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माफी मांगने पर पंचायत ने वापस लिया फरमान
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 11 Jul 2016 12:32 AM IST
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धान बिजाई को लेकर गांव चरखी में मंगलवार को आयोजित पंचायत में पांच परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का सुनाया गया फरमान पंचायत ने वापस ले लिया है। यह फैसला रविवार को आयोजित पंचायत में बहिष्कृत परिवारों के सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने और भविष्य में धान बिजाई न करने के वायदे पर लिया गया। इस दौरान पंचायत ने आर्थिक दंड भी माफ करने का फैसला लिया। पंचायत के नए फरमान के चलते इन परिवारों को आगामी पंचायत में बैठने की तो अनुमति होगी मगर किसी तरह का सलाह देने पर प्रतिबंध रहेगा।
रविवार को गांव चरखी में 36 बिरादरी की पंचायत आयोजित की गई जिसमें धान की रोपाई करने वाले परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला वापस लेने का निर्णय लिया गया। पंचायत ने पीड़ित परिवार पर लगाए सभी प्रकार के सामाजिक दंड संबंधी निर्णय वापस ले लिए हैं। पंचायत की अघ्यक्षता सांगवान खाप प्रधान कर्नल रिसाल सिंह ने की। पंचायत में सरपंच गुलजारी, सोमवार सांगवान, पूर्व सरपंच मास्टर ताराचंद, पूर्व सरपंच कुलदीप सिंह, पूर्व सरपंच भूपेंद्र सिंह, जुगतीराम, धर्मबीर सिंह, सूबेदार सतीश, पहलवान सुरेश, वीरेंद्र सिंह, महीपाल, नंबरदार ओम, सत्यवान, मातूराम आदि मौजूद थे।
बन गई थी तनाव की स्थिति
गत मंगलवार को गांव चरखी में पंचायत ने गांव के कुछ लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। बहिष्कृत परिवार ने गांव के पुराने फैसले का उल्लंघन कर धान की रोपाई कर दी थी। गांव में गत चार साल से धान की रोपाई पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसे लेकर गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी हरकत मेें आ गया था। फैसले के तीन दिन बाद पीड़ित परिवार ने गांव के आपसी भाईचारे में विश्वास जताते हुए रोपित की गई अपनी धान की फसल को खुद ही उखाड़ दिया था।
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पंचायत में हुई सुलह
गांव के पूर्व सरपंच मास्टर ताराचंद ने बताया कि बहिष्कृत परिवार में काफी दिनों से बीमार वृद्घा की मौत होने पर मातमपुर्सी में शामिल हो या नहीं इस पर मंथन के लिए रविवार को पंचायत आयोजित की गई थी। तत्पश्चात पंचायत में पीड़ित परिवार के सामाजिक बहिष्कार का मुद्दा भी छा गया। पंचायत में परिवारों को माफ करने के फैसले के बाद सुलह हो गई।
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रविवार को गांव चरखी में 36 बिरादरी की पंचायत आयोजित की गई जिसमें धान की रोपाई करने वाले परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला वापस लेने का निर्णय लिया गया। पंचायत ने पीड़ित परिवार पर लगाए सभी प्रकार के सामाजिक दंड संबंधी निर्णय वापस ले लिए हैं। पंचायत की अघ्यक्षता सांगवान खाप प्रधान कर्नल रिसाल सिंह ने की। पंचायत में सरपंच गुलजारी, सोमवार सांगवान, पूर्व सरपंच मास्टर ताराचंद, पूर्व सरपंच कुलदीप सिंह, पूर्व सरपंच भूपेंद्र सिंह, जुगतीराम, धर्मबीर सिंह, सूबेदार सतीश, पहलवान सुरेश, वीरेंद्र सिंह, महीपाल, नंबरदार ओम, सत्यवान, मातूराम आदि मौजूद थे।
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बन गई थी तनाव की स्थिति
गत मंगलवार को गांव चरखी में पंचायत ने गांव के कुछ लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। बहिष्कृत परिवार ने गांव के पुराने फैसले का उल्लंघन कर धान की रोपाई कर दी थी। गांव में गत चार साल से धान की रोपाई पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसे लेकर गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी हरकत मेें आ गया था। फैसले के तीन दिन बाद पीड़ित परिवार ने गांव के आपसी भाईचारे में विश्वास जताते हुए रोपित की गई अपनी धान की फसल को खुद ही उखाड़ दिया था।
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पंचायत में हुई सुलह
गांव के पूर्व सरपंच मास्टर ताराचंद ने बताया कि बहिष्कृत परिवार में काफी दिनों से बीमार वृद्घा की मौत होने पर मातमपुर्सी में शामिल हो या नहीं इस पर मंथन के लिए रविवार को पंचायत आयोजित की गई थी। तत्पश्चात पंचायत में पीड़ित परिवार के सामाजिक बहिष्कार का मुद्दा भी छा गया। पंचायत में परिवारों को माफ करने के फैसले के बाद सुलह हो गई।