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Bhiwani News: यासी कंपनी के सर्वे की खामियों का खामियाजा भुगत रहे लोग, 75 हजार प्रॉपर्टी का बिगड़ा टैक्स शेड्यूल
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रेलवे रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। यासी कंपनी के सर्वेक्षण की खामियों का खामियाजा अधिकांश शहरवासी भुगत रहे हैं। यासी कंपनी के सर्वे ने शहर की 75 हजार से अधिक प्रॉपर्टी के टैक्स भुगतान का शेड्यूल भी बिगाड़ दिया है, क्योंकि शहरी दायरे की प्रॉपर्टी में किसी की जगह पर कोई और ही मालिक बना दिया है, जबकि मालिक बदलने के साथ-साथ प्रॉपर्टी का दायरा भी घट-बढ़ गया है। इसकी वजह से कई लोगों को तो दस गुना ज्यादा हाउस टैक्स की रसीद भी थमाई जा रही है। अब ये लोग नगर परिषद कार्यालय की तरफ दौड़ लगा रहे हैं। इतना ही नहीं इस साल अब तक नगर परिषद के खजाने में 1,57,28,025 रुपये टैक्स जमा हो चुका है, जबकि करोड़ों का टैक्स अभी भी बकाया है। अधिकांश टैक्स भुगतान करने वाले लोग सिर्फ प्रॉपर्टी आईडी में त्रुटी और टैक्स भुगतान की रसीद में ज्यादा राशि दर्शाने की वजह से भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। नगर परिषद अधिकारियों ने जब रिकार्ड खंगाला तो 85 फीसदी प्रॉपर्टी में गड़बड़ी की आशंका भी सामने आई है वहीं दस्तावेज खंगालने के बाद ही लोगों के सामने अपनी प्रॉपर्टी के राज खुल रहे हैं। टैक्स भुगतान के साथ साथ शहर के 50 वर्गगज से लेकर 400 वर्गगज के मकानों में रहने वालों को भी 240 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक कूड़ा उठान का भुगतान भी जोड़कर भेजा जा रहा है, जबकि उनके घरों तक कोई कूड़ा उठाने आज तक नहीं आया है।
भिवानी शहर में 2018 में यासी कंपनी के माध्यम से शहरी मकानों का सर्वेक्षण का काम कराया गया था। करीब दो साल तक कंपनी सर्वे में ही उलझी रही और आखिरकार कंपनी ने नगर परिषद को सर्वेक्षण की आधी-अधूरी रिपोर्ट भी सौंप दी। यासी कंपनी ने नगर परिषद को करीब 75 हजार से अधिक प्रॉपर्टी की रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में अधिकांश प्रॉपर्टी में खामियां पाई र्गइं। सर्वे के चार साल बाद तक भी शहरवासी कंपनी की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। अब लोग टैक्स भुगतान नगर परिषद कार्यालय पहुंच रहे हैं तो उनके हाथों में लाखों का बकाया थमाया जा रहा है, जिसे देखकर वह भी हैरान हैं। अचरज यह भी है कि अधिकारी खुद सर्वे में खामी की बात कबूल रहे हैं, जबकि लोगों के टैक्स की गड़बड़ी या फिर उनकी प्रॉपर्टी आईडी को ठीक कराने के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। ऐसे में लोग भी दिनभर इधर-उधर घूमकर घर लौट रहे हैं। नगर परिषद के खाते में इस साल अब तक एक करोड़ 57 लाख 28 हजार 25 रुपये का हाउस टैक्स जमा हो चुका है, जबकि नगर परिषद के बकायादारी अब भी करीब 50 करोड़ से अधिक की खड़ी है। ऐसे में हाउस टैक्स छूट 31 दिसंबर तक दी गई है। मगर इसके बावजूद लोग चाहकर भी अपना हाउस टैक्स जमा नहीं करा पा रहे हैं।
ये है गृहकर के साथ कूड़ा उठान की राशि
