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खास खबर: सरपंचों के विरोध के बावजूद अब ग्राम पंचायतों ने विभाग को भेजे विकास कार्यों के 250 प्रस्ताव
Sat, 04 Feb 2023 09:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 04 Feb 2023 09:56 PM IST
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भिवानी। ई-टेंडरिंग और पंचायत मंत्री के रवैये से खफा सरपंचों के विरोध के सुर मुखर होने के बावजूद भी अब ग्राम पंचायतों ने गांव का विकास कराने में सराहनीय पहल शुरू कर दी है। ग्राम पंचायतों की तरफ से दो लाख से नीचे के विकास कार्यों के करीब 250 प्रस्ताव भी पंचायती राज विभाग के समक्ष आ चुके हैं, जिन पर अब जल्द ही काम भी शुरू हो जाएगा। हाल ही में सरकार ने भिवानी जिले के 312 गांवों में प्रत्येक गांव की पंचायत के खाते में पांच से दस लाख रुपये तक का बजट मुहैया कराया है।
भिवानी खंड के 78 गांवों में विकास कार्यों के 89 प्रस्ताव विभाग को भेजे गए हैं। इतना ही नहीं जिन ग्राम पंचायतों के पास खुद का फंड है, वे भी अब विकास का खाका तैयार करेंगी। सरपंचों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा हैं, मगर इस बीच गांव के विकास को लेकर भी सुखद पहलु यह है कि दो लाख तक के विकास कार्यों के लिए भी ग्राम पंचायतों ने अपनी रुचि दिखाना शुरू कर दिया है। दो लाख के नीचे बजट में गांव के अंदर छोटे-मोटे विकास कार्य कराने के प्रस्ताव भी ग्राम पंचायतों की तरफ से पंचायती राज विभाग को भेजे जा रहे हैं, जिसमें अधूरी पड़ी गलियां या फिर सरकारी भवनों की मामूली मरम्मत के काम शामिल हैं। हालांकि ग्राम पंचायतों की तरफ से अभी बड़े कार्यों के लिए विभाग के समक्ष कोई प्रस्ताव नहीं आए हैं, क्योंकि सरकार ने भी पंचायतों को अभी थोड़ा बजट ही दिया है। पंचायती राज विभाग के समक्ष 312 गांवों में करीब 250 विकास कार्यों के प्रस्ताव पहुंचे हैं, जिसमें भिवानी खंड की 78 ग्राम पंचायतों के 89 विकास कार्यों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
खुद के फंड इस्तेमाल में पंचायत स्वतंत्र, ई-टेंडरिंग से ही कराने होंगे मोटे बजट के काम
भिवानी जिले में करीब 30 ग्राम पंचायतों के पास तो 50 लाख से अधिक खुद का फंड जमा है, वहीं 70 ग्राम पंचायतों की सालाना आमदनी भी ठीक है। खुद के फंड इस्तेमाल में इन गांवों की ग्राम पंचायत स्वतंत्र हैं, मगर इन्हें दो लाख से ऊपर के कार्य के लिए बजट खर्च पर ई टेंडरिंग से काम कराने अनिवार्य है। हालांकि जिले में 212 ग्राम पंचायतों के खाते में भी सरकार ने हाल ही में थोड़ा बजट दिया है। इस पर पंचायतें दो लाख तक के कार्य बिना टेंडर के ही करा सकते हैं।
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यह है प्रावधान
विकास कार्यों के लिए 25 लाख रुपये तक का बजट सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में डाला जाएगा। इससे ऊपर का बजट पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता के पास जाएगा, जिस पर विकास कार्यों के एस्टीमेट तैयार कराकर गांवों में संबंधित विकास कार्य कराए जाएंगे।
पहले 20 लाख अब दो लाख तक सिमटा विकास कार्यों का मामला
पहले ग्राम पंचायत में 20 लाख रुपये तक के विकास कार्य बिना टेंडर ही करा सकते थे, लेकिन अब मामला सिर्फ दो लाख तक सिमट कर रह गया है। दो लाख तक ही पंचायत बिना टेंडर गांव में काम करा सकते हैं, इससे ऊपर पर विभाग ई टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाएगा।
ये होगा फायदा
ई टेंडरिंग में विभाग की अधिकृत एजेंसियां प्रतिस्पर्धा के चलते कम रेट पर काम करने पर राजी होंगी। इससे कम बजट में गांव के अंदर अधिक विकास का काम कराया जा सकेगा। जो एजेंसी विकास कार्य करेगी लगातार तीन साल तक उस कार्य की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। ग्राम पंचायत भी विकास कार्यों को अपनी निगरानी में कराएंगी, कोई भी खामी है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज होगी और समाधान भी तुरंत होगा।
