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सरकारी स्कूल के विद्यार्थी अव्वल कैसे आएं, पहनने को वर्दी न पढ़ने को किताबें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 12:03 AM IST
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How to come top students of government schools, books to wear, not to read uniforms
बीटीएम चौक स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल। - फोटो : Bhiwani
भिवानी। प्रदेश सरकार स्कूलों को अव्वल बनाने का दावा करती है मगर धरातल पर उनकी व्यवस्थाएं सारे दावों की पोल खोल रही है। नए शिक्षा सत्र के साढ़े तीन माह बीत जाने के बाद भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब तक पहनने के लिए वर्दी और पढ़ने के लिए किताबें नहीं मिली है। अध्यापकों द्वारा दिया कार्य पूरा करने के लिए उन्हें स्टेशनरी सामग्री का भत्ता सहित अन्य कोई छात्रवृत्ति तक नहीं मिली है। इसके अलावा जिन बैंक खातों में ये भत्ते और छात्रवृत्ति आनी है वे भी अपडेट नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। विद्यार्थियों को पठन और लेखन सामग्री न मिल पाने के लिए उनकी पढ़ाई बीच में रुक सी गई है।
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जिले में नर्सरी से आठवीं कक्षा तक कुल 75,175 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। जिनमें से कक्षा नर्सरी से पांचवीं तक 47,839 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। वहीं कक्षा छठी से आठवीं तक 27,336 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। सरकारी स्कूलों में वर्दी के लिए 800 और स्टेशनरी सहित अन्य सामग्री के 250 से 300 रुपये तक भत्ता दिया जाता है, जोकि इस साल नहीं मिला है।
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बाजार से वर्दी खरीदने को मजबूर अभिभावक
सरकार की ओर स्कूल की वर्दी के लिए दिया जाने वाला भत्ता जारी नहीं होने की वजह से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ आ गया है। पहले वे अपने बच्चों की किताबों, वर्दी को लेकर निश्चिंत थे, मगर अब उन्हें इसके लिए अपनी जेब से रुपये देने पड़ रहे है। बाजार में 500 से लेकर 800 रुपये तक अदा करके वे अपने बच्चों की वर्दी खरीदने के लिए मजबूर हैं। वहीं कोरोना की वजह से पहले ही काम-धंधे प्रभावित हो गए थे और अब वर्दी सहित किताबों का अतिरिक्त खर्च का बोझ अभिभावकों का वहन करना पड़ रहा है। साथ ही जो अभिभावक वर्दी खरीदने में सक्षम नहीं है, उनके बच्चे छुट्टियों से पहले बिना वर्दी के रंगीन कपड़ों में ही स्कूल जाते थे।
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कक्षानुसार पुस्तकों और वर्दी का मूल्य
कक्षा - पुस्तक मूल्य - वर्दी मूल्य
प्री नर्सरी, नर्सरी - 200 रुपये - 500 से 600 रुपये
पहली से पांचवीं - 300 रुपये - 600 से 700 रुपये
छठी से आठवीं - 700 रुपये - 700 से 800 रुपये
नोट: यह मूल्य दुकानदारों से प्राप्त किया है।
किताबें न मिलने के कारण विद्यार्थी परेशान
सरकार द्वारा पिछली साल कोरोना काल में राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को किताबों के रुपये उनके बैंक खातों में डाले थे। इस साल सरकार ने विद्यार्थियों को नि:शुल्क रूप से किताबें उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए थे, लेकिन अब तक स्कूलों में किताबें नहीं आई है। ऐसे में नए सत्र के विद्यार्थी कक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थियों से उनकी पुरानी किताबें मांगकर पढ़ने को मजबूर है। ऐसे में अधिकतर विद्यार्थियों के पास तो फटी-पुरानी किताबें है, जिसकी वजह से ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे। साथ ही बाजार में दुकानों पर पर्याप्त संख्या में किताबें भी नहीं हैं।
अधिकतर विद्यार्थियों के नहीं खुले बैंक खाते
सरकार की ओर से राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा के लिए भी आर्थिक रूप से मदद करने के लिए छात्रवृत्ति और वर्दी का भत्ता दिया जाता है। इसके लिए स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों के बैंक खाते खुलवाएं जाते है, जिसके लिए अलग से एक टीचर को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया जाता है। विद्यार्थियों को बैंक खाता खुलवाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही सभी कागजी कार्रवाई का जिम्मा नोडल ऑफिसर का रहता है। लेकिन इस साल अभी तक अधिकतर विद्यार्थियों के बैंक खाते ही नहीं खोले गए है, जिसके कारण वे छात्रवृत्ति सहित अन्य भत्तों से वंचित रह गए है। अब ग्रीष्मकालीन छुट्टियों होने की वजह से बैंक खाते दूरी से खुल पाएंगे।

राजकीय स्कूलों में पढ़ने वाले नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को सरकार की ओर से निशुल्क रूप से किताब, वर्दी सहित स्टेशनरी सामग्री दी जाती है। इस साल एमआईएस पोर्टल में आई परेशानियों की वजह से दाखिलों की सूची ठीक से तैयारी नहीं हो पाई, जिसकी वजह से काफी काम प्रभावित हुआ है। विद्यार्थियों के बैंक खाते अपडेट न होने के कारण में कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में नोडल ऑफिसर से बातचीत कर समस्या का समाधान करवाया दिया जाएगा।
- नरेश महता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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