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Bhiwani News: पिता के कंधों पर सवार होकर बड़ेसरा का बेटा बना मुक्केबाजी का सिकंदर

Sat, 15 Jun 2024 10:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sat, 15 Jun 2024 10:46 PM IST
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Riding on the shoulders of his father, Badesara's son became the sikander of boxing.
 बिजेंद्र
भिवानी। पिता की उंगली पकड़कर ही हर बेटा अपने जीवन के लक्ष्य को पाने का ख्वाब देखता है। लेकिन ये ख्वाब हर कोई नहीं जी पाता है। ऐसा ही एक पिता गांव बड़ेसरा का किसान बिजेंद्र है, जिसके कंधों पर सवार होकर बेटे ने मुक्केबाजी के सिकंदर बनने का सफर तय किया। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज सिकंदर एशियन और जूनियर वर्ल्ड चैपिंयनशिप में ब्रॉन्ज मेडल विजेता बन चुका है। जबकि बिजेंद्र के भतीजी प्रीति पंवार पेरिस ओलंपिक का कोटा पा चुकी है। इन दोनों को ही बिजेंद्र हर रोज गांव से भिवानी में भारतीय खेल प्राधिकरण साई प्रशिक्षण केंद्र तक खेल अभ्यास के लिए लाता और वापस घर ले जाता था।
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गांव बड़ेसरा निवासी बिजेंद्र ने बताया कि वह गांव में ही खेतीबाड़ी करता है। उसके दो बच्चे हैं, बड़ी बेटी नेना और छोटा सिकंदर है। सिकंदर जब नौ साल का था तभी से वह उसे भारतीय खेल प्राधिकरण में मुक्केबाजी खेल अभ्यास के लिए रोजाना यहां लाता और वापस घर ले जाता रहा है। वह अपनी आंखों के सामने ही बेटे का खेल में अभ्यास के दौरान हौंसला बढ़ाता रहा है। उसकी भतीजी प्रीति पंवार भी सिकंदर के साथ यहां खेल अभ्यास के लिए आती थी। अंतर राष्ट्रीय महिला मुक्केबाज प्रीति पंवार को हाल ही में पेरिस ओलंपिक कोटा में क्वालीफाई करने का भी मौका मिला है। जबकि सिकंदर जूनियर वर्ल्ड और एशियन चैंपियनशिप में पदक विजेता बना है।
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बिजेंद्र ने कहा कि हर पिता का सपना होता है कि उसकी संतान उन्नति करे और खूब नाम कमाए। सिकंदर ने उसकी आशाओं के अनुरूप ही खेल जगत में नाम कमाया है। वहीं सिकंदर भी अपने पिता के साथ लगातार सात सालों से साई प्रशिक्षण केंद्र में खेल अभ्यास के लिए रोजाना आता और वापस घर जाता रहा है। सिकंदर का कहना है कि उसकी कामयाबी में उसके पिता बिजेंद्र का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने ही उंगली पकड़कर खेल के रिंग तक पहुंचाया है।
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