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Bhiwani News: बाजरे की बंपर पैदावार पर मंडी भाव ने फेरा पानी
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भिवानी मंडी में बाजरा की आवक के बाद झराई करते मजदूर।
भिवानी। मानसून की बेरुखी और कम बारिश के बावजूद जिले में बाजरे की बंपर पैदावार हुई है। मंडियों में आवक शुरू हो गई है लेकिन सरकारी खरीद और भावांतर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
खुली मंडी में बाजरा 2250 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे किसानों को एमएसपी के मुकाबले 600 से 650 रुपये प्रति क्विंटल तक कम भाव मिल रहा है। जिला मुख्यालय की मंडी में अब तक 2500 क्विंटल से अधिक बाजरा पहुंच चुका है।
‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पर जिले में खरीफ फसल के लिए चार लाख छह हजार एकड़ भूमि का पंजीकरण हो चुका है। करीब 75 हजार किसान पंजीकृत दायरे में आ चुके हैं और पंजीकरण का क्रम अब भी जारी है। कुछ किसान बाजरा कटाई में जुटे हैं, जबकि फसल निकाल चुके किसान मंडियों का रुख कर रहे हैं।
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जिले की नौ मंडियों में पिछले साल हेफेड और एचएसडब्ल्यूसी को बाजरा खरीद के लिए अधिकृत किया गया था। हालांकि अधिकांश किसानों को भावांतर का ही लाभ मिला था। इस बार खरीद एजेंसियों के अधिकारी भी असमंजस में हैं कि सरकारी खरीद होगी या भावांतर दिया जाएगा।
किसानों की चिंता यह है कि यदि मंडी में कम भाव मिला और भावांतर भी स्पष्ट नहीं हुआ तो एमएसपी का लाभ कैसे मिलेगा। पिछले सीजन में 60 लाख 40 हजार क्विंटल बाजरा मंडियों में पहुंचा था। इस बार मंडियों में किसानों की ढेरियां लगने लगी हैं लेकिन सरकारी खरीदार नजर नहीं आ रहे हैं।
आढ़तियों की ओर से भी किसानों को अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसान निजी बोली पर बाजरा बेचने को मजबूर हैं। वहीं रबी सीजन की बिजाई का समय नजदीक होने के कारण किसान ज्यादा इंतजार करने की स्थिति में भी नहीं हैं।
राजस्थान सीमांत इलाके से भी बाजरा की आवक की आशंका
जिले के बहल, लोहारू, ढिगावामंडी और जूई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बाजरा उत्पादन होता है। राजस्थान के सीमांत इलाकों में भी किसान बाजरा उगाते हैं। ऐसे में सीमांत क्षेत्र का बाजरा भी जिले की मंडियों में पहुंचने की आशंका है।
यह आशंका उस समय बढ़ जाती है जब सरकार भावांतर का लाभ देती है। कम उत्पादन वाले कुछ किसान भी अधिक बाजरा बिक्री दिखाकर भावांतर लेने की कोशिश करते हैं। इस तरह की गड़बड़ी पहले भी सामने आ चुकी है।
सरकार ने बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है लेकिन अभी तक खरीद शुरू नहीं हुई है। किसान सरकारी खरीद के इंतजार में मंडियों में बाजरा निजी बोली पर बेचकर लौट रहे हैं। अगर सरकार भावांतर का लाभ भी देती है तो यह 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक होना चाहिए। -जयराम किसान ढिगावामंडी
बाजरे की फसल के लिए हर बार मंडी में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी एमएसपी तो कभी भावांतर की राशि को लेकर उनकी परेशानी कम नहीं होती। मैंने भी करीब दस एकड़ में बाजरा लगाया है। आढ़ती से फोन पर बात की तो 2250 रुपये प्रति क्विंटल का खुली बोली का भाव बताया गया। -संजय किसान बडदुजोगी
एमएसपी पर बाजरा बेच पाना किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है। अभी मंडी में केवल निजी बोली पर ही बाजरे का गेट पास मिल रहा है। सरकारी एजेंसियां मंडियों से गायब हैं और खरीद को लेकर कोई अधिकारी स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा। आखिर किसान कितने दिन इंतजार करेगा। -उदयभान पायल, किसान
