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Bhiwani News: फर्जी प्रॉपर्टी आईडी घोटाले के बाद सख्ती, अब रजिस्ट्री दस्तावेजों से पहले कराना होगा अधिकारियों से सत्यापन
Wed, 23 Jul 2025 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 23 Jul 2025 01:18 AM IST
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भिवानी। शहरी क्षेत्र में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी के जरिये कराई गई भूमि रजिस्ट्री का घोटाला सामने आने के बाद भिवानी तहसील कार्यालय ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब रजिस्ट्री दस्तावेजों को दाखिल करने से पहले उन्हें संबंधित अधिकारियों से अनिवार्य रूप से सत्यापित कराना होगा।
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शहरी क्षेत्र में भूमि रजिस्ट्री कराने के लिए प्रयोग की जाने वाली प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) को नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता से तस्दीक कराना जरूरी होगा। इसके लिए अभियंता की बाकायदा मोहर भी दस्तावेज पर लगवानी होगी। इसी तरह रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ खरीदार और विक्रेता दोनों के सभी प्रमाणपत्र अब नोटरी पब्लिक से सत्यापित कराना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले इनकी स्वप्रमाणित प्रतियां भी मान्य होती थीं लेकिन अब बिना वैधानिक सत्यापन के दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
एमसी यूनिट की रजिस्ट्री के लिए मलकियत से संबंधित रिकॉर्ड के रूप में पूर्व में पंजीकृत रजिस्ट्री या कोर्ट द्वारा पारित डिक्री तहसील कार्यालय में दर्ज होनी चाहिए। साथ ही संबंधित भूमि की जमाबंदी व इंतकाल की प्रतियां भी हल्का पटवारी से सत्यापित करवाई जाएंगी। बता दें कि भिवानी तहसील कार्यालय में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से कराई गई कई रजिस्ट्री मामलों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो के पास भी लंबित है। इन मामलों में नगर परिषद व राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। घोटाले की परतें खुलने के बाद तहसील अधिकारियों ने अब अपनी जिम्मेदारी से बचाव के लिए भूमि रजिस्ट्री से संबंधित प्रक्रियाओं में कई अहम बदलाव कर दिए हैं ताकि आगे किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।
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गलत प्रॉपर्टी आईडी मामले की नगर परिषद के सीईओ को दी गई थी जांच
नगर परिषद कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से गलत प्रॉपर्टी आईडी के जरिए भूमि रजिस्ट्री कराए जाने के मामले की जांच नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को सौंपी गई थी जो फिलहाल चल रही है। इस जांच के दौरान नगर परिषद के प्रॉपर्टी आईडी शाखा से संबंधित कर्मचारियों को पूछताछ के लिए तलब भी किया गया है। घोटाले के उजागर होने के बाद नगर परिषद ने दोषी कर्मचारियों को उनके मूल पद से हटाकर अन्य कार्यों में तैनात कर दिया है। हालांकि अब भी शहरी क्षेत्र की प्रॉपर्टी आईडी के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जिला राजस्व अधिकारी की तरफ से भूमि रजिस्ट्री संबंधी प्रलेखों को पंजीकरण के लिए तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रलेखकों को सख्त हिदायतें जारी की गई हैं। जिनकी अनुपालना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया से भूमि रजिस्ट्री में प्रॉपर्टी आईडी सहित अन्य दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित अधिकारियों से कराना अनिवार्य किया गया है। इससे भूमि वसीका पंजीकरण में पहले से अधिक पारदर्शिता आएगी। - जयवीर सिंह, तहसीलदार, तहसील कार्यालय, भिवानी
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नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शहरी क्षेत्र में भूमि रजिस्ट्री कराने के लिए प्रयोग की जाने वाली प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) को नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता से तस्दीक कराना जरूरी होगा। इसके लिए अभियंता की बाकायदा मोहर भी दस्तावेज पर लगवानी होगी। इसी तरह रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ खरीदार और विक्रेता दोनों के सभी प्रमाणपत्र अब नोटरी पब्लिक से सत्यापित कराना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले इनकी स्वप्रमाणित प्रतियां भी मान्य होती थीं लेकिन अब बिना वैधानिक सत्यापन के दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
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एमसी यूनिट की रजिस्ट्री के लिए मलकियत से संबंधित रिकॉर्ड के रूप में पूर्व में पंजीकृत रजिस्ट्री या कोर्ट द्वारा पारित डिक्री तहसील कार्यालय में दर्ज होनी चाहिए। साथ ही संबंधित भूमि की जमाबंदी व इंतकाल की प्रतियां भी हल्का पटवारी से सत्यापित करवाई जाएंगी। बता दें कि भिवानी तहसील कार्यालय में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से कराई गई कई रजिस्ट्री मामलों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो के पास भी लंबित है। इन मामलों में नगर परिषद व राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। घोटाले की परतें खुलने के बाद तहसील अधिकारियों ने अब अपनी जिम्मेदारी से बचाव के लिए भूमि रजिस्ट्री से संबंधित प्रक्रियाओं में कई अहम बदलाव कर दिए हैं ताकि आगे किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।
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गलत प्रॉपर्टी आईडी मामले की नगर परिषद के सीईओ को दी गई थी जांच
नगर परिषद कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से गलत प्रॉपर्टी आईडी के जरिए भूमि रजिस्ट्री कराए जाने के मामले की जांच नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को सौंपी गई थी जो फिलहाल चल रही है। इस जांच के दौरान नगर परिषद के प्रॉपर्टी आईडी शाखा से संबंधित कर्मचारियों को पूछताछ के लिए तलब भी किया गया है। घोटाले के उजागर होने के बाद नगर परिषद ने दोषी कर्मचारियों को उनके मूल पद से हटाकर अन्य कार्यों में तैनात कर दिया है। हालांकि अब भी शहरी क्षेत्र की प्रॉपर्टी आईडी के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जिला राजस्व अधिकारी की तरफ से भूमि रजिस्ट्री संबंधी प्रलेखों को पंजीकरण के लिए तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रलेखकों को सख्त हिदायतें जारी की गई हैं। जिनकी अनुपालना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया से भूमि रजिस्ट्री में प्रॉपर्टी आईडी सहित अन्य दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित अधिकारियों से कराना अनिवार्य किया गया है। इससे भूमि वसीका पंजीकरण में पहले से अधिक पारदर्शिता आएगी। - जयवीर सिंह, तहसीलदार, तहसील कार्यालय, भिवानी