ग्राम पंचायतों द्वारा इमरजेंसी के कार्यों के लिए करीब 250 प्रस्ताव विभाग के समक्ष आए हैं। इनमें अकेले भिवानी खंड के 78 ग्राम पंचायतों से अब तक हमारे पास 89 प्रस्ताव आ चुके हैं। इन पर जल्द काम शुरू करा दिया जाएगा। ये कार्य बिना टेंडर के ही कराए जाएंगे, क्योंकि ये दो लाख से कम बजट के हैं।
-प्रवीण बजाज, एसडीओ पंचायती राज विभाग।
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भिवानी खंड के 78 गांवों में विकास कार्यों के 89 प्रस्ताव विभाग को भेजे गए हैं। इतना ही नहीं जिन ग्राम पंचायतों के पास खुद का फंड है, वे भी अब विकास का खाका तैयार करेंगी। सरपंचों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा हैं, मगर इस बीच गांव के विकास को लेकर भी सुखद पहलु यह है कि दो लाख तक के विकास कार्यों के लिए भी ग्राम पंचायतों ने अपनी रुचि दिखाना शुरू कर दिया है। दो लाख के नीचे बजट में गांव के अंदर छोटे-मोटे विकास कार्य कराने के प्रस्ताव भी ग्राम पंचायतों की तरफ से पंचायती राज विभाग को भेजे जा रहे हैं, जिसमें अधूरी पड़ी गलियां या फिर सरकारी भवनों की मामूली मरम्मत के काम शामिल हैं। हालांकि ग्राम पंचायतों की तरफ से अभी बड़े कार्यों के लिए विभाग के समक्ष कोई प्रस्ताव नहीं आए हैं, क्योंकि सरकार ने भी पंचायतों को अभी थोड़ा बजट ही दिया है। पंचायती राज विभाग के समक्ष 312 गांवों में करीब 250 विकास कार्यों के प्रस्ताव पहुंचे हैं, जिसमें भिवानी खंड की 78 ग्राम पंचायतों के 89 विकास कार्यों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
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खुद के फंड इस्तेमाल में पंचायत स्वतंत्र, ई-टेंडरिंग से ही कराने होंगे मोटे बजट के काम
भिवानी जिले में करीब 30 ग्राम पंचायतों के पास तो 50 लाख से अधिक खुद का फंड जमा है, वहीं 70 ग्राम पंचायतों की सालाना आमदनी भी ठीक है। खुद के फंड इस्तेमाल में इन गांवों की ग्राम पंचायत स्वतंत्र हैं, मगर इन्हें दो लाख से ऊपर के कार्य के लिए बजट खर्च पर ई टेंडरिंग से काम कराने अनिवार्य है। हालांकि जिले में 212 ग्राम पंचायतों के खाते में भी सरकार ने हाल ही में थोड़ा बजट दिया है। इस पर पंचायतें दो लाख तक के कार्य बिना टेंडर के ही करा सकते हैं।
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यह है प्रावधान
विकास कार्यों के लिए 25 लाख रुपये तक का बजट सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में डाला जाएगा। इससे ऊपर का बजट पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता के पास जाएगा, जिस पर विकास कार्यों के एस्टीमेट तैयार कराकर गांवों में संबंधित विकास कार्य कराए जाएंगे।
पहले 20 लाख अब दो लाख तक सिमटा विकास कार्यों का मामला
पहले ग्राम पंचायत में 20 लाख रुपये तक के विकास कार्य बिना टेंडर ही करा सकते थे, लेकिन अब मामला सिर्फ दो लाख तक सिमट कर रह गया है। दो लाख तक ही पंचायत बिना टेंडर गांव में काम करा सकते हैं, इससे ऊपर पर विभाग ई टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाएगा।
ये होगा फायदा
ई टेंडरिंग में विभाग की अधिकृत एजेंसियां प्रतिस्पर्धा के चलते कम रेट पर काम करने पर राजी होंगी। इससे कम बजट में गांव के अंदर अधिक विकास का काम कराया जा सकेगा। जो एजेंसी विकास कार्य करेगी लगातार तीन साल तक उस कार्य की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। ग्राम पंचायत भी विकास कार्यों को अपनी निगरानी में कराएंगी, कोई भी खामी है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज होगी और समाधान भी तुरंत होगा।
ग्राम पंचायतों द्वारा इमरजेंसी के कार्यों के लिए करीब 250 प्रस्ताव विभाग के समक्ष आए हैं। इनमें अकेले भिवानी खंड के 78 ग्राम पंचायतों से अब तक हमारे पास 89 प्रस्ताव आ चुके हैं। इन पर जल्द काम शुरू करा दिया जाएगा। ये कार्य बिना टेंडर के ही कराए जाएंगे, क्योंकि ये दो लाख से कम बजट के हैं।
-प्रवीण बजाज, एसडीओ पंचायती राज विभाग।