किसानों के बाजरा में 12 से 13 फीसदी नमी है। इस बार ज्यादा बारिश नहीं हुई इसलिए बाजरे का रंग भी ठीक है। इसके बावजूद मंडी में खरीद को लेकर संशय बना हुआ है। किसान खरीफ फसल बेचकर रबी सीजन की बिजाई की तैयारी कर रहे हैं। समय पर खरीद नहीं होगी तो भुगतान की उम्मीद भी नहीं रहेगी। -सूबे सिंह किसान
भले ही सरकार हर बार बाजरे का एमएसपी बढ़ाकर जारी करती है लेकिन मंडी में किसानों का बाजरा कम भाव पर बिकता है। मेहनत के बाद भी किसान को पूरी कीमत नहीं मिल रही है। बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होने से भावांतर के भुगतान को लेकर भी संशय बना हुआ है। -राजकुमार किसान
जिले भर में बाजरा खरीद के लिए नौ मंडियां निर्धारित हैं। एक अक्तूबर से बाजरे की खरीद का शेड्यूल है। एचएसडब्ल्यूसी के माध्यम से बाजरे की खरीद होनी है या भावांतर मिलेगा अभी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। बाजरे की खरीद को लेकर संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। नोडल एजेंसी खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग बाजरा खरीद पर निगरानी रखेगा। -अपार तिवारी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, भिवानी।
पिछली बार किसानों को 575 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर का लाभ मिला था। इस बार एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल है और फिलहाल मंडी में बाजरा 2250 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। ऐसे में एमएसपी और मंडी भाव के बीच 600 रुपये से अधिक का अंतर है। किसानों का बाजरा भावांतर पर खरीदा जाएगा या सरकारी एजेंसी खरीद करेगी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आढ़ती भी असमंजस में हैं। -भूरु बंसल, प्रधान दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, नई अनाज मंडी भिवानी।
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खुली मंडी में बाजरा 2250 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे किसानों को एमएसपी के मुकाबले 600 से 650 रुपये प्रति क्विंटल तक कम भाव मिल रहा है। जिला मुख्यालय की मंडी में अब तक 2500 क्विंटल से अधिक बाजरा पहुंच चुका है।
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‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पर जिले में खरीफ फसल के लिए चार लाख छह हजार एकड़ भूमि का पंजीकरण हो चुका है। करीब 75 हजार किसान पंजीकृत दायरे में आ चुके हैं और पंजीकरण का क्रम अब भी जारी है। कुछ किसान बाजरा कटाई में जुटे हैं, जबकि फसल निकाल चुके किसान मंडियों का रुख कर रहे हैं।
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जिले की नौ मंडियों में पिछले साल हेफेड और एचएसडब्ल्यूसी को बाजरा खरीद के लिए अधिकृत किया गया था। हालांकि अधिकांश किसानों को भावांतर का ही लाभ मिला था। इस बार खरीद एजेंसियों के अधिकारी भी असमंजस में हैं कि सरकारी खरीद होगी या भावांतर दिया जाएगा।
किसानों की चिंता यह है कि यदि मंडी में कम भाव मिला और भावांतर भी स्पष्ट नहीं हुआ तो एमएसपी का लाभ कैसे मिलेगा। पिछले सीजन में 60 लाख 40 हजार क्विंटल बाजरा मंडियों में पहुंचा था। इस बार मंडियों में किसानों की ढेरियां लगने लगी हैं लेकिन सरकारी खरीदार नजर नहीं आ रहे हैं।
आढ़तियों की ओर से भी किसानों को अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसान निजी बोली पर बाजरा बेचने को मजबूर हैं। वहीं रबी सीजन की बिजाई का समय नजदीक होने के कारण किसान ज्यादा इंतजार करने की स्थिति में भी नहीं हैं।
