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Bhiwani News: श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचन ने सुनाया श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता वर्णन
Thu, 10 Apr 2025 10:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 10 Apr 2025 10:08 PM IST
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गांव देवराला स्थित बाबा मुंगीपा मंदिर में आयोजित भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।
कैरू। गांव देवराला स्थित बाबा मुंगीपा मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन वैष्णावाचार्य पंडित मुरारी लाल शास्त्री ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने सातवें दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता का वर्णन किया गया।
वैष्णावाचार्य मुरारी लाल शास्त्री ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण सुदामा से समझा जा सकता हैं। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचा। द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वार पालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं।
इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना, प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। वहीं सामने सुदामा सखा को देखकर अपने सीने से लगा लिया।
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सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए और उनका अभिनंदन किया। इस दृश्य को देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। उन्होंने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की। इस मौके पर आयोजक कैलाश जिंदल, इंद्रा जिंदल, कमल जिंदल व संजीव जिंदल मौजूद रहे। 11 अप्रैल को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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वैष्णावाचार्य मुरारी लाल शास्त्री ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण सुदामा से समझा जा सकता हैं। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचा। द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वार पालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं।
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इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना, प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। वहीं सामने सुदामा सखा को देखकर अपने सीने से लगा लिया।
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सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए और उनका अभिनंदन किया। इस दृश्य को देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। उन्होंने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की। इस मौके पर आयोजक कैलाश जिंदल, इंद्रा जिंदल, कमल जिंदल व संजीव जिंदल मौजूद रहे। 11 अप्रैल को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।