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1500 रुपये में एक बंदर होगा पिंजरे के अंदर
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शहर के एक मकान पर बैठा बंदर । संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : Bhiwani
शहरवासियों के लिए आफत बन चुके बंदर अब जल्द पिंजरे के अंदर होंगे। इसके लिए नगर परिषद ने शहर से दो हजार बंदर पकड़ने के लिए शनिवार को टेंडर आमंत्रित किए हैं। जो 11 फरवरी को खोले जाएंगे। एक बंदर को पिंजरे के अंदर करने में नगर परिषद का 1500 रुपये का औसतन खर्च आएगा। जबकि पूरे शहर से दो हजार बंदर पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। पिछले सप्ताह ही नगर परिषद को शहर से बंदर पकड़ने के लिए वन्य प्राणी जीव जंतु विभाग से अनुमति भी मिल चुकी है। जिसके बाद ही नगर परिषद ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की। वहीं बंदर पकड़ने से पहले जिला प्रशासन से भी अनुमति ली जाएगी। बंदर पकड़ने की शुरूआत वहां से होगी, जहां पर बंदरों का सबसे अधिक आतंक मचा हुआ है।
भिवानी नगर परिषद के पास करीब 25 लाख रुपये का बजट शहर से बंदर पकड़ने के लिए मंजूर हुआ है। इस बजट के मंजूर होने के बाद ही नगर परिषद ने शहर को बंदरों से मुक्ति दिलाने के लिए वन्य प्राणी जीव जंतु विभाग से अनुमति मांगी थी। जिस पर चंडीगढ़ मुख्यालय से वन्य प्राणी विभाग ने भी अपनी अनुमति की मोहर लगा दी। इसी के बाद नगर परिषद ने शनिवार को बंदर पकड़ने के लिए टेंडर आमंत्रित किए।
पिछले साल भी बंदर पकड़ने के लिए किसी एजेंसी ने नहीं किया आवेदन
पिछले वर्ष भी बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद ने टेंडर आमंत्रित किए थे, लेकिन किसी भी एजेंसी ने शहर से बंदर पकड़ने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी वजह से ये मामला खटाई में पड़ गया और फिर इस बार नए सिरे से बंदर पकड़ने की प्रक्रिया अपनाई। करीब चार पांच साल पहले शहर से बंदर पकड़ने के लिए एक एजेंसी ने काम किया था, उस समय उसके भुगतान में काफी दिक्कतें आई थी वहीं पकड़े गए बंदर भी शहर में ही घूमते हुए नजर आए थे।
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बंदरों की वजह से लोग घरों के अंदर जालियों में हुए कैद
शहर के अंदर बंदरों का इतना आतंक बना हुआ है कि लोगों ने अपने घरों के बाहर छज्जों व गैलरी के अंदर भी लोहे की जालियां लगवा रखी हैं। जिनके अंदर लोग कैद होकर रह गए हैं। क्योंकि बंदर छतों के रास्ते घरों के अंदर घुसकर भी रसोई से खाने पीने की चीजें चोरी कर रहे हैं, जिन्हें रोकने के प्रयास में कई लोगों को बंदर काट भी चुके हैं। इस तरह लोग बंदरों से बचाव के लिए घरों में संभावित जगहों पर लोहे की जालियां लगवा रहे हैं।
ये हैं सबसे अधिक बंदरों से प्रभावित क्षेत्र
शहर के कृष्णा कॉलोनी, नया बाजार, पुराना बस स्टैंड, रोहतक गेट क्षेत्र, विकास नगर, दिनोद गेट, जैन चौक, दादरी गेट, हनुमान ढाणी, हनुमान गेट, घोसियान चौक, बावड़ीगेट क्षेत्र, जगत कॉलोनी, चिरंजीव कॉलोनी, विजय नगर, हांसी गेट क्षेत्र, घंटाघर, जिला सामान्य अस्पताल क्षेत्र, रेलवे स्टेशन, जीतुवाला जोहड़ क्षेत्र, दिनोद रोड की कॉलोनियां, नई अनाज मंडी, सब्जी मंडी रोहतक रोड, भारत नगर कॉलोनी, न्यू भारत नगर, बैंक कॉलोनी, देवसर चुंगी क्षेत्र, हालु मोहल्ल्ला, बाड़ी मोहल्ल्ला, पतराम गेट सहित अनेक शहर के अंदरूनी इलाकों की कॉलोनियां बदंरों से सबसे अधिक परेशान हैं।