राजस्थान सीमांत इलाके से भी बाजरा की आवक की आशंका
जिले के बहल, लोहारू, ढिगावामंडी और जूई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बाजरा उत्पादन होता है। राजस्थान के सीमांत इलाकों में भी किसान बाजरा उगाते हैं। ऐसे में सीमांत क्षेत्र का बाजरा भी जिले की मंडियों में पहुंचने की आशंका है।
यह आशंका उस समय बढ़ जाती है जब सरकार भावांतर का लाभ देती है। कम उत्पादन वाले कुछ किसान भी अधिक बाजरा बिक्री दिखाकर भावांतर लेने की कोशिश करते हैं। इस तरह की गड़बड़ी पहले भी सामने आ चुकी है।
सरकार ने बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है लेकिन अभी तक खरीद शुरू नहीं हुई है। किसान सरकारी खरीद के इंतजार में मंडियों में बाजरा निजी बोली पर बेचकर लौट रहे हैं। अगर सरकार भावांतर का लाभ भी देती है तो यह 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक होना चाहिए। -जयराम किसान ढिगावामंडी
बाजरे की फसल के लिए हर बार मंडी में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कभी एमएसपी तो कभी भावांतर की राशि को लेकर उनकी परेशानी कम नहीं होती। मैंने भी करीब दस एकड़ में बाजरा लगाया है। आढ़ती से फोन पर बात की तो 2250 रुपये प्रति क्विंटल का खुली बोली का भाव बताया गया। -संजय किसान बडदुजोगी
एमएसपी पर बाजरा बेच पाना किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है। अभी मंडी में केवल निजी बोली पर ही बाजरे का गेट पास मिल रहा है। सरकारी एजेंसियां मंडियों से गायब हैं और खरीद को लेकर कोई अधिकारी स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहा। आखिर किसान कितने दिन इंतजार करेगा। -उदयभान पायल, किसान
किसानों के बाजरा में 12 से 13 फीसदी नमी है। इस बार ज्यादा बारिश नहीं हुई इसलिए बाजरे का रंग भी ठीक है। इसके बावजूद मंडी में खरीद को लेकर संशय बना हुआ है। किसान खरीफ फसल बेचकर रबी सीजन की बिजाई की तैयारी कर रहे हैं। समय पर खरीद नहीं होगी तो भुगतान की उम्मीद भी नहीं रहेगी। -सूबे सिंह किसान
भले ही सरकार हर बार बाजरे का एमएसपी बढ़ाकर जारी करती है लेकिन मंडी में किसानों का बाजरा कम भाव पर बिकता है। मेहनत के बाद भी किसान को पूरी कीमत नहीं मिल रही है। बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होने से भावांतर के भुगतान को लेकर भी संशय बना हुआ है। -राजकुमार किसान
जिले भर में बाजरा खरीद के लिए नौ मंडियां निर्धारित हैं। एक अक्तूबर से बाजरे की खरीद का शेड्यूल है। एचएसडब्ल्यूसी के माध्यम से बाजरे की खरीद होनी है या भावांतर मिलेगा अभी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। बाजरे की खरीद को लेकर संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। नोडल एजेंसी खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग बाजरा खरीद पर निगरानी रखेगा। -अपार तिवारी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, भिवानी।
पिछली बार किसानों को 575 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर का लाभ मिला था। इस बार एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल है और फिलहाल मंडी में बाजरा 2250 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। ऐसे में एमएसपी और मंडी भाव के बीच 600 रुपये से अधिक का अंतर है। किसानों का बाजरा भावांतर पर खरीदा जाएगा या सरकारी एजेंसी खरीद करेगी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आढ़ती भी असमंजस में हैं। -भूरु बंसल, प्रधान दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, नई अनाज मंडी भिवानी।