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विदेशों में भी हैं म्हारे सरताज के फ्रेंड फॉलोअर्स
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गांव तालू निवासी सुमेश कुमार अपने सरताज के साथ। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : Bhiwani
गेहूं व धान की खेती करने वाला जिले के गांव तालु का किसान सुमेश कुमार के झोटे सरताज ने कुरुक्षेत्र में हुए पशु में तृतीय स्थान हासिल किया।
तालू के पशुपालक सुमेश कुमार को उसके पशु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहे है। सुमेश को 15 साल की उम्र में पशुपालन का जुनून ऐसा हुआ कि आज पशुओं से वह हर साल आठ से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहा है। मुर्राह नस्ल के उसके झोटे सरजात के फ्रेंड फॉलोअर्स तो विदेशों तक हैं।
18 व 19 जनवरी को कुरुक्षेत्र में डेयरी फार्मिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित पशु मेले में जज की भूमिका निभाने पहुंचे फ्रांस व नीदरलैंड के पशु चिकित्सक अंटलोनी व कोवेन ने सरताज के मालिक सुमेश को उनके देश आने का न्योता भी दे दिया है। इन विदेशी डॉक्टरों ने सुमेश को कहा कि वे सीबीएस कैटल फार्म की सोशल मीडिया पर सरताज के फ्रेंड हैं। वे उनके देश के पशुपालकों को भी पशुपालन की दिनचर्या के बारे में गहनता से बता कर आएं। इस मेले में सुमेश का सरताज पूरे देश में तीसरे नंबर पर रहा है।
सुमेश के सीबीएस कैटल फार्म में एक दर्जन से भी ज्यादा मुर्राह नस्ल की भैंस व पांच मुर्राह बुल हैं। सुमेश को मुर्राह पशुपालन में असल पहचान उसके झोटे सम्राट ने दिलाई। अब सुमेश अपने दो बुलों के सीमन से मुर्राह नस्ल को सुधारने के लिए देश भर में अपने बलबूते सीमन पहुंचा रहा है। उसके घर में तीन पीढ़ियों से चली आ रही मुर्राह पशुपालन के क्रेज को देख अब गांव तालु व आस पास के गांवों के किसान भी पशुपालन में विशेष रुचि लेने लगे हैं।
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37 पशु चैंपियनशिप जीत चुके हैं सुमेश के पशु : दादा भरत सिंह व पिता विजेंद्र सिंह के बाद खुद पशुपालन में उतरने के बाद सुमेश ने पशु चैंपियनशिप के दौरान दूध प्रतियोगिताएं, कैट वॉक, सुंदरता सहित अनेकों कटेगरी में अब तक 37 बार चैंपियनशिप का खिताब जीत कर तालु गांव का मान बढ़ा चुके हैं। इनमें दो बार पंजाब के मुक्तसर में सम्राट नेशनल चैंपियन बना है। देश में सबसे ज्यादा दूध देने का रिकार्ड भी सुमेश की भैंस के नाम ही है। एचएलडीबी में 27.800 किलोग्राम, 26 किलोग्राम व 25.300 किलोग्राम एक भैंस से प्रतिदिन दूध का रिकॉर्ड इसके नाम है।
31 लाख में बिका था सम्राट : साल 2016 में आंध्रप्रदेश का किसान बदराराव सिंह सम्राट को 31 लाख में खरीद कर ले गया था। जब सुमेश ने सम्राट को बेचा तब सम्राट के ही सीमन से जन्मे बुल सरजात व सूर्या भी पशु प्रदर्शनियों में अपना नाम चमकाने लगे थे। सम्राट से लेकर सरताज व सूर्या का जन्म सुमेश के घर हुआ है। वह अपने घर में छह से नौ माह की मुर्राह नस्ल के सात कटड़े-कटडियाें को विशेष रूप से तैयार करने में लगा है।
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तालू के पशुपालक सुमेश कुमार को उसके पशु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहे है। सुमेश को 15 साल की उम्र में पशुपालन का जुनून ऐसा हुआ कि आज पशुओं से वह हर साल आठ से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहा है। मुर्राह नस्ल के उसके झोटे सरजात के फ्रेंड फॉलोअर्स तो विदेशों तक हैं।
18 व 19 जनवरी को कुरुक्षेत्र में डेयरी फार्मिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित पशु मेले में जज की भूमिका निभाने पहुंचे फ्रांस व नीदरलैंड के पशु चिकित्सक अंटलोनी व कोवेन ने सरताज के मालिक सुमेश को उनके देश आने का न्योता भी दे दिया है। इन विदेशी डॉक्टरों ने सुमेश को कहा कि वे सीबीएस कैटल फार्म की सोशल मीडिया पर सरताज के फ्रेंड हैं। वे उनके देश के पशुपालकों को भी पशुपालन की दिनचर्या के बारे में गहनता से बता कर आएं। इस मेले में सुमेश का सरताज पूरे देश में तीसरे नंबर पर रहा है।
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सुमेश के सीबीएस कैटल फार्म में एक दर्जन से भी ज्यादा मुर्राह नस्ल की भैंस व पांच मुर्राह बुल हैं। सुमेश को मुर्राह पशुपालन में असल पहचान उसके झोटे सम्राट ने दिलाई। अब सुमेश अपने दो बुलों के सीमन से मुर्राह नस्ल को सुधारने के लिए देश भर में अपने बलबूते सीमन पहुंचा रहा है। उसके घर में तीन पीढ़ियों से चली आ रही मुर्राह पशुपालन के क्रेज को देख अब गांव तालु व आस पास के गांवों के किसान भी पशुपालन में विशेष रुचि लेने लगे हैं।
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37 पशु चैंपियनशिप जीत चुके हैं सुमेश के पशु : दादा भरत सिंह व पिता विजेंद्र सिंह के बाद खुद पशुपालन में उतरने के बाद सुमेश ने पशु चैंपियनशिप के दौरान दूध प्रतियोगिताएं, कैट वॉक, सुंदरता सहित अनेकों कटेगरी में अब तक 37 बार चैंपियनशिप का खिताब जीत कर तालु गांव का मान बढ़ा चुके हैं। इनमें दो बार पंजाब के मुक्तसर में सम्राट नेशनल चैंपियन बना है। देश में सबसे ज्यादा दूध देने का रिकार्ड भी सुमेश की भैंस के नाम ही है। एचएलडीबी में 27.800 किलोग्राम, 26 किलोग्राम व 25.300 किलोग्राम एक भैंस से प्रतिदिन दूध का रिकॉर्ड इसके नाम है।
31 लाख में बिका था सम्राट : साल 2016 में आंध्रप्रदेश का किसान बदराराव सिंह सम्राट को 31 लाख में खरीद कर ले गया था। जब सुमेश ने सम्राट को बेचा तब सम्राट के ही सीमन से जन्मे बुल सरजात व सूर्या भी पशु प्रदर्शनियों में अपना नाम चमकाने लगे थे। सम्राट से लेकर सरताज व सूर्या का जन्म सुमेश के घर हुआ है। वह अपने घर में छह से नौ माह की मुर्राह नस्ल के सात कटड़े-कटडियाें को विशेष रूप से तैयार करने में लगा है।