नगर परिषद ने शहर से बंदर पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। 11 फरवरी को टेंडर ओपन किए जाएंगे। जिसके बाद डीसी से भी अनुमति के बाद बंदर पकडने का काम शुरू होगा। प्रत्येक बंदर पकडने पर औसतन 1500 रुपये का खर्च आएगा। शहर से एक बार में दो हजार बंदर पकड़े जाएंगे। अगर इसके बावजूद भी बंदर बचते हैं तो फिर अलग से टेंडर कराकर उन्हें भी पकड़ने का काम किया जाएगा।
- दीपक गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।
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भिवानी नगर परिषद के पास करीब 25 लाख रुपये का बजट शहर से बंदर पकड़ने के लिए मंजूर हुआ है। इस बजट के मंजूर होने के बाद ही नगर परिषद ने शहर को बंदरों से मुक्ति दिलाने के लिए वन्य प्राणी जीव जंतु विभाग से अनुमति मांगी थी। जिस पर चंडीगढ़ मुख्यालय से वन्य प्राणी विभाग ने भी अपनी अनुमति की मोहर लगा दी। इसी के बाद नगर परिषद ने शनिवार को बंदर पकड़ने के लिए टेंडर आमंत्रित किए।
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पिछले साल भी बंदर पकड़ने के लिए किसी एजेंसी ने नहीं किया आवेदन
पिछले वर्ष भी बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद ने टेंडर आमंत्रित किए थे, लेकिन किसी भी एजेंसी ने शहर से बंदर पकड़ने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी वजह से ये मामला खटाई में पड़ गया और फिर इस बार नए सिरे से बंदर पकड़ने की प्रक्रिया अपनाई। करीब चार पांच साल पहले शहर से बंदर पकड़ने के लिए एक एजेंसी ने काम किया था, उस समय उसके भुगतान में काफी दिक्कतें आई थी वहीं पकड़े गए बंदर भी शहर में ही घूमते हुए नजर आए थे।
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बंदरों की वजह से लोग घरों के अंदर जालियों में हुए कैद
शहर के अंदर बंदरों का इतना आतंक बना हुआ है कि लोगों ने अपने घरों के बाहर छज्जों व गैलरी के अंदर भी लोहे की जालियां लगवा रखी हैं। जिनके अंदर लोग कैद होकर रह गए हैं। क्योंकि बंदर छतों के रास्ते घरों के अंदर घुसकर भी रसोई से खाने पीने की चीजें चोरी कर रहे हैं, जिन्हें रोकने के प्रयास में कई लोगों को बंदर काट भी चुके हैं। इस तरह लोग बंदरों से बचाव के लिए घरों में संभावित जगहों पर लोहे की जालियां लगवा रहे हैं।
ये हैं सबसे अधिक बंदरों से प्रभावित क्षेत्र
शहर के कृष्णा कॉलोनी, नया बाजार, पुराना बस स्टैंड, रोहतक गेट क्षेत्र, विकास नगर, दिनोद गेट, जैन चौक, दादरी गेट, हनुमान ढाणी, हनुमान गेट, घोसियान चौक, बावड़ीगेट क्षेत्र, जगत कॉलोनी, चिरंजीव कॉलोनी, विजय नगर, हांसी गेट क्षेत्र, घंटाघर, जिला सामान्य अस्पताल क्षेत्र, रेलवे स्टेशन, जीतुवाला जोहड़ क्षेत्र, दिनोद रोड की कॉलोनियां, नई अनाज मंडी, सब्जी मंडी रोहतक रोड, भारत नगर कॉलोनी, न्यू भारत नगर, बैंक कॉलोनी, देवसर चुंगी क्षेत्र, हालु मोहल्ल्ला, बाड़ी मोहल्ल्ला, पतराम गेट सहित अनेक शहर के अंदरूनी इलाकों की कॉलोनियां बदंरों से सबसे अधिक परेशान हैं।
नगर परिषद ने शहर से बंदर पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। 11 फरवरी को टेंडर ओपन किए जाएंगे। जिसके बाद डीसी से भी अनुमति के बाद बंदर पकडने का काम शुरू होगा। प्रत्येक बंदर पकडने पर औसतन 1500 रुपये का खर्च आएगा। शहर से एक बार में दो हजार बंदर पकड़े जाएंगे। अगर इसके बावजूद भी बंदर बचते हैं तो फिर अलग से टेंडर कराकर उन्हें भी पकड़ने का काम किया जाएगा।
- दीपक गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।