50 से 100 वर्गगज मकान 240 रुपये सालाना
150 वर्गगज मकान 480 रुपये सालाना
200 वर्गगज मकान 600 रुपये सालाना
400 वर्गगज तक मकान 1200 रुपये सालाना
ये है प्रॉपर्टी टैक्स
300 वर्गगज तक 50 पैसे प्रति वर्गगज रुपये सालाना टैक्स है। 300 से 500 वर्गगज पर दो रुपये प्रति वर्गगज का टैक्स लग रहा है। हाउस टैक्स के अलावा कूड़ा उठान टैक्स व फायर टैक्स भी जोड़ा जा रहा है।
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साढ़े चार लाख की आबादी पर सिर्फ 15 टिपर ऑटो कर रहे कूड़ा उठान
शहर की करीब साढ़े चार लाख की आबादी और करीब 80 हजार घरों में सिर्फ 15 टिपर ऑटो ही कूड़ा उठान के लिए लगे हैं। इस लिहाज से शहर के 31 वार्डों में सिर्फ 15 वार्डों में ही टीपर ऑटो कूड़ा उठा रहे हैं, ये ऑटो भी घर-घर कूड़ा उठान के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, मगर नगर परिषद शहरवासियों से कूड़ा उठान के नाम का टैक्स जरूर वसूल रहा है। 16 नए टिपर ऑटो सिर्फ कंपनी के ज्यादा रेट में खरीद की वजह से नगर परिषद के हैंडओवर नहीं हुए हैं, ऐसे में नगर परिषद घर-घर कूड़ा उठान नहीं करा पा रही है। टैक्स की रसीद में कूड़ा उठान की कई सालों की राशि भी जोड़कर भेजी जा रही हैं, जिससे लोगों की सिरदर्द बढ़ गई है।
नगर परिषद ने बनाई आईटी सैल, छह कर्मचारी कर रहे समस्या समाधान
यासी कंपनी के सर्वे की त्रुटियों के साथ-साथ हाउस टैक्स में गड़बड़ी की शिकायतें लेकर आने वालों के लिए नगर परिषद ने अलग से आईटी सैल बनाया है। इसमें छह कर्मचारियों की तैनाती की गई है। फिलहाल आईटी सैल के कर्मचारी शहरी दायरे में यासी कंपनी के सर्वे में दर्शायी गई प्रॉपर्टी और नगर परिषद रिकार्ड की प्रॉपर्टी का मिलान भी कर रही है। जिन लोगों की इन मुद्दों से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके भी निशुल्क ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।
यासी कंपनी के सर्वे में दर्शायी गई प्रॉपर्टी का नगर परिषद रिकार्ड से मिलान किया जा रहा है। इसी के साथ जिन लोगों की प्रॉपर्टी आईडी में त्रुटी है या फिर हाउस टैक्स से जुड़ी कोई समस्या है, उसके लिए अलग से आईटी सैल बनाया है। इसमें कर्मचारी लोगों की ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। रोजाना नगर परिषद में काफी मामले सामने आ रहे हैं, जिनका समाधान कराया जा रहा है।
-अशोक कुमार दांगी, सचिव, नगर परिषद भिवानी।
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भिवानी शहर में 2018 में यासी कंपनी के माध्यम से शहरी मकानों का सर्वेक्षण का काम कराया गया था। करीब दो साल तक कंपनी सर्वे में ही उलझी रही और आखिरकार कंपनी ने नगर परिषद को सर्वेक्षण की आधी-अधूरी रिपोर्ट भी सौंप दी। यासी कंपनी ने नगर परिषद को करीब 75 हजार से अधिक प्रॉपर्टी की रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में अधिकांश प्रॉपर्टी में खामियां पाई र्गइं। सर्वे के चार साल बाद तक भी शहरवासी कंपनी की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। अब लोग टैक्स भुगतान नगर परिषद कार्यालय पहुंच रहे हैं तो उनके हाथों में लाखों का बकाया थमाया जा रहा है, जिसे देखकर वह भी