कांग्रेस में बगावती तेवर: रामकिशन फौजी के समर्थक बोले- बवानीखेड़ा से बाहरी प्रत्याशी को उतारा तो होगा विरोध
विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट कटने के बाद राज्यमंत्री बिशंबर वाल्मीकि और पूर्व विधायक शशिरंजन परमार ने बागी रुख अख्तियार कर लिया है। इस बीच रूठों को मनाने के लिए भाजपा आलाकमान सक्रिय हो गया है।
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बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व सीपीएस व तीन बार के विधायक रामकिशन फौजी की टिकट कटने की सोशल मीडिया पर चल रहीं चर्चाओं के बीच गहमागहमी बढ़ गई है। इस मसले पर फौजी के निवास पर हुई महापंचायत में समर्थकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 8 सितंबर को दिल्ली कूच कर हाईकमान से सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के बारे में चर्चा करेंगे। फौजी समर्थकों ने एक सुर में कहा कि अगर बवानीखेड़ा हलका से पार्टी किसी बाहरी उम्मीदवार को लाती है तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
महापंचायत में बवानीखेड़ा युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष विकास कुमार ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, हरियाणा मांगे हिसाब यात्रा, पार्टी के हाथ से हाथ जोड़ो अभियान में रामकिशन फौजी व उनके कार्यकर्ताओं की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि रामकिशन फौजी बवानीखेड़ा से बहुत ही कम अंतर से दो बार हार हुई है।
ऐसे में रामकिशन फौजी के पार्टी के प्रति समर्पण को देखते हुए उनकी टिकट पर संशय होना कार्यकर्ताओं के बीच रोष का विषय है। इस दौरान सभी फौजी समर्थकों ने एक सुर में कहा कि रविवार को हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता अपने भोजन, वस्त्र व रहने की व्यवस्था के साथ दिल्ली कूच करेंगे। पार्टी हाईकमान से रामकिशन फौजी के लिए टिकट लेकर ही लौटेंगे।
राज्यमंत्री बिशंबर वाल्मीकि और पूर्व विधायक परमार ने दिल्ली में डेरा डाला
विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट कटने के बाद राज्यमंत्री बिशंबर वाल्मीकि और पूर्व विधायक शशिरंजन परमार ने बागी रुख अख्तियार कर लिया है। इस बीच रूठों को मनाने के लिए भाजपा आलाकमान सक्रिय हो गया है। भाजपा आलाकमान के समक्ष राज्यमंत्री और परमार ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
बवानीखेड़ा से लगातार दो बार विधायक रह चुके बिशंबर वाल्मीकि प्रदेश में राज्यमंत्री भी हैं, लेकिन इस बार उन्हें चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया। इसी को लेकर उनके पैतृक गांव खरक में भी पंचायत हुई। इसमें ग्रामीणों ने उनके नाम का विरोध कर डाला और भाजपा के टिकट वितरण के निर्णय को सही बताया। वहीं, तोशाम से पिछले विधानसभा चुनाव में किरण चौधरी की टक्कर में चुनाव लड़ते हुए 56 हजार वोट लेने वाले पूर्व विधायक शशिरंजन परमार को भी तोशाम से टिकट नहीं मिलने का मलाल है।
शशिरंजन परमार के आवास पर शुक्रवार को कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बैठक भी बुलाई गई थी। इसमें यह निर्णय हुआ था कि आठ सितंबर को कैरू के बाबा मुंगीपा मंदिर में पंचायत बुलाई है, जिसमें वे आगे का फैसला लेंगे।
तोशाम और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों में इस बार टिकट वितरण में भाजपा ने पुराने चेहरों के बजाय नए चेहरों पर विश्वास जता चुनावी मैदान में उतारा है। हालांकि नए चेहरे मैदान में आने के बाद दिग्गज नेताओं के सुर भी खुद की पार्टी में ही बदल गए हैं। ऐसे में अब पार्टी के आलाकमान नेता भी उनकी मान मनोव्वल में जुटे हैं। दिल्ली में चल रही आलाकमान की मंथन बैठक में क्या नतीजा निकलेगा और इनको उसमें क्या आश्वासन मिलेगा यह भी भविष्य की राजनीति तय करेगा।