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Bhiwani News: बिजली कर्मचारियों का आंदोलन जारी 11 से 13 तक रहेगा ब्लैकआउट
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भिवानी में मांगों को लेकर धरने पर बैठ नारेबाजी करते बिजली कर्मचारी।
भिवानी। अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बिजली कर्मचारी लगातार पांचवें दिन बुधवार को भी आंदोलन पर डटे रहे। सीनियर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने सब-डिवीजन स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो 11, 12 और 13 अगस्त को प्रदेशभर में पूर्ण ब्लैकआउट कर बिजली आपूर्ति ठप की जाएगी जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन के दौरान सर्कल सेक्रेटरी मनोज ने कहा कि सरकार बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नूंह और गुरुग्राम में किसी समानांतर निजी कंपनी को बिजली वितरण का कार्य सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिसका कर्मचारी संगठन विरोध कर रहा है।
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उन्होंने एग्री डिस्कॉम नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इसे किसानों के हित में बता रही है लेकिन जिस व्यवस्था पर पहले ही करीब 5427 करोड़ रुपये का कर्ज लादा जा रहा है, वह किसानों और आम जनता के हित में कैसे हो सकती है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण से कर्मचारियों और उपभोक्ताओं दोनों पर असर पड़ेगा। कर्मचारियों ने एक्स-ग्रेशिया पॉलिसी का भी विरोध जताया और लंबित मांगों के जल्द समाधान की मांग की।
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कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो 11, 12 और 13 अगस्त को प्रदेशभर में पूर्ण ब्लैकआउट कर बिजली आपूर्ति ठप की जाएगी जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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प्रदर्शन के दौरान सर्कल सेक्रेटरी मनोज ने कहा कि सरकार बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नूंह और गुरुग्राम में किसी समानांतर निजी कंपनी को बिजली वितरण का कार्य सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिसका कर्मचारी संगठन विरोध कर रहा है।
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उन्होंने एग्री डिस्कॉम नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इसे किसानों के हित में बता रही है लेकिन जिस व्यवस्था पर पहले ही करीब 5427 करोड़ रुपये का कर्ज लादा जा रहा है, वह किसानों और आम जनता के हित में कैसे हो सकती है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण से कर्मचारियों और उपभोक्ताओं दोनों पर असर पड़ेगा। कर्मचारियों ने एक्स-ग्रेशिया पॉलिसी का भी विरोध जताया और लंबित मांगों के जल्द समाधान की मांग की।