हैरान हैं। अचरज यह भी है कि अधिकारी खुद सर्वे में खामी की बात कबूल रहे हैं, जबकि लोगों के टैक्स की गड़बड़ी या फिर उनकी प्रॉपर्टी आईडी को ठीक कराने के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। ऐसे में लोग भी दिनभर इधर-उधर घूमकर घर लौट रहे हैं। नगर परिषद के खाते में इस साल अब तक एक करोड़ 57 लाख 28 हजार 25 रुपये का हाउस टैक्स जमा हो चुका है, जबकि नगर परिषद के बकायादारी अब भी करीब 50 करोड़ से अधिक की खड़ी है। ऐसे में हाउस टैक्स छूट 31 दिसंबर तक दी गई है। मगर इसके बावजूद लोग चाहकर भी अपना हाउस टैक्स जमा नहीं करा पा रहे हैं।
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ये है गृहकर के साथ कूड़ा उठान की राशि
50 से 100 वर्गगज मकान 240 रुपये सालाना
150 वर्गगज मकान 480 रुपये सालाना
200 वर्गगज मकान 600 रुपये सालाना
400 वर्गगज तक मकान 1200 रुपये सालाना
ये है प्रॉपर्टी टैक्स
300 वर्गगज तक 50 पैसे प्रति वर्गगज रुपये सालाना टैक्स है। 300 से 500 वर्गगज पर दो रुपये प्रति वर्गगज का टैक्स लग रहा है। हाउस टैक्स के अलावा कूड़ा उठान टैक्स व फायर टैक्स भी जोड़ा जा रहा है।
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साढ़े चार लाख की आबादी पर सिर्फ 15 टिपर ऑटो कर रहे कूड़ा उठान
शहर की करीब साढ़े चार लाख की आबादी और करीब 80 हजार घरों में सिर्फ 15 टिपर ऑटो ही कूड़ा उठान के लिए लगे हैं। इस लिहाज से शहर के 31 वार्डों में सिर्फ 15 वार्डों में ही टीपर ऑटो कूड़ा उठा रहे हैं, ये ऑटो भी घर-घर कूड़ा उठान के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, मगर नगर परिषद शहरवासियों से कूड़ा उठान के नाम का टैक्स जरूर वसूल रहा है। 16 नए टिपर ऑटो सिर्फ कंपनी के ज्यादा रेट में खरीद की वजह से नगर परिषद के हैंडओवर नहीं हुए हैं, ऐसे में नगर परिषद घर-घर कूड़ा उठान नहीं करा पा रही है। टैक्स की रसीद में कूड़ा उठान की कई सालों की राशि भी जोड़कर भेजी जा रही हैं, जिससे लोगों की सिरदर्द बढ़ गई है।
नगर परिषद ने बनाई आईटी सैल, छह कर्मचारी कर रहे समस्या समाधान
यासी कंपनी के सर्वे की त्रुटियों के साथ-साथ हाउस टैक्स में गड़बड़ी की शिकायतें लेकर आने वालों के लिए नगर परिषद ने अलग से आईटी सैल बनाया है। इसमें छह कर्मचारियों की तैनाती की गई है। फिलहाल आईटी सैल के कर्मचारी शहरी दायरे में यासी कंपनी के सर्वे में दर्शायी गई प्रॉपर्टी और नगर परिषद रिकार्ड की प्रॉपर्टी का मिलान भी कर रही है। जिन लोगों की इन मुद्दों से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके भी निशुल्क ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।
यासी कंपनी के सर्वे में दर्शायी गई प्रॉपर्टी का नगर परिषद रिकार्ड से मिलान किया जा रहा है। इसी के साथ जिन लोगों की प्रॉपर्टी आईडी में त्रुटी है या फिर हाउस टैक्स से जुड़ी कोई समस्या है, उसके लिए अलग से आईटी सैल बनाया है। इसमें कर्मचारी लोगों की ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। रोजाना नगर परिषद में काफी मामले सामने आ रहे हैं, जिनका समाधान कराया जा रहा है।
-अशोक कुमार दांगी, सचिव, नगर परिषद भिवानी।