बूरा, डॉ. सुनंदा मौजूद रहे।